उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने लिए ये बड़े फैसले

देहरादून : प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में एमडी-एमएस व एमबीबीएस करने के इच्छुक युवाओं को सरकार ने बड़ा झटका दिया है। वर्तमान समय में तीन विश्वविद्यालय एचआरएचयू, एसजीआरआर व सुभारती, प्रदेश में मेडिकल कॉलेज संचालित कर रहे हैं। ऐसे में विवि एक्ट की दुहाई देकर वह यह तर्क देते रहे कि फीस निर्धारण का उन्हें पूरा अधिकार है। जिसे अब कैबिनेट ने भी मंजूरी दे दी है। शुल्क निर्धारण का अधिकार मिलने के बाद अब फीस बढ़ना तय है।

राज्य में वर्ष 2012-2013 में निर्धारित शुल्क के आधार पर प्राइवेट मेडिकल कॉलजों में प्रवेश दिए जा रहे थे। फीस का निर्धारण नए सिरे से होना है, पर यह मामला लंबित पड़ा रहा। अभी महज कामचलाऊ व्यवस्था ही चल रही थी। ये मेडिकल कॉलेज यूनिवर्सिटी के तहत संचालित होते हैं। ऐसे में वह बार-बार यह कहते रहे कि फीस निर्धारण का उन्हें पूरा अधिकार है। सरकार के प्रतिनिधि व मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के बीच इस पर एक राय नहीं बन पाई थी। अब कैबिनेट ने इन्हें यह अधिकार दे दिया है कि वह खुद शुल्क निर्धारण कर पाएंगे।

सरकारी व निजी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में एमडी-एमएस और एमडीएस के दाखिले के लिए प्रथम चरण की काउसिलिंग 25 मार्च से होगी। प्रदेश में सेंट्रलाइज्ड काउंसिलिंग के माध्यम से प्रवेश किए जाएंगे। काउसिलिंग ऑनलाइन आयोजित की जाएगी। चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि सोमवार को शासन स्तर पर हुई बैठक में केंद्रीयकृत काउंसिलिंग पर सहमति बन गई है।

राज्य कोटे की सीटों पर उन्हीं छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा जिन्होंने राज्य से एमबीबीएस व बीडीएस किया है। इसके अलावा दुर्गम में सेवा देने वाले चिकित्सकों को नियमानुसार अधिमान दिया जाएगा।

पैरामेडिकल संस्थानों में दाखिले को प्रवेश परीक्षा 

प्रदेश के पैरामेडिकल संस्थानों में दाखिले अब राज्य स्तर पर आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षा के माध्यम से होंगे। जिसका आयोजन सरकार करेगी। प्रदेशभर में फिलहाल छोटे-बड़े करीब 20 पैरामेडिकल संस्थान संचालित हैं। अभी तक इनके दाखिलों की कोई केंद्रीयकृत व्यवस्था नहीं है। प्राइवेट कॉलेज अपने स्तर पर दाखिले करते हैं। लेकिन अब गुणवत्तापरक शिक्षा व एकरूपता लाने के लिए सरकार ने यह अहम कदम उठाया है।

क्रिकेट स्टेडियम का संचालन करेगी निजी कंपनी 

रायपुर स्थित नवनिर्मित अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के संचालन को सरकार ने कंपनी चुन ली है। 30 साल की लीज पर आइएलएफएस कंपनी को संचालन के लिए स्टेडियम दिया गया है। स्पोट्र्स कॉलेज परिसर में निर्मित आइस रिंक के संचालन का जिम्मा भी आइएलएफएस के पास ही रहेगा। सुविधाएं विकसित करने के लिए परिसर में उपलब्ध 2.8 एकड़ जमीन भी निजी कंपनी को दी जाएगी। खेल गतिविधियों से प्राप्त होने वाले राजस्व का 7.50 प्रतिशत कंपनी सरकार को देगी।

सरकार ने यह भी शर्त रखी है कि कंपनी को 75 प्रतिशत आय खेल गतिविधियों से ही करनी होगी। जबकि, 25 प्रतिशत आय कमर्शियल तरीके से अर्जित की जा सकती है। इसके लिए कंपनी 2.8 एकड़ जमीन पर पांच सितारा होटल का निर्माण भी कर सकती है, जो अंतरराष्ट्रीय मैचों के दौरान भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।

