हनीट्रैप’ के सहारे आतंक के खेल की तैयारी

चंडीगढ । जम्मू-कश्मीर के आतंकी प्रभावित पुलवामा जिले के संभ्रात परिवार से निकले आतंकी जाकिर रशीद बट्ट उर्फ मूसा ने अातंकवाद में हनीट्रैप का तड़का लगाने की तैयारी में था। इसके लिए उसने पंजाब में टीम बनाना शुरू कर दी थी। इसके लिए मूसा गिरफ्तार आतंकियों का सहारा ले रहा था। सोशल साइट्स व फेसबुक के जरिए गिरफ्तार आतंकी खुद को छात्र बताकर खुले ख्यालों वाली लड़कियों को अपने साथ जोड़ रहे थे। इसके लिए आतंकी अपने संपर्क में आए लोकल युवाओं का इस्तेमाल कर रहे थे। जांच एजेंसियों ने अपनी जांच इस दिशा में भी शुरू कर दी है।

मूसा की कोशिश थी कि गिरफ्तार आतंकियों की मदद से पहले वह कुछ लड़कियों को नशे की लत लगाए। इसके बाद उन्हें इस्तेमाल करे। इसके लिए मूसा आदेश देता था। वह लगातार रिपोर्ट भी लेता था कि जालंधर में पढ़ रहे इन आतंकियों के संपर्क में कितनी लड़कियां आईं। उन्होंने कितनों से दोस्ती की। मूसा की यह हिदायत भी थी कि दोस्ती उन्हीं से करनी है जो खुले ख्यालों व अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीना चाहते हों। संपर्क में आने के बाद पहले इन्हें असलहे के साथ युवाओं की फोटो भी भेजकर उनके विचार जानते थे।

ज‍ालंधर के इंजीनियरिंग कॉलेज से गिरफ्तार कश्‍मीरी छात्रों के एक रिश्तेदार ने बताया कि मूसा भी पहले पढ़ाई में अव्वल था और उसके परिवार में सभी पढ़े-लिखे थे। मूसा के भाई व भाभी भी डॉक्टर हैं। दोनों जम्मू-कश्मीर में ही रहते हैं और जाने-माने सर्जन हैं। मूसा की बहन बैंक में मैनेजर है। उसका जीजा सिविल सर्विस की परीक्षा पास कर चुका है। जल्द ही वह भारत सरकार के लिए काम करेगा।

आतंकी के इस रिश्‍तेदार ने बताया कि बुरहान वानी के सोशल मीडिया पोस्ट से आकर्षित होकर मूसा एक साइट के जरिए ही बुरहान से पहली बार मिला था। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने जब इसकी जानकारी मूसा के परिवार को दी थी तो उनके पैरों तले जमीन निकल गई थी। उसके बाद से मूसा घर से गायब हो गया और करीब एक साल पहले जब वह घर आया था तो पुलिस ने उसे मुख्यधारा में शामिल होने का मौका भी दिया था, परिजनों ने भी उसे विदेश जाने की सलाह दी थी, लेकिन वह अंतिम बार घर से वह खूब रोने के बाद यह कहकर निकल गया था कि वापसी मुमकिन नहीं।

गिरफ्तार कश्मीरी छात्रों के परिजनों ने जालंधर में शनिवार से ही डेरा डाल रखा है। उन्होंने मेडिकल करवाने के समय शनिवार को गिरफ्तार आतंकियों से मुलाकात भी की। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के चलते इन्हें मौके से हटा दिया गया। इसके बाद जांच एजेंसियों की टीम ने इन्हें पूछताछ के लिए साथ ले लिया। परिजनों ने शहर के दो वकीलों से मिलकर लीगल राय भी ली। रविवार को जम्मू-कश्मीर से आए एक अन्य वकील ने इनकी मुलाकात दिल्ली से आए वकील से करवाई।

वकील से मुलाकात के बाद एक आतंकी के करीबी रिश्तेदार ने बताया कि उन्होंने तो यह सोचकर बच्चों को कश्मीर से दूर भेजा था कि वह अपना भविष्य बना सकें। कश्मीर में ज्यादातर अमीरों ने अपने बच्चों को विदेशों में पढ़ाई के लिए भेज रखा है। उन्हीं को देखकर वहां अब यह माहौल बन गया है कि ज्यादातर लोग अपने बच्चों को कश्मीर से बाहर सही माहौल में भेजना चाहते हैं। इन्हें परिजनों की तरफ से पढ़ाई व खर्च के लिए भी 10 हजार रुपये भेजते थे। इस काम में वह ज्यादातर कश्मीर से यहां व्यापार करने आने वाले लोगों की मदद लेते थे।

परिजनों ने बताया कि बच्चों में से दो का दाखिला जम्मू-कश्मीर की यूनिवर्सिटी में भी हो गया था। इन्हें बीटेक कंप्यूटर साइंस में दाखिला मिल भी गया था, लेकिन बट्ट के साथ के चक्कर में इन्होंने वहां दाखिला नहीं लिया। जेएंडके के माहौल के मद्देनजर परिजनों ने भी उनकी यह मांग ली थी कि वह जेएंडके से बाहर जाकर पढ़ाई करें। उन्हें क्या पता था कि जिस प्रकार मूसा बुरहान वानी की दोस्ती में मेधावी छात्र से आतंकी बन गया, वैसे ही उनके बच्चे मूसा के भाई के साथ में आतंकी बन जाएंगे।

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