हरिद्वार में विभाग के कर्मी ही कर रहे हैं शराब की तस्करी

देहरादून : हरिद्वार में आबकारी विभाग के प्रवर्तन कर्मियों के शराब तस्करी में लिप्त होने का मामला सामने आया है। यह आरोप किसी बाहरी व्यक्ति का नहीं, बल्कि विभाग की ही आबकारी निरीक्षक प्रतिमा गुप्ता का है और इस बात का खुलासा उनके विभिन्न समय पर आबकारी आयुक्त को लिखे पत्रों में होता है। इसको लेकर उन्होंने मई से जुलाई के बीच पांच कर्मचारियों का अलग-अलग माह में वेतन भी रोका।

आबकारी निरीक्षक का शिकायती पत्र आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है, क्योंकि तस्करी की तमाम शिकायतों के बाद भी विभाग ने हरिद्वार में प्रवर्तन का कार्यालय नहीं खोला है। जबकि सहायक आयुक्त व निरीक्षक प्रवर्तन समेत तमाम पदों पर तैनाती की गई है। हालांकि, आज तक किसी भी कार्मिक ने प्रवर्तन कार्यालय खोले जाने व अन्य अनियमितताओं को लेकर मोर्चा नहीं खोला। मामले की गंभीरता को देखते हुए आबकारी आयुक्त युगल किशोर पंत ने इसकी जांच अपर आयुक्त पीएस गब्र्याल को सौंप दी है।

आबकारी निरीक्षक प्रतिमा गुप्ता का स्थानांतरण जब फरवरी 2017 में हरिद्वार में हुआ तो यहां प्रवर्तन कार्यालय न होने और कर्मचारियों की अनियमितता को लेकर उन्होंने तभी आबकारी आयुक्त को पत्र लिख दिया था। इस पर मुख्यालय स्तर से कोई संज्ञान न लिए जाने पर उन्होंने अपने गोविंदपुरी स्थित आवास पर कार्यालय खोला। करीब तीन माह अपने आवास पर कार्यालय चलाने के बाद उन्होंने एक अन्य स्थल पर अपने खर्चे पर चार हजार रुपये का कमरा कार्यालय के लिए किराये पर लिया। इस दौरान भी वह कर्मचारियों की अनियमितता को लेकर आयुक्त को पत्र लिखती रहीं।

आयुक्त को लिखे एक पत्र में निरीक्षक ने अवगत कराया कि मई के बाद से उप निरीक्षक, प्रधान सिपाही समेत पांच कर्मचारी कार्यालय से अनुपस्थित चल रहे हैं। साथ ही बताया कि कर्मचारियों की संलिप्तता शराब तस्करों के साथ भी पाई जा रही है। इसको लेकर उन्होंने कर्मचारियों का वेतन भी रोक रखा है। वेतन न मिलने से क्षुब्ध कर्मचारी अब आयुक्त के पास पहुंचे तो यह मामला भी उजागर हो गया। आयुक्त युगल किशोर पंत का कहना है कि जांच के बाद पूरी स्थित साफ हो जाएगी और जल्द आगे की कार्रवाई की जाएगी।

डिपो का गड़बड़झाला भी पकड़ा था 

इससे पहले आबकारी निरीक्षक प्रतिमा गुप्ता देहरादून में सीएसडी डिपो में भी निरीक्षक पद पर तैनात थीं। उन्होंने यहां टीएनए के नाम पर करोड़ों रुपये का शराब घोटाला पकड़ा था। इसके बाद जब उन्हें जांच सौंपी गई तो उनके कमरे के एक दरवाजे पर सुराख कर खुफिया कैमरा लगा दिया गया, यह दरवाजा हमेशा बंद रहता था। साथ ही एक रोज कार्यालय बंद होने पर उनके कमरे के बाहर ताले के ऊपर दूसरा ताला जड़ दिया गया। इससे पहले कि जांच अपने अंजाम तक पहुंच पाती, उनका तबादला कर दिया गया।

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