हिमाचल के सेब कारोबार से जुड़े हैं 20 लाख लोग मुख्यमंत्री जयराम से हैं नाराज

हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक हैं. ऐसे में राज्य में सेब किसानों के प्रदर्शन से जयराम ठाकुर सरकार मुश्किल में है. भाजपा को छोड़कर सेब बागान मालिक और सेब किसानों के साथ सभी राजनीतिक दल खड़े हैं. हाल ही में कार्टन पर जीएसटी लगाने और कीटनाशक पर जीएसटी बढ़ाने से सेब मालिक बागानों में नहीं बल्कि इन दिनों सड़कों पर उतर आए हैं और सरकार के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. हिमाचल में 5 अगस्त को सेब मालिकों और किसानों का प्रदर्शन हल्का-फुल्का नहीं था, बल्कि 3 किलोमीटर लंबा प्रदर्शन था . बता दें हिमाचल में सेब की खेती करीब दो लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में होती है. 20 लाख से ज्यादा लोग इस कारोबार से जुड़े हैं.

सरकार से सेब बागवानों की नाराजगी का कारण

हिमाचल प्रदेश में चार लाख से अधिक किसान परिवार सेब उत्पादन से जुड़े हुए हैं. सेब उत्पादन से लगभग 12 लाख लोगों को रोजगार भी मिला हुआ है. हिमाचल प्रदेश की आजीविका का मुख्य साधन है सेब उत्पादन.वहीं हिमाचल प्रदेश में सेब का उत्पादन करने वाले किसान सरकार से कार्टून पर जीएसटी बनाने और कीटनाशकों पर जीएसटी की वजह से महंगाई का विरोध कर रहे हैं. वही किसानों की मांग है की निजी कंपनियां उनके सेब का दाम तय करती हैं जो उनकी लागत से काफी कम होता है जिससे उनका नुकसान बढ़ता जा रहा है।

सेब बागवान की नाराजगी का विधानसभा चुनाव पर होगा असर

हिमाचल प्रदेश में सेब बागानों से लगभग 20 लाख लोग जुड़े हुए हैं, इसमें किसान से लेकर काम करने वाले मजदूर भी शामिल हैं. इन लोगों की आजीविका का मुख्य साधन है . सेब की पैदावार और उससे हुए होने वाली कम आय की वजह से राज्य में इन दिनों सेब बागान मालिक परेशान हैं, क्योंकि उत्पादन होने के बावजूद भी उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है. वहीं विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा छोड़ सभी राजनीतिक दल सेब किसानों के साथ खड़े हैं. अगर समय पूर्व किसानों की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो भाजपा को भी सेब किसानों की नाराजगी से बड़ा नुकसान होने की संभावना है.

सेब का दाम अब निजी कंपनियां नहीं कमेटी तय करेगी

हिमाचल प्रदेश में पैदा होने वाले सेब का दाम अब तक बड़ी-बड़ी निजी कंपनियां तय करती थीं, लेकिन अब चुनाव नजदीक आने पर सरकार ने सेब का दाम तय करने के लिए एक कमेटी गठित करने का ऐलान किया है. सरकार द्वारा गठित कमेटी ही सेब का दाम तय करेगी जो किसानों के हित में होगा, सेब किसानों को लाभ पहुंचाने की एक नई पहल शुरुआत की है, इसके अंतर्गत सेब का दाम तय करने के लिए कमेटी गठित होगी. बता दें अभी तक निजी कंपनियों के द्वारा 30 से 35 हजार मीट्रिक टन सेब की खरीदारी होती रही है.

सेब के रंग के आधार पर तय होते हैं दाम

हिमाचल प्रदेश सरकार का फल कारोबार 5000 करोड़ रुपये का है, हिमाचल में कुल 90 तरह सेब की प्रजातियां हैं . हिमाचल में 7.77 लाख मीट्रिक टन सेब पैदा होने का सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है. वहीं सेब की 3 किस्में रेड, रॉयल और गोल्डन डिलीशियस के नाम से पैदा होती हैं, इन तीन सेब के दाम इनकी प्रजाति और साइज के अनुसार ही तय होते हैं.

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