नर्मदा घोटाला यात्रा से पहले 5 बाबा बने राज्यमंत्री

इंदौर: मध्यप्रदेश में चुनावी साल में जिन 5 संतों को नर्मदा नदी की रक्षा के लिए राज्यमंत्री के दर्जे से नवाजा गया है, उनमें से दो संतों ने सूबे की बीजेपी सरकार के खिलाफ प्रस्तावित ‘नर्मदा घोटाला रथ यात्रा’ रद्द कर दी है। ये राज्य सरकार पर सीधे सवाल उठाते हुए थे और एक अप्रैल से ‘नर्मदा घोटाला रथ यात्रा’ निकालने की घोषणा की थी, लेकिन राज्यमंत्री का दर्जा मिलने के बाद दोनों ने यह यात्रा रद्द कर दी है।

राज्यमंत्री का दर्जा हासिल करने के बाद कम्प्यूटर बाबा ने से कहा, ‘हम लोगों ने यह यात्रा रद्द कर दी है, क्योंकि प्रदेश सरकार ने नर्मदा नदी के संरक्षण के लिए साधु-संतों की समिति बनाने की हमारी मांग पूरी कर दी है। अब भला हम यह यात्रा क्यों निकालेंगे।’ यह पूछे जाने पर कि क्या एक संन्यासी के रूप में उनका राज्यमंत्री स्तर की सरकारी सुविधाएं स्वीकारना उचित होगा, उन्होंने जवाब दिया, ‘अगर हमें पद और दूसरी सरकारी सुविधाएं ​नहीं मिलेंगी, तो हम नर्मदा नदी के संरक्षण का काम कैसे कर पाएंगे। हमें समिति के सदस्य के रूप में नर्मदा नदी को बचाने के लिए जिलाधिकारियों से बात करनी होगी और दूसरे जरूरी इंतजाम करने होंगे। इसके लिए सरकारी दर्जा जरूरी है।’

जिन योगेंद्र महंत को कम्प्यूटर बाबा के साथ विशेष समिति में शामिल कर राज्यमंत्री का दर्जा प्रदान किया गया है, वह ‘नर्मदा घोटाला रथ यात्रा’ के संयोजक थे। बहरहाल, राज्यमंत्री का दर्जा मिलने के बाद महंत ने भी कहा कि नर्मदा नदी को बचाने के लिए समिति बनाए जाने की मांग प्रदेश सरकार द्वारा पूरी किए जाने के कारण यह यात्रा निरस्त कर दी गई है।

कांग्रेस ने कम्प्यूटर बाबा और महंत की मंशा पर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने कहा, ‘इन दोनों को स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने प्रदेश की बीजेपी सरकार के साथ कौन-सी डील के तहत नर्मदा घोटाला रथ यात्रा रद्द कर दी है। क्या इन्होंने राज्यमंत्री का दर्जा हासिल करने के लिए ही इस यात्रा का ऐलान किया था।’

राज्य सरकार के तीन अप्रैल को जारी आदेश के अनुसार प्रदेश के विभिन्न चिन्हित क्षेत्रों में विशेषतः नर्मदा किनारे के क्षेत्रों में वृक्षारोपण, जल संरक्षण तथा स्वच्छता के विषयों पर जन जागरूकता का अभियान निरंतर चलाने के लिए 31 मार्च को विशेष समिति गठित की गई है। इस समिति के 5 विशेष सदस्यों-नर्मदानंद महाराज, हरिहरानंद महाराज, भैयू महाराज, कम्प्यूटर बाबा और योगेंद्र महंत को राज्यमंत्री स्तर का दर्जा प्रदान किया गया है।

बहरहाल, समिति में शामिल इंदौर के कम्प्यूटर बाबा की अगुवाई में एक अप्रैल से 15 मई तक प्रदेश के प्रत्येक जिले में ‘नर्मदा घोटाला रथ यात्रा’ निकालकर इस नदी की बदहाली का मुद्दा उठाने की रूप-रेखा तय की गई थी। इस मुहिम की प्रचार सामग्री सोशल मीडिया पर वायरल है जिससे पता चलता है कि यह यात्रा नर्मदा नदी में जारी अवैध रेत खनन पर अंकुश लगवाने और इसके तटों पर किए गए पौधारोपण के घोटाले की जांच की प्रमुख मांगों के साथ निकाली जानी थी।

 

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