मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने नैनीताल में की विकास कार्यों की समीक्षा

नैनीताल : मुख्यमंत्री  त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शुक्रवार को सर्किट हाउस में जनपद में संचालित एवं प्रस्तावित कार्यों की गहनता से समीक्षा की। समीक्षा के दौरान उच्च शिक्षा एवं सहकारिता मंत्री डॉ.धनसिंह रावत, विधायक बंशीधर भगत, नवीन दुम्का, संजीव आर्य, राम सिंह कैड़ा, जिलाध्यक्ष भाजपा प्रदीप बिष्ट उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने जिला योजना, राज्य सैक्टर, केन्द्र पोषित योजना एवं बाह्य सहायतित योजनाओं की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए जनहित में अवमुक्त धनराशि का समय से शतप्रतिशत उपयोग करना सुनिश्चित करें। उन्होंने जनपद में सिंचाई विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि फार्म मशीनरी बैंको का आवंटन जनपद के सभी क्षेत्रों में समान रूप से किया जाए और कृषि सिंचाई हेतु गूल के स्थान पर हाई डेंसिटी पाइप लाइन व्यवस्था पर कार्य किया जाये। उन्होंने उद्यान विभाग की समीक्षा के दौरान मशरूम विलेज भवालीगांव, नथुवाखान में मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में किये गये कार्य की सराहना की। उन्होंने निर्देश दिए कि रामगढ़ में 162 हैक्टेयर क्षेत्रफल वाले फार्म के उद्यान तथा वन को नुकसान पहुॅचाऐं बिना आध्यात्मिक ईको जोन के रूप में विकसित किया जाये, आध्यात्मिक जोन के रूप में विकसित करने के लिए उद्यान विभाग, केएमवीएन संयुक्त रूप से मण्डी परिषद द्वारा तैयार अवधारणा का अध्ययन करते हुए पर्यटन विकास हेतु भी कार्य योजना तैयार करें। उन्होंने पशुपालन विभाग की समीक्षा के दौरान निर्देश दिए कि जनपद में सैक्स्ड सार्टेड सीमन से कृत्रिम गर्भाधान विधि को बढ़ावा दिया जाये।
जिलाधिकारी धीराज गर्ब्याल ने बताया कि जनपद में हैचरी खोलने की दिशा में कार्य किया जा रहा है और कड़कनाथ प्रजाति के मुर्गों की मांग को देखते हुए जनपद में कार्यवाही की जा रही है, जिस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बाजार की मांग एवं आवश्यकता के अनुसार हैचरी स्थापित की जाये। श्री रावत ने ग्राम्य विकास की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि जनपद में खुलने वाले हिलांस आउटलेट का एक ही डिजाइन एवं कलर कोडिंग की जाये ताकि दूर से देखने में ही हिलांस आउटलेट की पहचान हो सके और सभी में एकरूपता भी बनी रहे। उन्होंने जल जीवन मिशन की समीक्षा के दौरान जल संस्थान के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनहित में मानकों में शिथिलता लाते हुए लक्षित कार्यो को यथाशीघ्र पूरा करना सुनिश्चित करें।
मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि योजना के हिसाब से सबसे ज्यादा फिजिबल क्षेत्रों का चयन करते हुए उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाये और योजना से लाभांवित करने के लिए जनपद स्तर पर ही लक्ष्य निर्धारित किया जाये। उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि योजना का प्रचार-प्रसार व योजना में अधिक से अधिक लोगों को लाभांवित करने के लिए पंचायतीराज विभाग के माध्यम से प्रधानों को भी योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाये। श्री रावत ने मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि जो बैंक रोजगारपरक योजनाओं के अन्तर्गत लाभार्थियों को ऋण आवंटित करने में सहयोग प्रदान नहीं कर रहे हैं, ऐंसे सभी बैंको से सरकारी खाते अन्य बैंकों में स्थानान्तरित कर दिये जायें।
मुख्यमंत्री  ने नैनीताल में बन रहे बीएम साह ओपन एयर थियेटर की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी को निर्देश दिए कि किसी ऐंसी वॉल (दीवार) का चयन किया जाये कि जिस पर म्यूरल्स आदि के माध्यम से उत्तराखण्ड की पूरी कला एवं संस्कृति की झलक देखने को मिल सके और राज्य की महिलाओं की पूर्व दशा, महिलाओं की वर्तमान स्थिति तथा महिलाओं की स्थिति सुधार हेतु भविष्य के लिए निर्धारित लक्ष्य को भी प्रस्तुत किया जा सके।
