जैव संसाधन जुटाने वाली 1250 कंपनियों को नोटिस

उत्तराखंड से बड़े पैमाने पर जड़ी-बूटी समेत तमाम जैव संसाधनों का व्यवसायिक दोहन कर रही कंपनियों को अब इसकी कीमत चुकानी होगी. उत्तराखंड जैव विवधिता बोर्ड ने ऐसी करीब 1250 कंपनियों को नोटिस भेजकर कहा है कि वे अपने वार्षिक लाभांश का एक निश्चित हिस्सा उस क्षेत्र के समुदाय को भी दें जहां से वे जैव संसाधन जुटा रहे हैं. लेकिन बायो डायवर्सिटि एक्ट लागू होने के सालों बाद भी अधिकांश कंपनियां हिस्सेदारी देने से बच रही हैं. नोटिस के बाद अब तक केवल 70 कंपनियों ने ही स्थानीय समुदाय की हिस्सेदारी देनी शुरू की है.

साल 2003 में अस्तित्व में आया बायो डायवर्सिटी एक्ट कहता है कि किसी भी क्षेत्र के जैव संसाधनों का किसी के द्वारा भी व्यावसायिक उपयोग करने पर इससे होने वाले लाभांश का कुछ हिस्सा उस स्थानीय समुदाय को भी देना होगा जो इसके संरक्षण में भागीदारी निभा रहा है.

इसी के तहत उत्तराखंड जैव विवधिता बोर्ड ने उत्तराखंड में जैव संसाधनों का दोहन कर रही ऐसी करीब 1250 कंपनियों को नोटिस भेजा तो अधिकांश ने इसका जवाब ही नहीं  दिया. कई नामी गिरामी कंपनियां हिस्सेदारी देने से बच रही हैं. अभी तक महज 70 कंपनियां ही 2014 से लाभांश में से हिस्सेदारी दे रही हैं.

सत्तर कंपनियों द्वारा जैव विवधिता बोर्ड के पास जमा किया गया हिस्सेदारी का यह पैसा करीब दो करोड़ तीस लाख हो चुका है लेकिन यह पैसा स्थानीय समुदायों तक नहीं पहुंच पा रहा है. दरअसल स्थानीय समुदाय तक पहुंचे इसको लेकर असमंजस बना हुआ है.

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