Templates by BIGtheme NET
nti-news-young-millionaire-in shorttime

अजीबो-गरीब तरीके से बने ये करोड़पति

भला ऐसा कौन होगा, जो आज के अर्थप्रधान युग में करोड़पति नहीं बनना चाहेगा। कहा तो यहां तक जाता है कि ‘पैसे के सब दास हैं, इसको करो प्रणाम, मंदिर में पैसा धरो, खुश होंगे भगवान।’ कोई अपने विवेक से, हुनर से, श्रम से लखपति-करोड़पति बन जाता है, समय की नजाकत भांप लेता है, अपने आइडिया की बदौलत चौंकाने वाली छलांग लगा जाता है लेकिन अनेक ऐसे भी हैं, जो चाहे जैसे भी, करोड़पति बनने की सुर्खियों में आ जाते हैं।

अपनी मेहनत से करोड़पति होने वाले तो आपने लाखों लोगों के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या कभी उनके बारे में सुना है जो अजीबो-गरीब तरीके से करोड़पति बन गये। आप भी डालें एक नज़र इन दिलचस्प करोड़पतियों पर…

भला ऐसा कौन होगा, जो आज के अर्थप्रधान युग में करोड़पति नहीं बनना चाहेगा। कहा तो यहां तक जाता है कि ‘पैसे के सब दास हैं, इसको करो प्रणाम, मंदिर में पैसा धरो, खुश होंगे भगवान।’ कोई अपने विवेक से, हुनर से, श्रम से लखपति-करोड़पति बन जाता है, समय की नजाकत भांप लेता है, अपने आइडिया की बदौलत चौंकाने वाली छलांग लगा जाता है लेकिन अनेक ऐसे भी हैं, जो चाहे जैसे भी, करोड़पति बनने की सुर्खियों में आ जाते हैं।

एक विदेशी निवेशक हैं स्वीडिश इक्विटी फंड टुंड्रा फॉन्डर के सीईओ मैटियास मार्टिसन। जिस दिन बराक ओबामा ने अल-कायदा चीफ ओसामा बिन लादेन को मार गिराने का ऐलान किया था, उस मौके पर दांव खेलते हुए मार्टिंसन ने 10 लाख डॉलर से 10 करोड़ डॉलर का फंड खड़ा कर लिया। उस वक्त कमजोर मुद्रा और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की कमी के कारण पाकिस्तान के आर्थिक हालात खराब थे। मार्टिंसन ने लादेन के मारे जाने के छह महीने बाद अक्टूबर 2011 में पाकिस्तान में पहला विदेशी इक्विटी फंड शुरू कर दिया। उस वक्त ऐसे निवेश का रिस्क लेने का किसी में साहस नहीं था। बाद में हालात बदले, स्टॉक मार्केट सुधरा और मार्टिंसन करोड़पति बन गए।

यह वाकया, तो भी हद में है। अपनी समझदारी से करोड़पति होने की कामयाबी का विदेशी वाकया। दस हजार रुपए महीना कमाने वाला कोई व्यक्ति रातों-रात करोड़पति बन जाए, यह भी तो हैरत की बात होगी। ऐसे ही हैं ऊना (हिमाचल) के गुरदास राम शर्मा। ऊना बस स्टैंड के पास ढाबा चलाते थे। एक करोड़ की लॉटरी निकली। नैनादेवी जाते समय नंगल बस स्टैंड से लॉटरी का टिकट खरीदा था। वह हर साल लोहड़ी, दिवाली और बैसाखी पर तीन लॉटरी टिकट खरीदते थे। इससे पहले उन्हें लॉटरी से ही नैनो कार मिली थी। अब तो उनकी गिनती इलाके के अमीरों में है। फर्श से अर्श का सफर करने वाले किस्मत के धनी कुछ ऐसे ही करोड़पतियों की कहानी ‘शहंशाह‘ के ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के विजेताओं की भी है।

हर्षवर्धन पहले आम आदमी थे। शो ने एक झटके में उनकी जिन्दगी की दिशा बदल दी। एक करोड़ जीतकर रातोरात सेलेब्रिटी बन गए। झारखंड की राहत मेडिकल एंट्रेस एग्जाम की तैयारी कर रही थीं। शो से करोड़पति बनीं। गारमेंट शोरूम खोल लिया। सुशील कुमार डेटा ऑपरेटर थे। सिर्फ छह हजार रुपये सेलरी थी। शो से करोड़पति बनने के बाद उन रुपयों से बिजनेस शुरू किया। साथ ही महादलित (मुसहर) बच्चों को गोद लेकर ‘गांधी बचपन केन्द्र‘ चलाने लगे। चंडीगढ़ की सनमीत फैशन डिजाइनर थीं। इस शो से जीते पैसे से मुंबई में घर खरीदा। उदयपुर के ताज मोहम्मद रंगरेज ने भी करोड़पति बनने के बाद घर खरीदा, बेटी की आंख का इलाज करवाया, साथ ही दो अनाथ लड़कियों की शादी में मदद भी की। ऐसे ही करोड़पति बने अचीन निरूला ने केबीसी में जीते पैसों से मां के कैंसर का इलाज करवाने के साथ ही अपना नया बिजनेस शुरू कर दिया।

