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अद्भुत ” विंदेश्वर महादेव ” का प्राचीन मंदिर

(मोहन भुलानी)

विंदेश्वर महादेव मंदिर उत्तरांखंड के पौड़ी जनपद मुख्यालय से लगभग 120 किलोमीटर, चमोली जनपद के गैरसैण से 12 किलोमीटर, रामनगर से 95 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्थान गढ़वाल और कुमाऊं के संगम तथा जनपद पौड़ी गढ़वाल, चमोली गढ़वाल एवं अल्मोड़ा जनपदों का सीमांत में स्थित देवदार के घने वृक्षों से आच्छादित वन दूधातोली के रमणीक स्थान पर विराजमान है. इस मंदिर को विनसर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह समुद्र तल से लगभग 2800 मीटर की उंचाई पर बसा है। विंदेश्वर मंदिर का प्रांगण एक ऐसा स्थान है जो अनछुए प्राकृतिक वैभव और शांत परिवेश के लिए जाना जाता है। कोलाहल और प्रदूषण भरे दैनिक जीवन से ऊब कर लोग ऐसे ही स्थान पर चंद रोज बिताना चाहते हैं। यह जगह प्राकृतिक प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है।

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घने देवदार के जंगलों से निकलते हुए शिखर की ओर रास्ता जाता है, जहां से हिमालय पर्वत श्रृंखला का अकाट्य दृश्‍य और चारों ओर की घाटी देखी जा सकती है।तलहटी में चौथान पट्टी का सुन्दर एवं खूबसूरत नज़ारा मनोहारी है. बिनसर से हिमालय की चौखंबा, त्रिशूल, नंदा देवी, नंदाकोट और पंचोली चोटियों की 150 किलोमीटर लंबी शृंखला दिखाई देती है, जो अपने आप मे अद्भुत है और ये बिनसर का सबसे बडा आकर्षण भी हैं। 7वीं शताब्दी से 12वीं शताब्दी तक इस क्षेत्र में पाल एवं चंद्र वंश के राजाओं का शासन था। राजाओ ने इस स्थान को अपनी ग्रीष्मकालीन आरामगाह भी बनाया था। जनश्रुति के अनुसार कभी इस वन में पाण्डवों ने वास किया था। पाण्डव एक वर्ष के अज्ञातवास में इस वन में आये थे और उन्होंने इस स्थान में छोटे से मन्दिर का निर्माण किया था। यह मंदिर भगवान भोलेनाथ के साथ हरगौरी, गणेश और महिषासुरमर्दिनी के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। इस मंदिर को लेकर यह माना जाता है कि यह मंदिर गढ़वाल में चांदपुर गढ़ी के महाराजा पृथु ने अपने पिता बिन्दु की याद में बनवाया था। क्यों कि महाराजा विन्दु ने इस स्थान पर तप से ही पुत्ररत्न के रूप में पृथु को प्राप्त किया. यह मंदिर पौराणिक शिल्पकला का अद्भुत सजीव चित्रण है। मंदिर में हर वर्ष कार्तिक मास की बैकुंठ चर्तुदशी के पावन पर्व पर विशाल धार्मिक मेले का आयोजन किया जाता है।

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मेले में जनपद पौड़ी, जनपद चमोली और जनपद अल्मोड़ा से श्रद्धालु मेले में पहुंचकर पूजा अर्चना एवं प्रातः काल में स्नान कर पुण्य प्राप्त करते है. आरम्भ में लोग यहां केवल मंदिर में दर्शन करने के लिए ही आते थे। लेकिन कुछ वर्षों से विंदेश्वर ट्रैकिंग के शौकीन लोगों की पसंद बना हुआ है। ये स्थान अभी तक सड़क मार्ग से नहीं जुड़ा है. बांज और बुरांश जैसे पर्वतीय वृक्षों से घिरे मार्ग के दोनों ओर ढलानों पर रंग-बिरंगे जंगली फूलों की झाड़ियां भी हैं। यही कारण है की पहाड़ी वनस्पति की महक पूरे रास्ते वातावरण को रूमानी बनाए रखती है।

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