मोदी सरकार के 4 साल

अगले आम चुनावों में अब 1 साल से भी कम समय रह गया है। जब मोदी सरकार आई थी, तब वादों की झड़ी लग गई थी, जिसमें 2 करोड़ युवाओं को जॉब देना, आम लोगों की आय को दुगुना कर देना, महंगाई में कमी करने जैसे वादे शामिल थे। तो जानने की कोशिश करते हैं कि मोदी सरकार के द्वारा किया गए वो कौन से काम हैं, जो कि हिट बताए गए और क्या वो हकीकत में हिट हैं भी या नहीं।

जीएसटी गूड्स एंड सर्विस टैक्स यानि कि जीएसटी मोदी सरकार के द्वारा लिया गया एक अभूतपूर्व फैसला था। देशभर में अलग अलग टैक्स की झंझट को हटाकर एक सामान्य टैक्स लगाने को जीएसटी का नाम दिया गया। जीएसटी को लागू करने के बाद मोदी सरकार ने अपनी पीठ थपथपा ली। हालांकि ये सच बात है कि जीएसटी के आ जाने से कई देशों में जनता को फायदा हुआ, पर भारत में ऐसा होता हुआ अब तक नहीं दिख रहा है।

इसके कई कारण हैं। जीएसटी का ढाचा इस तरह बनाया गया है कि जनता इसे लागू किये जाने के 10 महीनों के बाद भी इस ठीक से समझ नहीं पाई है। भारत में जीएसटी के पांच स्लैब बनाए गए, जबकि जीएसटी का मतलब होता है, 1 देश, 1 टैक्स। सरकार खुद भी मानती है कि अब तक जीएसटी को पूर्ण रूप से लागू नहीं किया जा पाया है।

भ्रष्टाचार का आरोप नही ये बात तो जगज़ाहिर है कि पिछले 4 सालों में केंद्र सरकार और सरकार के किसी भी मंत्री पर भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा है। सरकार ने साफ छवि के साथ काम करने का वादा किया था और वो इस पर चलती हुई दिखाई दे रही है। 2014 में जनता ने यूपीए शासलकाल में हुए कई घोटालों की वजह से भाजपा को एकतरफा समर्थन दिया था, और भाजपा ने जनता के भरोसे को कायम रखा है। हालांकि विपक्षी पार्टियां लगातार मोदी सरकार पर कई मामलों में आरोप लगाती हुई, लेकिन ये मामले अब तक साबित नहीं हो पाए।

आक्रामक विदेश नीति मोदी सरकार अपनी आक्रामक विदेश नीति के लिए जानी जाती है। अमेरिका से लेकर चीन और रूस तक विदेश नीति के मामले में सरकार के कदमों को हिट कहा जा सकता है। पाकिस्तान के साथ देश के संबंध और भी बिगड़े लेकिन पाकिस्तान को मोदी सरकार ने जैसे मुंह ना लगाने का इरादा कर लिया है। शुरु के दिनों में कोशिश की गई पर इसके बाद लगातार पाकिस्तान को इग्नोर ही किया गया। डोकलाम के मुद्दे पर भारत सरकार बुरी तरह से घिर गई थीं, पर इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने चीन की यात्रा की, जिसे विदेश नीति के तहत काफी अहम माना जाता है।

मेक इन इंडिया/स्टार्ट अप इंडिया स्वदेशी नीति अपनाते हुए मोदी सरकार ने देश की जनता को मेक इन इडिया के लिए काफी प्रोत्साहित किया। चीनी सामानों का कई जगहों पर विरोध प्रदर्शषन किया गया। सरकार ने कैंपेन चलाकर लोगों से देशी सामानों को खरीदने की अपील की। लेकिन ये कार्यक्रम अब तक तो फ्लॉप ही साबित होता हुआ दिख रहा है। लोग आराम से बाहरी सामानों को खरीद रहे हैं, क्योंकि भारतीय सामानों के मुकाबले वो ज़्यादा भरोसेमंद साबित होते हैं।

इसी तरह से स्टार्ट अप इंडिया भी मोदी सरकार की युवाओं को प्रोत्साहित करने की एक बड़ी योजना है। सरकार इसके लिए लोगों को लोन भी देती हुई आई है। पर, अब तर इन सालों में स्टार्टअप इंडिया के कैंपेन से कोई भी युवा कुछ नया बनाकर सामने आता हुआ नहीं दिख रहा है।

काला धन सरकार के सबसे बड़े वादों में से एक था, काला धन को वापस लेकर आना। काफी हो-हल्ला मचाया गया था कि काला धन लाकर हर एक जनता को 15 लाख रुपये दिये जाएंगे। 15 लाख रुपये क्या, 15 रुपये भी सरकार की तरफ से नहीं मिल पाए। 2014 में मोदी सरकार के आने के कुछ दिनों के बाद ही भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने काला धन लाने वाले मामले को एक जुमला करार दे दिया था। 8 नवंबर 2016 को सरकार ने 500 और 1000 के नोटों को बंद करने का ऐलान किया था और इसे भी काले धन पर अंकुश लगाने का फैसला माना गया था, पर ये भी ज़ीरो ही साबित होता हुआ दिखा। ऊल्टा नोटबंदी के दौरान जनता परेशान होती हुई दिखी।

बैंक धोखाधरी बैंकों में लोन फ्रॉड से निपटने के लिए मोदी सरकार ने स्टेट बैंक के कई सहायक बैंकों को स्टेट बैंक में विलय करा दिया था। सरकार का कहना था कि इससे बैंक फ्रॉड के केसों में कमी आ सकती है। बैंक लोन से धोखाधरी के कई मामले थे, जो कि लगातार बढ़ती ही जा रही है। विजय माल्या, नीरव मोदी जैसे कई लोग लाखों करोड़ों का गबन करके आराम से देश के बाहर अपनी ज़िंदगी जी रहे हैं।

खेती और किसान मोदी सरकार के वादों में एक था, किसान और खेती के लिए किया गया वादा। कहा गया था 2022 तक किसानों की आय को दुगुना कर दिया जाएगा। हुआ इसका उल्टा। लगातार किसानों की आय में कमी आती रही। किसानों द्वारा किये जाने वाले आत्महत्याओं में भी इज़ाफा होता रहा। नोटबंदी का सबसे बुरा असर अगर किसी को हुआ तो वो किसान ही थे। मार्च 2018 में मुंबई में हज़ारों किसानों का विरोध करना किसानों की दुर्गति को दिखाता है। 2018 के प्री बजट सर्वे से ये भी बात सामने आई कि किसानों की आय में फिलहाल 25 प्रतिशत की और भी कमी होने वाली है।

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