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रेल के सपने दिखाकर गुमराह कर रही उत्तराखंड सरकार

केन्द्रीय रेल मन्त्री सुरेश प्रभु गत 13 मई 2017 को बदरीनाथ के बस अड्डे में उत्तराखण्ड के चार धामों बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री को रेल मार्ग से जोड़ने के लिए किए जाने वाले सर्वे का शिलान्यास किया. इस अवसर पर केन्द्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु व उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत इस परियोजना को राज्य के कथित विकास का मील का पत्थर बताते रहे. चार धामों को जोड़ने वाली भविष्य की यह परियोजना 327 किलोमीटर लम्बी होगी. जिसकी अभी अनुमानित लागत 43 हजार 200 करोड़ रुपए ऑकी गयी है. इसमें 61 सुरंग बनेंगे. ये सुरंगें कुल 279 किलोमीटर लम्बी होंगी. मतलब ये कि 327 किलोमीटर लम्बे चार धाम रेल मार्ग में रेल केवल 48 किलोमीटर ही खुले आसमान के नीचे बनेगी और बाकी यह सुरंग के अंदर रहेगी. इस रेल मार्ग में 21 रेलवे स्टेशन और 59 पुल बनेंगे.

रेल मार्ग के लिए कथित सर्वे के साथ ही सोशल मीडिया में इस परियोजना की जमकर आलोचना हो रही है. लोग सवाल कर रहे हैं कि राज्य की जनता पीने के पानी, डॉक्टर, शिक्षकों व रोजगार के लिए तरस रही है, पर प्रदेश व केन्द्र सरकार इसके बारे में कोई कारगर पहल करने की बजाय इस तरह के सब्जबाग दिखा रही है, जो अगले दो दशक में भी पूरा होने वाला नहीं है. क्या रेल मार्ग के सर्वे की घोषणा से यहां के लोगों की मूलभूल समस्याएं खत्म हो जायेंगी? सरकार के गठन को पूरे दो महीने हो गए हैं, लेकिन इस दौरान पर्यावरण, सामाजिक सुरक्षा, कानून व्यवस्था को दरकिनार करते हुए प्रदेश सरकार ने केवल खनन व शराब माफिया के हितों को संरक्षित करने के अलावा और कोई कार्य नहीं किया. इधर प्रदेश सरकार अपनी लचर कार्यशैली को लेकर लगातार आलोचनाओं के घेरे में है तो अनिश्चय के भँवर में फँसने वाली रेल परियोजनाओं का सब्जबाग दिखाकर जनता का ध्यान बँटाने की असफल कोशिश की जा रही है.

प्रदेश सरकार इस परियोजना को लेकर इस तरह के दावे कर रही है जैसे कि अगले दो साल में ही यह पूर्ण हो जाने वाली है और इसके बनते ही लोगों की सभी समस्याओं का हल चुटकी में हो जाएगा. ऐसा ही कुछ गत 24 नवम्बर 2016 को भी किया गया था. जब रेल मन्त्री सुरेश प्रभु गैरसैंण पहुँचे. तब उनकी यात्रा के बहाने राज्य में रेल की राजनीति भी तेज हो गई थी. उस समय उनके आने से पहले इस बात की चर्चा ज्यादा थी कि वे ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल मार्ग का शिलान्यास करने आ रहे हैं. पर “प्रभु” ने ऐसा कुछ नहीं किया. किया तो यह कि राज्य के मैदानी क्षेत्र की छह योजनाओं के लोकार्पण और पॉच योजनाओं के शिलान्यास के पत्थर गैरसैंण जरुर पहुँचा दिए और गैरसैंण में लोकार्पण व शिलान्यास कर डाला. वे पत्थर पहले मैदान से पहाड़ पहुँचाए और अब फिर मैदान के उन स्थानों में पहुँचाए गए जहॉ उन्हें लगाया जाना था.

इस बार भी इन रेल मार्गों के कथित सर्वे का हल्ला इस तरह किया गया और इस पर राजनैतिक बयान इस तरह दिए जा रहे हैं, मानो उत्तराखण्ड के जनता की पहली आवश्यकता रेल ही हो और कुछ नहीं. जो आवश्यकताएँ हैं उन्हें पूरी तरह से नैपथ्य में डालने की कोशिसें हो रही हैं. अब उत्तराखण्ड में रेल जब आयेगी तब आयेगी . पहले राज्य की सड़कें तो ऐसी बनवा दो कि वे बरसात के मौसम में भी आधे-एक घंटे से ज्यादा बंद न हों. बरसात के दिनों में राज्य के मुख्य ऋषिकेश – बदरीनाथ मार्ग, ऋषिकेश-गंगोत्री मार्ग, रुद्रप्रयाग-केदारनाथ मार्ग, देहरादून – यमुनोत्री मार्ग, कोटद्वार – पौड़ी मार्ग, रामनगर-रानीखेत मार्ग, हल्द्वानी-नैनीताल मार्ग , हल्द्वानी – अल्मोड़ा – बागेश्वर मार्ग, अल्मोड़ा-बेरीनाग – थल – डीडीहाट मार्ग, अल्मोड़ा – पिथौरागढ़ मार्ग, टनकपुर-पिथौरागढ़-धारचूला आदि दसियों सड़क मार्ग एक – एक हफ्ते से लेकर एक-एक महीने तक बंद रहते हैं. हर रोज होते भूस्खलन के कारण इन मुख्य मार्गों पर यातायात को शुचारू करना मुश्किल हो जाता है. सरकारें सड़कें तो समय से ठीक नहीं कर पाती हैं. इसके बाद भी रेल का सुन्दर सपना ऐसे दिखाया जा रहा है कि हमारे बौद्धिक लोग भी उसके समर्थन में हजारों, लाखों शब्द लिख चुके हैं और लिख रहे हैं.

राज्य की सड़कें इतनी जानलेवा हैं कि हर रोज कोई न कोई बस, जीप, कार, ट्रक आदि के खाई में गिरने से लोग मौत का शिकार हो रहे हैं. पर लोग भी अच्छी व सुरक्षित सड़कों की मॉग करने की बजाय एक ऐसी मॉग के पीछे पड़े रहते हैं, जिसे पूरा होने में कई दशक लग जाएँगें. जब पहाड़ में सड़क चौड़ीकरण में ही एक दशक से ऊपर लग गया है और अभी तक भी काम पूरा नहीं हुआ है तो रेल क्या दो- चार साल में पहुँच जाएगी? हमारे नेता सड़क की बात न कर के रेल की बात ऐसे करते हैं, जैसे कुछ ही दिन में रेल पहाड़ों पर दौड़ा देंगे . ऐसा करने में उन्हें सुविधा यह होती है कि लोग आज की परेशानी को भूलकर भविष्य की रेल की छुकछुक के आनन्द में डूब जाते हैं और उसकी मॉग ऐसे करने लगते हैं, जैसे कि सारी परेशानियों व समस्याओं का एकमात्र हल रेलगाड़ी ही हो.

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