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उत्तराखंड में नशे की खेती में अब ड्रोन की नज़र

देहरादून : पुलिस महकमा अब अफीम व अन्य नशायुक्त वनस्पति की खेती पर ड्रोन से नजर रखने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए विभाग की ओर से दस ड्रोन खरीदने के लिए बाकायदा बजट की भी मांग की गई है। पुलिस महकमे का यह प्रस्ताव शासन के जरिये केंद्र को भेजा जा रहा है।

उत्तराखंड में अभी कई जिलों में अफीम, डोडा, पोश्त व खसखस की खेती हो रही है। इसमें देहरादून के चकराता क्षेत्र, उत्तरकाशी व टिहरी के क्षेत्र शामिल हैं। खुफिया विभाग की रिपोर्ट के अनुसार यहां कई एकड़ जमीन पर अफीम की अवैध पैदावार की जाती है। सीमांत व दुरुह पर्वतीय क्षेत्र होने के कारण पुलिस व नारकोटिक्स महकमा इन पर पूरी तरह अंकुश लगाने में नाकाम रहा है। यहां तक कि इस कारोबार में कई सफेदपोश लोगों के लिप्त होने की बातें भी कई बार सामने आई हैं।

तमाम प्रयासों के बावजूद अफीम की खेती बदस्तूर जारी है। एक वर्ष पूर्व अफीम व अन्य नशायुक्त वनस्पति की खेती के संबंध में शासन स्तर पर विस्तृत चर्चा हुई थी। इस दौरान यह बात सामने आई कि नशायुक्त वनस्पति की खेती ऐसे स्थानों में हो रही हैं जहां कोई वाहन नहीं जाते। पुलिस व नॉरकोटिक्स विभाग को यहां स्थानीय लोगों के कड़े प्रतिरोध का भी सामना करना पड़ता है। चूंकि अधिकांश स्थानीय लोग इस प्रकार की खेती से जुड़े होते हैं इस कारण इनके बारे में सूचना एकत्र करने में भी खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसमें काफी मुनाफा भी होता है, इस कारण तमाम सख्ती के बावजूद खेती बदस्तूर जारी है।

सरकार की ओर से अभी तक इस पर रोक के लिए केवल जनजागरूकता अभियान पर ही भरोसा जताया गया है। हालांकि, समय-समय पर ऐसी खेती करने वालों पर एनडीपीएस एक्ट के अनुसार कार्यवाही भी की जाती है।

इस समस्या को देखते हुए अब पुलिस इन पर ड्रोन से नजर रखने की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि ऐसा कर पुलिस ऐसे इलाकों पर भी नजर रख सकेगी जहां तक पुलिस व नारकोटिक्स टीम का जाना संभव नहीं हो पाता था।

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