NIT मामला: सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने पहुंचे छात्र

उत्तराखंड के श्रीनगर स्थित एनआईटी के छात्रों ने संस्थान के अस्थायी कैम्पस और वहां व्याप्त अव्यवस्था से तंग आकर सप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का फैसला लिया है. दरअसल, साल 2009 में शुरू हुई एनआईटी के सैंकड़ों छात्र पिछले नौ सालों से एक अदद कैम्पस की बाट जोह रहे हैं लेकिन सरकार के तमाम दावों और वादों के बावजूद लगभग एक दशक बाद भी उत्तराखंड की यह एक मात्र एनआईटी टीन शेड में ही संचालित हो रही है.
उत्तराखंड से दिल्ली पहुंचे एनआईटी के तीन छात्र उन सैंकड़ों छात्रों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं जो सरकार के ढुलमुल रवैये और अस्थायी कैम्पस के लचर व्यवस्था से परेशान हो चुके हैं. इनका कहना है कि मुख्यमंत्री से लेकर शिक्षामंत्री और प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक से पत्राचार कर गुहार लगाई जा चुकी है. लेकिन सैंकड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले पर किसी ने भी कोई गम्भीरता नहीं दिखाई और न ही इन्हें कभी इनके पत्रों का जवाब ही मिला.
छात्रों की मांग ने आंदोलन का रूप तब ले लिया जब 3 अक्टूबर को एनआईटी के अस्थायी कैंपस के बाहर बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग 58 पर दो छात्राओं को एक बेकाबू कार ने टक्कर मार दी. इस दुर्घटना में एक छात्रा गंभीर घायल हो गई थी. जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है. इस घटना का आक्रोश इतना बढ़ गया कि छात्र आंदोलन पर चले गए और कैंपस को कहीं और शिफ्ट करने की मांग करने लगे. उन्होंने कैंपस में असुरक्षा, बदइंतजामी और एनआईटी एक्ट की अवहेलना का आरोप लगाया है.
बीते 25 अक्टूबर को मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बयान जारी किया था कि वो एक हफ्ते या आठ दिन के अंदर अस्थायी कैंपस की व्यवस्था को दुरुस्त करने के कोई उपाय करेंगे और स्थायी कैम्पस बनाने के मुद्दे को भी पूरी गम्भीरता से देखा जा रहा है. इस बयान को एक हफ्ता बीतने को है लेकिन इन छात्रों की मानें तो स्थिति में किसी तरह का सुधार नहीं हुआ है.
नौ सौ से ज़्यादा छात्रों की क्षमता वाले इस एनआईटी में अब महज कुछ सौ छात्र ही रह गए हैं. ज्यादातर छात्र या तो घर चले गए हैं या कहीं और रहने को मजबूर हैं. तमाम तरह के विरोध प्रदर्शन, धरना और हस्ताक्षर अभियान चलाकर थक चुके छात्रों ने अब सप्रीम कोर्ट की शरण लेने का फैसला लिया है.

NIT उत्तराखंड के छात्र बहरहाल सप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं और साथ ही इस मामले में कई वरिष्ठ वकीलों से भी मिल रहे हैं.

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