CM त्रिवेंद्र की समीक्षा बैठक में अधिकारियों फटकार और दुत्कार

बैठक के दौरान सीएम रावत वन विभाग पर बुरी तरह से बिफरे। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि आखिर उन्होंने आग लगने से पहले क्या तैयारियां की थीं? आग इस कदर कैसे बढ़ गई? साथ ही सीएम ने कहा कि वनाग्नि से निपटने के लिए दी गयी धनराशि को जल्द ही सभी जनपदों को जारी किया जाए। बता दें कि आग से निपटने के लिए 12 करोड़ 37 लाख के बजट का प्रावधान किया है।

इतना ही नहीं, सीएम ने सभी जिलों के डीएम को वन विभाग पर निर्भर न रहते हुए आपदा प्रबंधन तंत्र का इस्तेमाल करने की हिदायत दी है। सीएम ने कहा कि वो आगे से डीएम से पूछेंगे कि उनके जिले में आग क्यों लगी? सीएम ने डीएम को व्यक्तिगत रूप से वनाग्नि की जिम्मेदारी लेने को कहा है। सीएम ने पौड़ी में लगी बेतहाशा आग पर जनपद के डीएफओ को फटकार लगाते हुए काम में तुरंत सुधार लाने के निर्देश दिए। दावानल की चपेट में आये उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के जंगलों को लेकर सीएम त्रिवेंद्र रावत सख्त हो गये हैं। सीएम ने बैठक में कहा कि डीएफओ के परफॉर्मेंस अप्रेजल में भी वनों की आग असर करेगी। दरअसल, त्रिवेंद्र रावत ने साफ कह दिया है कि आग को रोकने के लिए उठाये गये डीएफओ के कदम और उस कदम के परिणाम भी अब उनके अप्रेजल पर असर डालेगा।

वन विभाग की समीक्षा बैठक में ये दिए निर्देश
आग बुझाने के लिए बारिश का इंतज़ार न करें इंतजार।
वन विभाग दावानल को काबू करने के अपने प्रयास बढ़ाये।
नई घटनाओं को घटने से रोकें।
आग लगते ही तुरंत नियंत्रित करें। आग छोटी है खुद बुझ जायेगी मत सोचे।
पुलिस और अन्य विभागों भी वनाग्नि पर काबू पाने के लिए अपने साथ जोड़े।
स्थानीय निवासियों को भी दावानल को शांत करने के लिए टीम में जोड़े।

सीएम की दूसरी बैठक ली 
इसके बाद सीएम ने चिकित्सा स्वास्थ्य परिवार कल्याण विभाग और महिला व बाल विकास विभाग में केंद्र सरकार की प्राथमिकता वाले कार्यक्रमों की समीक्षा भी की। इस दौरान सीएम ने बेटी बचाओ-बेटी बढ़ाओ अभियान को मजबूत करने को कहा है। इसके साथ ही सीएम ने आदेश दिए हैं कि प्रदेश के सभी अस्पतालों और नर्सिंग होम में गुड्डे-गुडियां वाले बोर्ड लगाये जाएं, जिसमें लिंगानुपात की अपडेटेड जानकारी हो।

स्वास्थ्य विभाग की बैठक में ये दिए निर्देश

  • स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों और आंगनबाड़ी केंद्रों के लिंगानुपात आंकड़ों को क्रॉस मैच करें।
  • सही तस्वीर सामने लायें।
  • प्रभावी कार्य योजना बनायें।
  • डीएम को कहा- जन्म के समय बालक-बालिका की संख्या में बड़ा अंतर दिख रहा है। इन आंकड़ों को वेरिफ़ाई कर आवश्यक कदम उठाएं।
  • तीन माह के भीतर प्रदेश के सभी निजी अल्ट्रासाउंड मशीनो में ट्रैकर डिवाइस लगे।
  • बिना सक्षम डॉक्टर के पर्चें के गर्भपात की दवाइयों की बिक्री पर सख़्ती से रोक लगे।
  • बालिका भ्रूण हत्या अपराध है, इसकी सामाजिक जागरुकता भी बढ़ाएं।

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