उत्तराखंड में फिर बारिश का कहर

कुमाऊं में बागेश्वर जिले के कपकोट में मंगलवार की सुबह से हो रही बारिश से पहाड़ टूट गया। इस मलबे में कई वाहन दब गए। कपकोट में कई घरों में बरसात का पानी घुस गया। सोमवार से बागेश्वर में हो रही बारिश के कारण सरयू नदी भी उफान पर है। इससे लोगों में दहशत बनी हुई है। बारिश से बागेश्वर और पिथौरागढ़ में कई सड़कें बंद पड़ी हैं।

उधर, गढ़वाल के थराली सहित आस पास के क्षेत्रों में मंगलवार की तड़के हुई जोरदार बारिश से नालों और गधेरों का मलबा सड़क पर आ गया। जिससे थराली देवाल मुख्य मार्ग सहित छह अन्य लिंक मार्ग बंद हो गए हैं। कई जगह चटटानें टूटने से सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। साथ ही तहसील मुख्यालय राड़ीबगड़ और केदारबगड़ में बरसाती नालों से मलबा आने से सड़क बंद हो गई। बाद में पीडब्ल्यूडी की जेसीबी मशीन ने आवागमन चालू किया।

बता दें कि मौसम विभाग ने उत्तराखंड के ज्यादातर क्षेत्रों में 10 और 11 जुलाई को जमकर बारिश होने की आशंका जताई है। मौसम विभाग ने 11 जुलाई तक लगभग पूरे कुमाऊं और गढ़वाल के अधिकांश क्षेत्रों में भारी बारिश की आशंका जताई है। इसको देखते हुए अलर्ट जारी किया गया है। विभाग के अनुसार 10 जुलाई को विशेषकर कुमाऊं के सभी जिलों और गढ़वाल के चमोली, पौड़ी एवं रुद्रप्रयाग में भारी बारिश हो सकती है। वहीं, 11 जुलाई को पूरे कुमाऊं क्षेत्र के साथ ही गढ़वाल के देहरादून, उत्तरकाशी और टिहरी जिलों में भी भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका है। मौसम केंद्र निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि बारिश को देखते हुए अलर्ट जारी किया गया है।

चमोली जिले के घाट क्षेत्र में छह घंटे की मूसलाधार बारिश ने तबाही मचाई है। चुफलागाड में उफान आने से कई हेक्टेयर कृषि भूमि मलबे में दफन हो गई। भैंटी-पथोली और कुंगुर्चा-स्यांरी पैदल मार्ग पर निर्मित पैदल पुलिया बह गई। घाट-भैंटी मोटर मार्ग अवरुद्घ हो गया, जो सोमवार को सुबह ग्यारह बजे वाहनों की आवाजाही के लिए खुल पाया। भारी बारिश से नदी किनारे बसे गांवों के ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। अनहोनी की आशंका से भयभीत ग्रामीण रात को अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंच गए।

घाट क्षेत्र में रविवार को रात करीब 11 बजे शुरू हुई भारी बारिश सोमवार सुबह करीब पांच बजे थमी। इस दौरान चुफलागाड में उफान आने से किनारे बसे घाट, तेलांण, बांजबगड़, बंगाली, भेंटी, लांखी, सरपाणी, उस्तोली, सैंती, फाली, फरखेत, कुमजुग, मथकोट, सुंग-ल्वांणी, चरबंग, लुणतरा, कुरुड़ और घिंघराण गांव के ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। नदी से करीब 35 आवासीय भवनों को खतरा बना हुआ है।

जिला पंचायत सदस्य गुड्डू लाल, पंकज मैंदोली, नंदन सिंह रावत, शंभू प्रसाद और महिपाल सिंह का कहना है कि खेतों में भारी मलबा भरने से कृषि भूमि नष्ट हो गई है। जिलाधिकारी आशीष जोशी ने कहा कि घाट क्षेत्र में हुए नुकसान की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। मौके पर तहसील प्रशासन की टीम भेजी गई है। अधिकारियों को त्वरित राहत कार्य और बंद मार्गों को सुचारु करने के निर्देश दिए गए हैं।

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