उत्तराखंड में कब लगेगा सड़क हादसों पर विराम ?

हादसों से अजीज आ चुके लोग
जिस तरह प्रदेश में सड़क हादसे बढ़ रहे हैं, उससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं.   बीते 17 साल में 843 से ज्यादे सड़क हादसे सामने आ चुके हैं और ये सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. हादसे से अजीज आ चुके लोग सरकार से सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर हादसों पर कब लगाम लगेगी? वहीं सरकार मुआवजे तक ही सीमित रह गई है.  शासन-प्रशासन के अधिकारी भी मानते हैं कि पर्वतीय क्षेत्रों में ओवरलोडिंग और तेज रफ्तार हादसों की प्रमुख वजह हैं. लेकिन इसके बावजूद इस ठोस कार्रवाई नहीं होने से बदस्तूर जारी है.
कब लगेगी हादसों पर लगाम?
पौड़ी के धूमाकोट में हुए बस हादसे में 48 लोगों की मौत से राज्य की सरकारी मशीनरी और परिवहन की सुविधाओं पर सवाल खड़े किए थे. इस हादसे के बाद भी सरकार ने कोई सबक नहीं लिया और नतीजा धूमाकोट हादसे के रूप में सामने आया था. देहरादून के त्यूणी में हुए बस हादसे में 44 लोगों को जान गंवानी पड़ी थी. त्यूणी बस हादसे के बाद उत्तराखंड पुलिस ने पिछले 17 वर्षो में  बसों से 843, ट्रकों से 1139, जीप से 849, मोटरसाइकिलों से 1548, टैक्सी से 969 और कार से 2129 सड़क हादसे हो चुके हैं. इनमें 2497 की मौत हो चुकी है और 4978 लोग घायल हुए. साथ ही ये सिलसिला जारी है.
जांच और आश्वासन तक सिमटी सरकार
इन हादसों में कई घरों के चिराग बुझ गये और कई परिवार खत्म हो गये. जिसके बाद भी सरकार गंभीर नहीं दिखाई दे रही है. वहीं बीते दिन उत्तरकाशी के गंगोत्री हाई-वे पर एक टेम्पो ट्रेवलर खाई में गिर गया. हादसे में गुजरात के 10 यात्रियों की मौत हो गई है जबकि पांच घायल हुए हैं. एक यात्री की उपचार के दौरान मौत हो गई. मौके पर एसडीआरएफ की दो टीम ट्रेवलर को काटकर शव निकाला. वहीं हादसे के बाद सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हादसे के जांच के आदेश दिए हैं.

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