पिछले डेढ़ साल से रायपुर स्थित स्टेडियम संचालन के लिए चल रही खोज आखिरकार सोमवार को खत्म हुई। साल 2016 से स्टेडियम संचालन के लिए राज्य सरकार ने तीन बार टेंडर आमंत्रित किए। तकनीकी कारणों से शुरुआती दो टेंडर निरस्त किए गए। लेकिन, पिछले साल हुए तीसरे दौर के टेंडर में आइएलएफएस कंपनी ने ही एकमात्र आवेदन किया।

शासन स्तर पर तमाम औपचारिकताएं पूरी करने के बाद सोमवार को कैबिनेट की बैठक में सरकार ने स्टेडियम संचालन के लिए आइएलएफएस कंपनी के नाम पर मुहर लगा दी। बता दें कि तिरुवनंतपुरम के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के संचालन का जिम्मा भी आइएलएफएस के पास ही है। स्टेडियम की तमाम जिम्मेदारी अब संचालक की होगी। साथ ही देहरादून में अब अंतरराष्ट्रीय स्तर के मैच भी जल्द देखने को भी मिलेंगे। इसके अलावा ट्रेनिंग ऐकेडमी खुलने का सपना भी साकार होगा।

आइस रिंक के दिन बहुरेंगे 

सरकार के इस फैसले के बाद सफेद हाथी साबित हो रहे आइस रिंक के दिन भी बहुरेंगे। संचालन के नियम व शर्तों में यह स्पष्ट है कि जो कंपनी स्टेडियम का संचालन करेगी, उसके पास ही आइस रिंक के संचालन का जिम्मा भी होगा। साथ ही 2.8 एकड़ जमीन पर कंपनी पांच सितारा होटल या खेल से संबंधित कोई भी संसाधन विकसित कर सकती है।

जल्द बन सकेगा अफगानिस्तान का होम ग्राउंड

आइएलएफएस को स्टेडियम संचालन की जिम्मेदारी देने के बाद अब अफगानिस्तान का होम ग्राउंड बनने का सपना भी जल्द पूरा होगा। अभी तक सरकार ने स्टेडियम अपने अधिकार क्षेत्र में नहीं लिया था। जिसके कारण अफगानिस्तान को स्टेडियम देने में बीसीसीआइ के साथ एमओयू साइन करने में तकनीकी अड़चनें आ रही थीं। संचालक मिलने के बाद कंपनी ही बीसीसीआइ के साथ तमाम पत्राचार करेगी। स्टेडियम को बीसीसीआइ और आइसीसी से अंतरराष्ट्रीय स्तर का दर्जा दिलाना भी अब कंपनी के हाथ में है।

यूपीईएस में नए कोर्स को मंजूरी 

यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज (यूपीईएस) में सरकार ने नया पाठ्यक्रम शुरू करने की मंजूरी दी है। सोमवार रात हुई कैबिनेट बैठक में यह मंजूरी दी गई।

यूपीईएस में मानविकी अध्ययन, सामाजिक विज्ञान, प्राकृतिक विज्ञान, अभियांत्रिकी तकनीक अध्ययन के अलावा विधि संकाय, मेडिकल कॉलेज, डेंटल कॉलेज भी शुरू होंगे। इसके अलावा यूनिवर्सिटी ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज अपने कॉलेज भी खोल सकेगी। अब तक यूपीईएस में दो दर्जन के करीब तकनीकी पाठ्यक्रमों के अलावा शोध कार्य भी होते हैं। अब मेडिकल, दंत चिकित्सा के अलावा विधि कोर्स का भी छात्रों को लाभ मिलेगा।

इसके अलावा उत्तराखंड अनुदानित निजी शिक्षण संस्थानों के लिए गठित प्रवेश शुल्क समिति के अध्यक्ष पद के लिए उम्र 62 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष कर दी गई है। गठित प्रवेश शुल्क समिति के अध्यक्ष को हटाने के प्रावधान को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी है।

लोक सेवा आयोग अध्यक्ष का वेतन बढ़ा: कैबिनेट ने सातवें वेतनमान को मंजूरी देते हुए उत्तराखंड राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष का वेतन 80 हजार से बढ़ाकर 2.25 लाख रुपये और आयोग के सदस्यों का वेतन 70 हजार से बढ़ाकर एक लाख, 99 हजार एक सौ रुपये करने को भी मंजूरी दी गई।

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