मुख्यमंत्री  ने शिक्षा विभाग की समीक्षा करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को स्कूलों में शिक्षक, फर्नीचर, वर्चुअल क्लास, गुणवत्तायुक्त शिक्षा मुहैया हो। उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि कम विद्यार्थियों वाले स्कूलों को क्लब किया जाये और बच्चों को बस की सुविधा उपलब्ध करायी जाये। श्री रावत ने जिलाधिकारी को जिला स्तर पर टास्क फोर्स बनाकर मिशन मोडल में 15 दिन में इस कार्य को पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खाली होने वाले स्कूल के भवन को अन्य जनहित कार्यों हेतु उपयोग में लाया जाये।
श्री रावत ने पर्यटन एवं सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण चोखुटिया हवाई पट्टी निर्माण हेतु आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश मण्डलायुक्त अरविन्द सिंह ह्यांकी को दिये।
मुख्यमंत्री  ने कहा कि हरेला पर्व पर 16 जुलाई को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है और इस दिन मार्केट,स्कूल, कार्यालय बन्द रहेंगे। उन्होंने कहा मान्यता है कि हरेला के दिन लगाया गया पौधा सूखता नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में दो माह का लक्षित वृक्षारोपण हरेला पर्व पर एक घण्टे में पूरा किया जायेगा। उन्होंने निर्देशित करते हुए कहा कि सभी प्रकार के पौधों का रोपण किया जाये। इस प्रकार के पौधों को भी प्राथमिकता दी जाये जो पशु-पक्षियों के चारे एवं आवास के रूप में काम आये। उन्होंने इस कार्य हेतु जनपद में पौध की पर्याप्त व्यवस्था, गडडों की व्यवस्था, डबटेलिंग आदि की सभी व्यवस्थाऐं समय से पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य में व्यापक जन सहयोग से वृक्षारोपण कार्यक्रम को महोत्वस के रूप में मनाया जायेगा। उन्होंने मण्डलायुक्त को हरेला पर्व पर आयोजित होने वाले वृक्षारोपण कार्यक्रम की तैयारियों हेतु जिलाधिकारियों के साथ बैठक आहूत करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री  ने पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था के दौरान अकाल मौत का शिकार होने वाली महिलाओं की मृत्यु पर गहरी चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि महिलाओं की दशा में सुधार हेतु मुख्यमंत्री घसियारी कल्याण योजना की शुरूआत की जाने की योजना बनाई गयी है। उन्होंने कहा कि पॉच साल के भीतर महिलाओं को घास की समस्या से पूर्ण मुक्ति दिलानी है, इस कार्य के लिए बढ़िया व कारगर योजनाऐं बनायी जायें।
मुख्यमंत्री  ने चिन्ता व्यक्त करते हुए कहा कि पानी की निरन्तर मांग एवं उपयोग बढ़ रहा है, जिस कारण  जल संरक्षण एवं संवर्धन की बहुत आवश्यकता है। जल संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में भी प्राथमिकता से कार्य किया जाये। समीक्षा दौरान मुख्यमंत्री ने जनपद में राशन वितरण व्यवस्था तथा राशन की गुणवत्ता की जानकारी भी ली। हल्द्वानी बाईपास निर्माण कार्य हेतु जिलाधिकारी को व्यक्तिगत रूप से ध्यान देने के निर्देश दिये। उन्होंने रानीबाग-नैनीताल हेतु प्रस्तावित रोपवे की भी जानकारी ली। उन्होंने जमरानी बांध परियोजना की स्थिति के बारे में जानकारी लेते हुए निर्देश दिए कि आर एण्ड आर पोलिसी तैयार करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाये कि पोलिसी में सभी के हित समाहित हों। बैठक में महाप्रबन्धक जमरानी बांध परियोजना प्रशान्त विश्नोई ने बताया कि जमरानी बांध परियोजना को तीन चरणों में लिया जा रहा है। प्रथम चरण की विभिन्न स्वीकृतियॉ प्राप्त हो चुकी हैं। द्वितीय चरण में योजना की फण्डिंग हेतु भारत सरकार द्वारा एडीबी को फॉरवर्ड किया गया है। एडीबी के अधिकांश बिन्दुओ को शॉर्ट आउट कर लिया गया है तथा शेष बिन्दुओ पर रिपोर्ट शीघ्र उपलब्ध करायी जायेगी। उन्होंने बताया कि आर एण्ड आर पोलिसी तैयार करने की दिशा में भी लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि एक्ट के हिसाब से विस्थापन हेतु लगभग 350 एकड़ जमीन की आवश्यकता है। सितारगंज में 284 एकड़ जमीन उपलब्ध होने के साथ ही बनबसा में भी जमीन उपलब्ध है।

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