Templates by BIGtheme NET
nti-news-why-naseemuddin-became-a-rebellion

वफादार नसीमुद्दीन ने बगावत क्यों की?

यह भारतीय राजनीति के सिद्धांतों, विचारों और आदर्शों की कलई खुलने की घड़ी है. जितने बड़े मूल्यों के नाम पर इस राजनीति को खड़ा किया गया है, उसकी बुनियाद कितनी कमजोर है, यह बहुजन समाज पार्टी के प्रसंग में दिखाई पड़ रहा है. बसपा का बिखराव एक ‘अजब-गजब’ राजनीति के समापन का संकेत कर रहा है.

यह भी नजर आता है कि पार्टी के भीतर का लौह-अनुशासन कितना कमजोर था. और नसीमुद्दीन जैसे बड़े नेता के मन में कोई भय था, जिसके कारण वे ‘बहनजी’ के साथ अपनी बातों को रिकॉर्ड करते रहे.

इस घटनाक्रम से बीजेपी के नेताओं के चेहरों पर मुस्कान जरूर होगी. पर बसपा के लिए यह संकट की घड़ी है. पराजित पार्टियों की यह आम कहानी है. बीजेपी-विरोधी संभावित महागठबंधन की एक प्रत्याशी बसपा भी है. मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले के खिलाफ सबसे पहले विरोध के स्वर मायावती ने ही मुखर किए थे.

पराजय से बसपा की कमर टूटी

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव की पराजय ने बसपा की कमर तोड़ दी है. उसके पीछे सामाजिक ताकत जरूर है, पर यह ‘एक नेता’ वाली पार्टी है. अभी तक इसमें दूसरे नंबर का कोई नेता नहीं है. हाल में मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाने की घोषणा की है. इससे यह भी जाहिर होता है कि उन्हें अपने सहयोगियों पर पूरा भरोसा नहीं है.

बहरहाल जब तक पद और रसूख था, तबतक संगठन का अनुशासन और पार्टी की एकता थी. एक बार यह खत्म हुआ तो बिखराव शुरू हो गया. बहुजन समाज पार्टी पहले भी टूट की शिकार हुई है. हाल में हुए चुनाव के पहले ही उसके कई प्रमुख नेता पार्टी छोड़कर बीजेपी में चले गए थे. यह क्रम अभी जारी है.

पार्टी के इस आंतरिक संघर्ष में कहीं न कहीं नोटबंदी की भी भूमिका है. अभी सिर्फ अनुमान ही लगाया जा सकता है कि पैसों का विवाद कितना बड़ा है. पर मामला रुपयों का है. विस्मय रुपयों पर नहीं. इस बात पर है कि नसीमुद्दीन जैसे वफादार नेता को पार्टी से हटाया गया है.

पर शायद नसीमुद्दीन को इस बात पर विस्मय नहीं हुआ. शायद उन्हें इस बात का अंदेशा था. तभी तो वे टेलीफोन पर होने वाली अपनी इन बातों को रिकॉर्ड करते रहे. आंतरिक लोकतंत्र से विहीन अपारदर्शी राजनीतिक दलों के नेताओं के मन में किस कदर असुरक्षा की भावना है, वह यहां दिखाई पड़ती है. राजनीति के अंधेरे कोनों में जो कुछ छिपा है, वह रोशनी में आ रहा है.

क्षेत्रीय क्षत्रपों की सामंती तानाशाही किसी से छिपी नहीं है. पर स्टिंग ऑपरेशनों, फोन टेपिंग और अब नसीमुद्दीन शैली की रिकॉर्डिंगों ने नया रास्ता खोल दिया है. इससे यह भी समझ में आता है कि धर्म, संप्रदाय, जाति और सामाजिक न्याय का किस तरीके से राजनीतिक इस्तेमाल होता है.

सामान्य कार्यकर्ता और वोटर जिन बातों के लिए न्योछावर हुए जाते हैं, वे बातें नेताओं के दरबार में पैसे के मुकाबले कितनी तुच्छ होती हैं, यह कोई भी देख और समझ सकता है.

 

About ntinews

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*

ăn dặm kiểu NhậtResponsive WordPress Themenhà cấp 4 nông thônthời trang trẻ emgiày cao gótshop giày nữdownload wordpress pluginsmẫu biệt thự đẹpepichouseáo sơ mi nữhouse beautiful