कर्नाटक में 25 मंत्रियों ने ली शपथ

कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस के बीच गठबंधन सरकार के कैबिनेट का बुधवार को विस्तार हुआ . मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की मौजूदगी में राज्यपाल वजुभाई वाला ने कैबिनेट के 25  विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई . कर्नाटक कैबिनेट में जेडीएस के 9 और कांग्रेस के 14 विधायक शामिल हुए हैं . वहीं मायावती की पार्टी बसपा के एकमात्र विधायक और 1 निर्दलीय को भी कैबिनेट में जगह दी गई है.

कैबिनेट की खास बातें

कर्नाटक सरकार की कैबिनेट की सबसे खास बात ये है कि  इसमें मायावती की पार्टी बीएसपी के एकमात्र विधायक एन महेश को भी एंट्री मिली है. ऐसा पहली बार है जब बीएसपी का कोई विधायक यूपी के बाहर मंत्री का दर्जा पाएगा.

वहीं कैबिनेट में मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के भाई एचडी रेवाना को भी जगह मिली है. हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के मंत्री रहे कांग्रेस विधायक तनवीर सैत को जगह नहीं मिलने से उनके समर्थकों ने इसका जमकर विरोध किया है. कांग्रेस से शपथ लेने वाले विधायकों में डीके शिवकुमार, केजे जॉर्ज,  शिवकुमार रेड्डी और प्रियांक खड़गे शामिल हैं..

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद की भी चर्चा

मंत्रालयों के बंटवारों को लेकर कर्नाटक कांग्रेस के कई नेताओं ने नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की थी. बैठक में मंत्रिमंडल के अलावा नए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद की भी चर्चा हुई. अध्यक्ष पद की रेस में डीके शिवकुमार और दिनेश राव हैं. हालांकि, कुछ नेताओं का मानना है कि किसी लिंगायत को ये पद सौंपना चाहिए.

सूत्रों ने बताया कि राहुल ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उप मुख्यमंत्री जी परमेश्वर, पार्टी के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार और दिनेश गुंडु राव तथा कर्नाटक मामलों के प्रभारी महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ दिल्ली में लंबी चर्चा की. गौरतलब है कि कुमारस्वामी और परमेश्वर ने 23 मई को अपने-अपने पद की शपथ ली थी.

समझौते के मुताबिक कांग्रेस को गृह, स्वास्थ्य, राजस्व और कृषि जैसे विभाग मिलेंगे. वहीं, जेडीएस को वित्त, आबकारी, पीडब्ल्यूडी आदि विभाग मिलेंगे. सूत्रों के मुताबिक दोनों पार्टियां कुछ विभागों को रिक्त रख सकती है. जेडीएस ने क्षेत्र के आधार पर मंत्रियों को शामिल करने का फैसला किया है.

उल्लेखनीय है कि जेडीएस और कांग्रेस ने 12 मई के विधानसभा चुनाव के त्रिशंकु नतीजे आने के बाद राज्य में गठबंधन किया था. सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते राज्यपाल से मिले न्योते के बाद भाजपा ने सरकार बनाई थी, लेकिन विश्वास मत का सामना किए बगैर ही 19 मई को बीएस येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था.

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