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व्यापमं घोटाला में सीट बेचने के लिए इंजन-बोगी मॉडल

भोपाल. मध्य प्रदेश के व्यापमं (व्यावसायिक परीक्षा मंडल) घोटाले से जुड़े पीएमटी 2012 मामले की चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी गई है। इसमें सीबीआई ने बताया है कि घोटाले के लिए रैकेटियर्स ने इंजन-बोगी मॉडल (स्कोरर्स- कैंडिडेट) ईजाद किया था। इनके स्टेशन यानी केंद्र- भोपाल, इंदौर और शहडोल में ही रखे जाते थे। एग्जाम सेंटर्स में एक इंजन पर कई बोगियों को नकल कराने की जिम्मेदारी होती थी। घोटालेबाज यूपी, बिहार, महाराष्ट्र और राजस्थान के मेडिकल कॉलेज और कोचिंग के ब्रिलियंट स्टूडेंट्स को लालच देकर इंजन बनने के लिए तैयार करते थे। फिर व्यापमं के अफसरों से मिलकर एग्जाम सेंटर्स में ऐसा सिटिंग अरेंजमेंट करवाते थे कि इंजन के ठीक पीछे बोगियां यानी कैंडिडेट्स बैठ सकें। एक इंजन पर दो से पांच बोगियों को नकल कराने की जिम्मेदारी होती थी।

नकल नहीं करा पाए, तो बदल देते थे OME शीट
– किसी सेंटर में इंजन नकल कराने में नाकाम रहा तो बोगियों को पास कराने के लिए रैकेटियर व्यापमं अफसरों की मदद से उनकी ओएमआर शीट तक बदल देते थे।
– सीबीआई ने चार्जशीट में ऐसे कई उम्मीदवारों की ओएमआर शीट बदने का जिक्र किया है।

3 शहर ही क्यों थे स्टेशन?
भोपाल: यहां चार बड़े प्राइवेट मेडिकल कॉलेज हैं, इसलिए सीटों के ज्यादा खरीददार। व्यापमं के अफसरों से मिलकर सेटिंग में आसानी।
इंदौर: यहां रैकेट के सरगना जगदीश सागर का हेडक्वार्टर था। नकल कराने के लिए गुजराती कॉलेज से सांठ-गांठ में आसानी थी।
शहडोल: राज्य के बॉर्डर पर है। ऐसे स्कोरर जो बार-बार पीएमटी में शामिल होते थे, उनकी पहचान छुपाने के लिए सुरक्षित था।

कहां कितने इंजन बोगी थे?
– पीएमटी 2012 में इंदौर, भोपाल और शहडोल में 348 कैंडिडेट्स इंजन-बोगी मॉडल में शामिल थे।
– इंदौर में 124 इंजन और 124 बोगी थे।
– भोपाल में 32 इंजन 32 बोगी, इसमें तीन जोड़ी ऐब्सेंट थे।
– शहडोल में 9 इंजन, 9 बोगी थीं।

रसूखदार आरोपियों ने नहीं दी जमानत अर्जी
– कुछ रसूखदार आरोपियों ने अपनी जमानत के लिए शुक्रवार को सीबीआई कोर्ट में अर्जी नहीं दी। माना जा रहा है कि इन्हें कोर्ट से जेल भेजे जाने का डर है। ऐसे में, वे इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील कर सकते हैं।
– 2013 में अरबिंदो मेडिकल कॉलेज के कर्ता-धर्ता डॉ. विनोद भंडारी को ऐसे ही मामले में लंबे वक्त तक जेल में रहना पड़ा था।

चार्जशीट में किनके नाम?
– इसमें पीपुल्स मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन सुरेश एन विजयवर्गीय, चिरायु के अजय गोयनका, एलएन मेडिकल कॉलेज के जयनारायण चौकसे और इंडेक्स के सुरेश भदौरिया समेत कॉलेज मैनेजमेंट से जुड़े 26 बड़े नाम हैं।

स्टूडेंट जानबूझकर एडमिशन नहीं लेते, ताकि सीट खाली रहें
– व्यापमं घोटाले में मेडिकल कॉलेजों के मैनेजमेंट और हेल्थ एजुकेशन डिपार्टमेंट के अफसरों के गठजोड़ ने तय प्लान के तहत सारा काम किया। कॉलेज एमबीबीएस की राज्य कोटे की सीटों पर दाखिले में घोटाला करते थे। इसके लिए इन सीटों पर ऐसे स्टूडेंट्स को एडमिशन दिया जाता था, जो पहले से ही किसी दूसरे मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के स्टूडेंट थे। ये लोग काउंसलिंग के दौरान एडमिशन के लिए आते थे, लेकिन फिक्सिंग की वजह से आखिरी वक्त पर एडमिशन नहीं लेते थे।

– भोपाल के चार प्राइवेट मेडिकल कॉलेज- पीपुल्स, इंडेक्स, एलएन और चिरायु के मैनेजमेंट पर आरोप है कि वे ऐसी सीटों को पहले भरी हुई और बाद में खाली बता देते थे।

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