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मिस्र में 3 महीने के लिए इमरजेंसी लागू

काहिरा. मिस्र में प्रेसिडेंट अब्दुल फतेह अल सीसी ने देश में तीन महीने की इमरजेंसी लगा दी है। यह फैसला ईस्टर से पहले के रविवार को कॉप्टिक क्रिश्चियन्स को निशाना बनाकर किए गए हमलों के बाद लिया गया है। बता दें कि इन हमलों में 45 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 119 लोग जख्मी हुए हैं।
– प्रेसिडेंट सीसी ने देशभर में सेना की तैनाती करने का भी फैसला किया है।
– उन्होंने टीवी पर देश को ऐड्रेस करते हुए कहा, “तीन महीने की इमरजेंसी के दौरान सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।”
– हमलों के बाद देश में तीन दिन के राष्ट्रीय शोक का भी एलान किया गया है।
– सरकारी मीडिया के मुताबिक, हमले के वक्त कॉप्टिक चर्च के हेड पोप टावाड्रोस टू भी मौके पर थे, लेकिन वो सेफ हैं।
– पोप फ्रांसिस इस महीने के बाद मिस्र जाने वाले हैं। उन्होंने इन हमलों की निंदा की है।
रविवार को दो चर्च में हुए थे ब्लास्ट
– मिस्र में रविवार को दो अलग-अलग चर्च में बम ब्लास्ट हुए थे। इनमें 45 लोगों की मौत हो गई, जबकि 119 घायल हैं।
– पाम संडे की प्रेयर के लिए चर्चों में जुटे लोगों को निशाना बनाकर यह हमला किया गया।
– बीते कुछ सालों में यहां माइनॉरिटी क्रिश्चियन्स पर हुआ यह सबसे बड़ा हमला है। आईएसआईएस ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है।
कहां-कहां हुए ब्लास्ट?
– पहला ब्लास्ट काहिरा से करीब 120 किलोमीटर दूर नील डेल्टा में तांता शहर के सेंट जॉर्ज कॉप्टिक चर्च में हुआ। इसमें 27 लोग मारे गए। इनमें तांता कोर्ट के हेड सैमुअल जॉर्ज भी शामिल हैं।
– शुरुआती जांच के मुताबिक, किसी शख्स ने प्रेयर के दौरान चर्च में एक्सप्लोसिव रख दिया था।
– इसके कुछ घंटे बाद अलेक्जेंड्रिया के मनशिया जिले के सेंट मार्क्‍स कॉप्टिक ऑर्थोडॉक्स कैथेड्रल में भी ब्लास्ट हुआ। इसमें करीब 18 लोग मारे गए।
– मिस्र की होम मिनिस्ट्री के मुताबिक, एक फिदायीन ने एक्सप्लोसिव बेल्ट का इस्तेमाल कर खुद को चर्च के अंदर उड़ाने की साजिश रची थी। लेकिन सिक्युरिटी फोर्सेस ने उसे रोक लिया। इसी दौरान ब्लास्ट हो गया।
– इससे पहले, दिसंबर में मिस्र के सबसे बड़े कैथोलिक चर्च में ब्लास्ट किया गया था। इस हमले में 25 लोगों की मौत हो गई थी और 50 जख्मी हुए थे।
कौन हैं कॉप्टिक क्रिश्चियन्स?
– कॉप्टिक भी क्रिश्चियन्स का एक ग्रुप है। इसके लोग मूल रूप से मिस्र में ही रहते हैं। इनकी सबसे ज्यादा तादाद भी मिस्र में ही है। इसके अलावा, ये लोग सूडान और लीबिया में भी रहते हैं।
– मिस्र में रहने वाले कॉप्ट्स को मिडल-ईस्ट (पश्चिम एशिया) की सबसे बड़ी क्रिश्चियन माइनॉरिटी कम्युनिटी माना जाता है। ये मिस्र की आबादी का 10 फीसदी हैं।
– कॉप्ट्स अलेक्जेंड्रिया के कॉप्टिक ऑर्थोडॉक्स चर्च को मानते हैं। चर्च का दावा है कि उसके 1 लाख 63 हजार मेंबर्स हैं।
– इनकी लैंग्वेज भी कॉप्टिक (प्राचीन मिस्री) है। हालांकि, आजकल ज्यादातर कॉप्ट्स अरबी बोलते हैं।

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