उत्तराखंड के अधिकारी ने किया केंद्र सरकार की नाक में दम

भारतीय वन सेवा (आइएफएस) के इमानदार और तेज तर्रार वरिष्‍ठ अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की एक याचिका केन्‍द्र सरकार के गले की फांस बन गई है। केन्‍द्रीय सूचना आयोग (सीआइसी) के मुख्‍य सूचना आयुक्‍त राधा कृष्‍ण माथुर ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को 2014 से 2017 के बीच हुए घोटलों की शिकायत सार्वजनिक करने और इन पर की गई कार्रवाई को साझा करने के निर्देश दिए हैं। सूचनाओं की जानकारी 15 दिन के अंदर सार्वजनिक करनी होगी। भारतीय वन सेवा-2002 बैच के अधिकारी चतुर्वेदी फिलहाल उत्‍तराखंड के नैनीताल जिले के हल्‍द्वानी में तैनात हैं। आइए आपको बताते हैं भ्रष्‍टाचार के खिलाफ लड़ाई के कारण अक्‍सर ट्रांसफर झेलने वाले इस चर्चित अधिकारी के कुछ और किस्‍से जिनके कारण वे में चर्चा में रहे हैं।

अब मोदी सरकार के लिए ये याचिका बनी चुनौती

आइएफएस संजीव चतुर्वेदी ने अगस्त 2017 में पीएमओ में लगाई आरटीआइ में पूछा था कि एक जून 2014 से अगस्त 2017 तक कैबिनेट मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के कितने मामले आए। शिकायत, जांच व कार्रवाई की प्रति उपलब्ध करवाई जाए। इसके अलावा विदेशों से कालाधन मंगवाने की प्रक्रिया, विज्ञापनों पर खर्च रकम, मेक इन इंडिया में तैयार स्वदेशी उत्पाद, स्मार्ट सिटी की सूची व उनमें क्या काम हुआ की सूचना उपलब्ध करवाने को कहा। वहीं लोकपाल गठन को क्या कार्रवाई अब तक हुई। इसकी सूचना भी मांगी गई। एम्स से चतुर्वेदी को हटाने के बाद जेपी नड्डा पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर क्या कार्रवाई हुई व गंगा में प्रदूषण मानकों का ब्यौरा 2014 से 2017 तक की अवधि का देने को कहा। आइएफएस चतुर्वेदी ने बताया कि वीडियो क्रांफ्रेसिंग के दौरान मुख्य सूचना आयुक्त ने पीएमओ को पांच दिन के भीतर विज्ञापन संबंधी जानकारी व अन्य बिंदुओं पर सूचना 15 दिन के भीतर देने का फैसला सुनाया है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के कारण मिल चुका है ये अवार्ड

संजीव चतुर्वेदी को 2015 का रेमन मैग्सेसे पुरस्कार दिया गया है। वे दूसरे सर्विंग ब्यूरोक्रेट हैं, जिन्हें इस पुरस्कार से नवाजा गया है। इससे पहले किरण बेदी को यह पुरस्कार मिल चुका है । संजीव चतुर्वेदी को यह पुरस्कार सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के मामलों को उजागर करने के लिए दिया गया है।

तेज तर्रार अफसर के कॅरियर पर एक नजर

  • संजीव चतुर्वेदी ने 1995 में मोतीलाल नेहरू इंस्‍टीट्यूट ऑफ़ टेक्‍नोलॉजी, इलाहाबाद से बीटेक की डिग्री ली।
  • 2002 के आईएफएस संजीव मूलत: हरियाणा काडर के अफ़सर हैं। पहली पोस्टिंग भी कुरुक्षेत्र में मिली। संजीव ने यहां हांसी बुटाना नहर बनाने वाले ठेकेदारों के खिलाफ करप्‍शन के कारण केस दर्ज कराया था।
  • 2014 में संजीव को स्‍वास्‍थ्‍य सचिव ने ईमानदार अधिकारी का खिताब दिया था।
  • भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कार्रवाई किए जाने के कारण पांच साल में 12 बार स्थानान्तरण का दंड झेलना पड़ा ।
  • 2009 में हरियाणा के झज्जर और हिसार में वन घोटालों का पर्दाफाश किया था।
  • 2009 में ही संजीव पर एक जूनियर अधिकारी संजीव तोमर को प्रताड़ित करने का आरोप लगा, हालांकि बाद में वह आरोप मुक्त हो गए।
  • संजीव ने 2007-2008 में झज्जर में एक हर्बल पार्क के निर्माण में हुए घोटाले का पर्दाफाश किया, जिसमें मंत्री और विधायकों के अलावा कुछ अधिकारी भी शामिल थे।
  • राज्य सरकार की कार्रवाइयों से परेशान होकर 2010 में केंद्र में प्रति नियुक्ति की अर्जी दी थी।
  • 2012 में उन्हें एम्स के डिप्टी डायरेक्टर का पद सौंपा गया। एम्स के सीवीओ पद की जिम्मेदारी सौंपी गई।

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