उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग में हुआ करोड़ों का घोटाला – CAG रिपोर्ट

कैग रिपोर्ट के अनुसार, CAG आहरण एवं संवितरण अधिकारी द्वारा प्रचलित वित्तीय को अनदेखा कर तथा आवश्यक विवरण, और दावों की प्रमाणिकता की जांच किये बिना ही ट्रेवल एजेंसी द्वारा प्रस्तुत दावों के विरुद्ध भुगतान किया गया, जिसके परिणाम स्वरूप 1.25 करोड़ का गबन पाया गया. प्रकरण में शासन द्वारा विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रारम्भ की गई और संबधित चिकित्सा अधिकारियों के आरोप पत्र निर्गत किये गए थे, लेकिन राजकोष को हुई 1.25 करोड़ की वित्तीय हानि की वसूली अभी तक नहीं की गई.
CAG ने इन अधिकारियों को कटघरे में किया खड़ा
  • मुख्य चिकित्सा अधिकारी उधम सिंह नगर के अभिलेखों की जांच में पाया गया कि किराये पर ली गयी टैक्सियों के 18 बिलों का ₹6.96 लाख का भुगतान संदिग्ध बिलों के विरुद्ध किया गया.
  • मुख्य चिकित्सा अधिकारी देहरादून द्वारा किराये पर ली गयी टैक्सियों के 41 बिलों का ₹18.60 लाख का भी संदिग्ध बिलों द्वारा ही किया गया.
  • ₹58.44 लाख की धनराशि का भुगतान ऐसे 183 बिलों के सापेक्ष किया गया जिनपर वहां पंजीकरण संख्या अंकित नहीं थी.
  • ₹48.52 लाख का भुगतान ऐसे 142 बिलों पर किया गया जिनपर न तो वहां संख्या और न ही यात्रा की तिथि अंकित थी.
  • ₹3.11 लाख का भुगतान ऐसे बिलों के सापेक्ष किया गया जहां एक ही वाहन दो या तीन स्थानों पर अलग अलग जनपदों में एक ही दिन एवं समय पर चल रहे थे.
  • 3.68 लाख रुपये का भुगतान ऐसे बिलों के विरुद्ध किया गया, जिसमें 12 वाहनों का पंजीकरण स्कूटर, थ्री व्हीलर या फिर प्राइवेट कार का पाया गया.
  • इनके अलावा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने 11.12 लाख का भुगतान ऐसे बिलों के विरुद्ध किया जिसमें 21 वाहनों का पंजीकरण क्षेत्रीय संभागीय कार्यालय में दर्ज ही नहीं था.

इन पर भी कैग ने उठाए सवाल

  • वित्तीय वर्ष 2016-17 में कैग ने अपनी रिपोर्ट में कई गंभीर सवाल खड़े किए.
  • गंगा के जीर्णोद्धार में पेयजल विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल.
  • गंगा और उसकी सहायक नदियों में धड़ल्ले से गिरते रहे सीवेज.
  • 2015 में विभाग ने 112 नाले चिन्हित किये जिनका ट्रीटमेंट होना था, लेकिन विभाग धीमी चाल चला.
  • 2017 में 65 गंदे नाले गंगा नदी में गिरते रहे.
  • राज्य सरकार ने गंगा नदी के जीर्णोद्धार के लिए 2012-13 से 2016-17 तक 58.71 फीसदी धनराशि व्यय नहीं की.
  • 2012-2013 से 2016-17 के बीच 265 गांव ओडीएफ घोषित किये गए.
कैग के भौतिक सत्यापन में यह गलत पाया गया
  • मई 2017 में उत्तराखण्ड को ओडीएफ की घोषणा गलत थी.
  • पूरी तरह उस वक्त राज्य खुले में शौच मुक्त नहीं हुआ था.
  • स्वच्छ भारत मिशन के क्रियान्वयन में उत्तराखण्ड सरकार का वित्तीय प्रबंधन अपर्याप्त था.
  • 2016-17 में राज्य सरकार ने शौचालय निर्माण के लिए राज्यांश का 10.58 करोड़ रुपया जारी ही नहीं किया.
  • पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान की है कैग रिपोर्ट.
  • खनन विभाग में लगभग 30 लाख का राजस्व नुकसान.

CAG ने उठाये सवाल

  • अवैध खनन करने वालों की माफ की गई पेनेल्टी.
  • देहरादून के खनन अधिकारी और जिला अधिकारी पर उठाये सवाल.
  • साल 2015 के जुलाई अगस्त का है मामला.
  • शराब कारोबारियों पर आबकारी विभाग की मेहरबानी.
  • शराब कारोबारियों पर नहीं लगाया 258 करोड़ का जुर्माना.
  • पर्यावरण नियमों का पालन न करने पर लगना था जुर्माना.
  • विभाग ने शराब कारोबारियों की मनमानी पर मूंदी आंखें.

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