EESL कंपनी को देहरादून में ब्लैक लिस्ट करने की तैयारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब भी बिजली बचत को लेकर फ़्लोरोसेंट, सीएफ़एल बल्बों को एलईडी से बदलने और उनसे बचत के आंकड़े दे रहे होते हैं तो वह अघोषित रूप से ईईसीएल की पीठ थपथपा रहे होते हैं. जब भी प्रधानमंत्री 2030 में देश से पैट्रोल-डीज़ल वाहनों को ख़त्म कर सिर्फ़ इलेक्ट्रिक व्हीकल चलाने का दावा कर रहे होते हैं तब वह ईईसीएल पर भरोसा जता रहे होते हैं. क्योंकि इन दोनों कामों का ज़िम्मा ईईसीएल पर ही है. लेकिन देहरादून जैसे छोटे शहर में स्ट्रीट लाइट्स बदलने में नाकाम रहकर ईईसीएल ने प्रधानमंत्री के इस भरोसे को तोड़ दिया है.

देहरादून में मार्च 2017 में नगर निगम और EESL कंपनी के बीच करार हुआ था जिसके तहत EESL को 31 अक्टूबर, 2017 तक देहरादून नगर क्षेत्र में मौजूद 42,000 सोडियम स्ट्रीट लाइटों को LED स्ट्रीट लाइटों से बदलना था.

अनुबन्ध के मुताबिक ईईसीएल को 7 महीने में यह काम पूरा करना था लेकिन एक साल बीतने के बावजूद कंपनी नगर निगम क्षेत्र में महज 28,000 LED स्ट्रीट लाइटें ही बदल पाई. जो लाइटें बदली भी गई हैं उनमें से ज़्यादातर खराब पड़ी हैं और इस वजह से स्थानीय लोगों की शिकायतें नगर-निगम में बढ़ती जा रही हैं.

बढ़ती शिकायतों के बीच नगर निगम ने ये लाइटें जांच के लिए आईआईटी रुड़की को भेजी हैं. साथ ही कम्पनी को चार नोटिस जारी किए हैं. नगरायुक्त विजय कुमार जोगदंडे कहते हैं कि अगर ईईसीएल से संतोषजनक जवाब नहीं मिल जाता तो उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा.

ईईसीएल कंपनी के पदाधिकारी इस मामले पर कंपनी का पक्ष रखने को तैयार नहीं हुए.

राजधानी देहरादून देश के खूबसूरत और छोटे शहरों में शामिल है. EESL का यहां फ़ेल होना बड़ा सवाल खड़ा करता है कि जो कम्पनी दून की 42000 लाइटों को नहीं बदल पा रही है उस कम्पनी के भरोसे पूरे देश की लाइटें LED में बदलने की ज़िम्मेदारी देना कितना सही है?

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