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अपराधियों पर कहर बन कर टूट रही है यूपी पुलिस

योगी आदित्यनाथ के सत्ता में आने के बाद से अब तक सात महीने में यूपी पुलिस ने साढ़े चार सौ मुठभेड़ों में 20 अपराधियों को मार गिराया. साथ ही ढाई हजार से अधिक अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है. योगी सरकार की ओर से पुलिस को अपराधियों पर कहर बनकर टूट पड़ने के निर्देश है. राज्य में इसका असर भी दिखने लगा है.

अपराधियों में किस हद तक खौफ है, इसका अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि जो शातिर अपराधी जेलों में बंद हैं, वो जेलों से बाहर नहीं निकलना चाह रहे. दूसरी ओर, जो इनामी और वांछित अपराधी जेलों से बाहर हैं वो भी खुद के लिए महफूज ठिकाने की तलाश में हैं. फिलहाल इन्हें जेल ही अपने लिए सबसे सुरक्षित जगह नजर आ रही है. हालत ये है कि अपराधी दूसरे राज्यों में जाकर अन्य अपराधों में सरेंडर कर जेल जाने को ही अपने लिए ठीक मान रहे हैं.

लखनऊ से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक कई जिलों में हालत ये है कि कई अपराधी जो जमानत पर बाहर थे, वो भी जमानत तुड़वा कर वापस जेल चले गए हैं. वहीं जेलों में बंद कुछ अपराधी जमानत मिल जाने के बाद भी ऐसी जुगत लगा रहे हैं कि उन्हें जेल से बाहर ना निकलना पड़े. कुछ अपराधी ऐसे हैं जिन्होंने अपने पैरोल तक कैंसल करा लिए हैं.

यूपी के एडीजी (कानून-व्यवस्था) आनंद कुमार के मुताबिक ऐसे अपराधी जो कानून से भागते हैं, उनमें पुलिस का भय होना ही चाहिए. आनंद कुमार ने मुठभेड के बारे में स्थिति साफ करते हुए कहा कि इसे गलत संदर्भ में पेश किया जाता है. मुठभेड़ या एनकाउंटर किया नहीं जाता होता है. शातिर अपराधी भागते समय पुलिस पर फायर करते हैं. उसकी के जवाब में उन्हें निष्क्रिय करने की कोशिश की जाती है.

पुलिस की ओर से गिनाए इन आंकड़ों पर गौर किया जाए तो अपने आप में ही सारी स्थिति साफ हो जाती है. योगी सरकार आने के बाद से 86 अपराधियों ने अदालत में सरेंडर किया है. इनमें से अधिकतर ने पिछले 2 महीने में सरेंडर किया है. जिनमें 9 ऐसे इनामी अपराधी हैं, जो अपनी जमानत तुड़वाकर वापस जेल चले गए हैं. ऐसे अपराधियों में से अधिकतर बुंलदशहर और मुजफ्फरनगर जैसे पश्चिमी यूपी के जिलों से हैं. पश्चिमी यूपी में ही सबसे ज्यादा मुठभेड़ हुई हैं.

इनामी अपराधी दूसरे राज्यों में कर रहे हैं सरेंडर

पश्चिमी यूपी का खौफ कहे जाने वाले बिल्लू दुजाना ने हाल ही में दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत में सरेंडर किया. दर्जनों आपराधिक मामलों वाले मेरठ के अमित जाट ने हरियाणा के सोनीपत में अदालत में सरेंडर किया. हरियाणा का रहने वाला बिट्टू, जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपराध करता रहा है, उसने हरियाणा के रोहतक में सरेंडर किया है.

ADG मेरठ जोन प्रशांत कुमार के मुताबिक यूपी में भी कई ऐसे अपराधी हैं, जिन्होंने गुपचुप तौर पर दूसरे जिलों की अदालत में जाकर सरेंडर कर दिया. जैसे धर्मवीर सेठी ने बागपत की सीजेएम कोर्ट में सरेंडर किया. जब्बार और जिया उल हक ने बुलंदशहर में सरेंडर किया और इसी प्रकार से विकास नामक अपराधी ने गाजियाबाद में सरेंडर किया.

लखनऊ में भी अपराधियों में खौफ

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और आसपास के इलाकों में भी अपराधी पुलिस के नाम से ही दहशत खा रहे हैं. लखनऊ के एसएसपी दीपक कुमार के मुताबिक क्षेत्र में सक्रिय आपराधिक गैंगों के सदस्य जमानत लेने से बच रहे हैं.

लखनऊ शहर में रूस्तम-सोहराब गैंग के एक अपराधी की मुठभेड़ में मौत के बाद जेल में बंद उसके साथी अपनी जमानत नहीं करा रहे. अपराधियों से निपटने में खुली छूट दिए जाने से पुलिस के हौंसले बुलंद है. इसीलिए पुलिस प्रो-एक्टिव रणनीति पर काम कर रही हैं. बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कई मौकों पर साफ कर चुके हैं कि अगर कोई पुलिस पर गोली चलाएगा तो पुलिस हाथ बांधे नहीं बैठे रह सकती.

अपराधियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर की जा रही कार्रवाई में पुलिस को भी नुकसान उठाना पड़ा है. मुठभेड़ों में दो पुलिस अफसरों की मौत हुई और 90 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए. हालांकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बागपत में पुलिस एनकाउंटर में एक अपराधी की मौत पर सवाल उठने से पुलिस को बैकफुट पर भी आना पड़ा.

कुल मिलाकर यूपी पुलिस की कोशिश यही है कि राज्य के लोगों को भयमुक्त बनाने के लिए अपराधियों के दिलों में ज्यादा से ज्यादा खाकी की ज्यादा से ज्यादा दहशत भरी जाए.

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