लेकिन गैरकानूनी जादू-मंतर दिखाकर करोड़पति बनने की दास्तानें भी कुछ कम रोचक नहीं हैं। शिमला (हिमाचल) के एक सेवादार अमरदेव ने वक्त की नजाकत भांपते हुए साधु का बाना ओढ़ा और पांच साल में करोड़पति बाबा बन गया। अफसर से लेकर बड़े-बड़े नेता तक उसके पांवों पर लोट लगाने लगे। आज उसके पास आलीशान गाड़ियां हैं। इससे पहले वह हिमाचल में चायल के पास देवी मोड़ स्थित आश्रम में कथावाचक परमात्मा दास की टहल बजाता था। उसे बर्तन तक धोने पड़ते थे। देखते-ही-देखते चायल के साथ लगे गांव रूड़ा का एक व्यक्ति उसको अपने गांव ले आया। अमरदेव गांव के बाहर सड़क किनारे खाली पड़ी जमीन पर अपनी कुटिया बनाकर उसमें रहने लगा। सालभर बाद से उसका वैभव ग्रामीणों को दंग करने लगा। देशभर के बड़े नेता हाजिरी देने लगे। आश्रम के लिए महंगी गाड़ियां खरीद कर आने लगीं। करीब 25 करोड़ की मूर्तियों वाला भव्य रामलोक मंदिर बन गया। इस धनागम का स्रोत दान-दक्षिणा बताया जाता है।

एक है गुजरात का वाल्मीकि शेट्टी। पहले चाय बेचता था। उसने अवैध उपायों का सहारा लिया। ओडिशा से हर महीने कम से कम 50 लाख रुपए का गांजा मंगाकर सूरत में अपने कैरियर्स के माध्यम से पूरे राज्य में सप्लाई करने के साथ ही कॉलेजों के आसपास बेचने लगा। वह गांजा पटरियों के बीच गड्ढे करके छिपा देता था। एक दिन उसको वडोदरा रेलवे पुलिस ने धर दबोचा। इसके बाद वह गांजे की हेराफेरी करने लगा। नशीले पदार्थों का सौदागर बन गया। अब वह करोड़ो का आसामी है।

अवैध उपायों से करोड़पति बनने का एक ऐसा ही वाकया पटना (बिहार) का है। मैगनेटिक माइक्रोफोन से एसएससी, एमटीएस समेत अन्य प्रतियोगिता परीक्षाओं में नकल कराने वाले मनीष कुमार ने बिहार के साथ ही झारखंड, यूपी, बंगाल हरियाणा तक अपना नेटवर्क बना लिया। इन राज्यों से पहले वह प्रश्नपत्र लीक कराता, फिर पटना या अन्य शहरों में अपने एक्सपर्ट्स से आंसर तैयार कराकर कैंडिडेट्स को भेज देता। जिस समय पुलिस ने उसे दबोचा, उसके शरीर पर छह लाख का सोना था। तहकीकात में पता चला कि वह शंभू मुसल्लहपुर में साइबर कैफे के साथ कोचिंग चलाता है। कांटी फैक्ट्री में उसका फ्लैट है। अपने गोरखधंधों से वह 10-15 करोड़ की कमाई कर चुका है। उसके कई बैंक में खाते हैं। जिस परीक्षार्थी को नकल कराना हो, मनीष उसके किसी एक करीबी को अपने पास रखता था। परीक्षार्थी को एक मोबाइल दिया जाता था, जिसे वह अंडर वीयर में रख लेता था। उसे जॉकी की ब्रांडेड गंजी पहना दी जाती थी, ताकि शरीर से चिपकी रहे। अंडरवियर में रखे मोबाइल से पतली कॉपर वायर जोड़ दी जाती, जिसका लिंक पेट के पास बटन से होता। अदृश्य मैगनेटिक माइक्रोफोन उसके कान में डाल दिया जाता। इसके बाद पहले से तैयार सभी सेट का आंसर मिलते ही परीक्षार्थी मकसद में कामयाब हो जाता था।

करोड़पति होने का एक ऐसा ही वाकया जयपुर (राजस्थान) का है। उस शख्स का नाम है, नंद सिंह उर्फ नन्दलाल सिंह। उसने भारतीय सेना में भर्ती कराने की शत-प्रतिशत की गारंटी देकर अभ्यर्थियों से करोड़ों रुपए कमा लिए। एटीएस के एडीजी उमेश मिश्र बताते हैं, कि नन्द सिंह वर्ष 2002 में राजस्थान होमगार्ड में बतौर होमगार्ड जवान भर्ती हुआ था। इस दौरान उसकी आय का स्त्रोत सिर्फ इस नौकरी की सैलेरी थी। कुछ वक्त बाद उसने नौकरी छोड़कर अपना भर्ती गिरोह बनाया। बेरोजगार युवकों को सेना में भर्ती की कोचिंग देने लगा। उसके साथ ही भर्ती कराने की सौ फीसदी गारंटी भी। इसी दौरान उसने बालाजी फिजिकल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के संचालक महेंद्र ओला को भी अपने साथ जोड़ लिया। बेरोजगारों से मोटा कमीशन आने लगा और फिर नंद ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। कुछ ही सालों में आलीशान कोठी बनवा ली। गाड़ी खरीद ली। लक्जरी जीवन जीने लगा। पुलिस का छापा पड़ा तो उसकी कोठी से दो सूटेकसों में करोड़ों रुपए के नोटों की गड्डियां बरामद हुईं।

About News Trust of India

News Trust of India is an eminent news agency

Leave a Reply

Your email address will not be published.

ăn dặm kiểu NhậtResponsive WordPress Themenhà cấp 4 nông thônthời trang trẻ emgiày cao gótshop giày nữdownload wordpress pluginsmẫu biệt thự đẹpepichouseáo sơ mi nữhouse beautiful