Templates by BIGtheme NET

आखिर क्यों हटाया इन मंत्रियों को मोदी मंत्रिमंडल से ?

सरकार में राज्यमंत्री जिन्हें डिप्टी मिनिस्टर भी कहा जाता है, के पास अक्सर काम नहीं रहता है। यहाँ तक कि राज्यमंत्री के पास राज्यपाल से भी कम अधिकार होते हैं और वह अक्सर अपने कैबिनेट मंत्रियों की दया पर चलते हैं। अगर कैबिनेट मंत्री अपने राज्यमंत्रियों को कोई काम या विभाग आबंटित करते भी हैं तो अंतिम हस्ताक्षर के लिए फाइलें मंत्री के पास ही जाती है। यानी कैबिनेट मंत्री के पास जो ताकत होती है उसका एक-चौथाई ही राज्यमन्त्री के पद में निहित होता है।

लिहाजा पीएम मोदी ने जिस तरह संजीव बालियान से लेकर महेन्द्रनाथ पांडे जैसे मंत्रियों अपनी सरकार से हटाया वह एक कॉस्मेटिक चेंज है। सच तो यह है कि सरकार में आज भी कई ऐसे मंत्रालय हैं जहाँ सरकारी फाइलें बाबुओं के मेज से आगे नहीं बढ़ पाती। पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल में डिजिटल इंडिया से लेकर स्किल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया जैसी कई योजनाए शुरू की लेकिन मंत्रियों की नाकामी से ये योजनाएं पूरी तरह फेल रही।

कहा जा रहा है कि आगामी मंत्रिमण्डल विस्तार को लेकर पीएम मोदी ने जो फैसले लिए हैं वह मंत्रियों का काम देखने के बाद उसके विश्लेषण के आधार पर किया गया। मोदी मंत्रीमंडल से जिन्होंने इस्तीफ़ा दिया उनमे उमा भारती, कलराज मिश्र, संजीव बालियान, महेंद्रनाथ पांडेय, राजीव प्रताप रूडी और निर्मला सीतारमण शामिल हैं।

कलराज मिश्रा को लेकर पहले ही कहा जा रहा था कि उन्हें 75 साल से ऊपर होने के कारण बाहर किया जाएगा। पिछले विस्तार के समय उन्हें चुनाव को देखते हुए बाहर नहीं किया गया था। जबकि उमा भारती को लेकर ये खबरें आती रही है कि उनका स्वास्थ्य कई समय से सही नहीं चल रहा है।

पूर्व कमिश्नर सत्यपाल सिंह को मिल सकती है जगह 

चर्चा यह भी है कि संजीव बालियान के स्थान पर सत्यपाल सिंह को मंत्रिमंडल में मुंबई के पूर्व कमिश्नर सत्यपाल सिंह को मौका मिल सकता है। सत्यपाल सिंह ने 2014 में आरएलडी के अजित सिंह को हराया था। कहा जा रहा है कि यह संजीव बालियान की जगह नए जाट नेता सत्यपाल सिंह को लाने की कवायद है। सत्यापल सिंह मुंबई पुलिस में रहे हैं इसलिए उनसे मोदी उम्मीद लगा रहे हैं।

महेंद्र नाथ पांडे बोले निकाला नहीं गया 

स्वास्थ्य राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने अमित शाह के कहने पर पीएम को इस्तीफा सौंपा। कहा जा रहा था कि कार्यकाल के दौरान कुलस्ते को उनके कैबिनेट मंत्री ने कोई जिम्मेदारी नहीं दी। मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री महेंद्र नाथ पांडे ने इस्तीफे के बाद कहा कि उन्हें न निकाला गया है और न ही उन्हें हटाया गया है। उन्होंने कहा, मैं हमेशा से ही संगठन का ही सिपाही था पार्टी को उपयुक्त लगा तो मुझे दोबारा संगठन में लाया जा रहा है जो पार्टी ज़िम्मेदारी देगी मानूंगा।

रूडी से शाह थे नाराज 

मोदी मंत्रिमंडल में राजीव प्रताप रुडी जो कि कौशल विकास मंत्री थे वो मोदी मंत्रिमंडल में लम्बे समय से आये थे और अब उन्हें जल्दी भेज दिया गया है। ऐसा कहा जा रहा है कि रूडी के मंत्रालय में जिस तरह से एक कंपनी आई &एफएस पर मेहरबानियां की गई, उसको लेकर गड़बड़ियों की शिकायत थी। हालाँकि इस तरह की शिकायतें रूडी के मंत्रालय से ज्यादा पेट्रोलियम, केमिकल एंड फर्टिलाइज़र, स्टील और पॉवर जैसे मंत्रालयों में भी थी।

सूत्रों की माने तो रूडी को हटाने का सबसे बड़ा कारण उनसे अमित शाह की नाराजगी थी। यह नाराजगी बिहार चुनाव में रूडी की भूमिका को लेकर थी। रुडी का कहना है कि अमित शाह ने मिलकर उनसे बात की थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने फैसला लिया और उन्हें बता दिया। जब उनसे पूछा गया कि क्या पार्टी उन्हें कर्नाटक और गुजरात के विधानसभा चुनावों के लिए बड़ी जिम्मेदारी देने जा रही है तो उनका कहना था- देखते हैं… फिलहाल मैंने पद छोड दिया है।

नीतीश कुमार के नेताओं को मोदी मंत्रिमंडल में खास अहमियत 

मोदी के मंत्री मंडल के विस्तार को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि इस बार मंत्री मंडल में नीतीश कुमार के नेताओं को भी अहम भूमिका दी जा सकती है। जेडीयू के कोटे के तहत आरसीपी सिंह और संतोष कुशवाहा को मंत्री के तौर पर मोदी की कैबिनेट में जगह मिल सकती है। ये दोनों ही नेता बिहार के सीएम नीतीश कुमार के नजदीकी माने जाते हैं।

सुरेश अंगडी, सहस्त्रबुद्धे और भूपेंद्र यादव को मिलेगी जगह 

लम्बे समय से संघ से जुड़े सहस्त्रबुद्धे को भी अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। कर्नाटक से बीजेपी नेता सुरेश अंगडी और प्रह्लाद जोशी जबकि हिमाचल से सतपाल सिंह सत्ती को केंद्रीय कैबिनेट में जगह दी जा सकती है। हिमाचल में इस साल के आखिर में जबकि कर्नाटक में अगले साल चुनाव होने हैं।गुजरात बीजेपी इन्चार्ज भूपेंद्र यादव को केंद्र में मंत्री बनाए जाने की अटकलें हैं। इसकी सीधी वजह तो राज्य में जल्द होने वाले विधानसभा चुनाव ही नजर आते हैं। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने राज्य में 182 में से 150 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है।

अब समझे मोदी गडकरी की अहमियत 

बीजेपी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि तीन साल बाद पीएम मोदी ने महसूस किया कि अगर सरकार में किसी ने काम किया है तो वह नितिन गडकरी ने किया है। हालाँकि यह बात अलग है कि गडकरी से मोदी की दूरियां पार्टी में सबको पता है। लेकिन सच यह भी है कि  जब मजबूरियां सामने आती हैं कि पीएम मोदी शेर की सवारी करने से नहीं चूकते हैं।

About News Trust of India

News Trust of India is an eminent news agency

Leave a Reply

Your email address will not be published.

ăn dặm kiểu NhậtResponsive WordPress Themenhà cấp 4 nông thônthời trang trẻ emgiày cao gótshop giày nữdownload wordpress pluginsmẫu biệt thự đẹpepichouseáo sơ mi nữhouse beautiful