देश की जनता को यही सब चाहिए और कुछ नहीं ?

इन फोटोज़ में कोई तारतम्य नहीं है, लेकिन अगर मैंने लोड की हैं, तो उसका कोई तर्क मेरे पास होगा l एक में प्रधानमंत्री लोक कल्याण मार्ग (जिसे पहले रेसकोर्स रोड कहा जाता था) स्थित अपने तीन, पांच और सात नंबर के बंगलों को मिला कर बने पीएम आवास, जिसमें वे अकेले रहते हैं और जिसका कुल एरिया कम से कम आठ-दस एकड़ का तो होगा ही, में एक्सरसाइज़ कर रहे हैं l दूसरे चित्र में एक आम नागरिक (जो दुर्भाग्य से एक अदना-सा हिंदी भाषा का पत्रकार है) ऊबड़-खाबड़ और गू-मूत से लबालब सड़क पर वाक कर रहा है l प्रधानमंत्री 68 साल के हैं और यह आम नागरिक 63 का, अब आपका गर्व से लबालब चैलेंज देखकर कोई भी अभिभूत हो जाएगा l

लेकिन प्रधानमंत्री जी, आप इस देश के चक्रवर्ती सम्राट हैं l भाग्य में राजयोग लिखा कर लाए हैं तो क्या आपको शोभा देता है कि आप हम जैसे गरीब-गुरबों को अपने महल का रौब दिखाएं, अपनी बॉडी का प्रदर्शन करें l राजा का काम है, आम जन के कल्याण के काम करना l उसकी बॉडी तो देखने लायक होगी ही और वह वृद्धावस्था तक ताकतवर और वीर रहता ही है l

अभी कुल डेढ़-पौने दो सौ साल पहले वीर कुंवर सिंह नाम के एक छोटे-से राजा ने विदेशी गुलामी उतार फेंकी और 85 वर्ष की उम्र में भी वह बर्तानिया साम्राज्य के उन शासकों से लड़ता रहा, जिनके शौर्य के आगे सूर्य भी फेल था l बक्सर से कालपी तक उसने नाव में यात्रा की और उसकी एक भुजा में गोली लगी तो उसने वह भुजा अपनी ही तलवार से काट फेंकी किंतु हार नहीं मानी l यहाँ राणा सांगा हुए हैं, जो अस्सी साल की उम्र में बाबर से लड़े थे, और जिनके बारे में कहावत ही है

“अस्सी घाव लगे थे तन में,
फिर भी व्यथा नहीं थी मन में”,

यहाँ राणा प्रताप हुए हैं, जिन्होंने घास की रोटी खाई पर गुलामी स्वीकार नहीं की l यहाँ वीर बहादुर शाह ‘ज़फर’ हुए हैं, जो 82 वर्ष की उम्र में अंग्रेजों से भिड़ गए, अंग्रेजों ने उनके चारों पुत्रों की गर्दन काट कर उनके सिर बादशाह बहादुर शाह ‘ज़फर’ के समक्ष पेश किये लेकिन उस बुजुर्गवार ने उफ़ तक नहीं की l

अब अगर आप अपना फिटनेस चैलेंज दिखाना ही चाहते हैं तो कभी राजौरी और पुंछ आदि बॉर्डर पर जाकर पाकिस्तानी सैनिकों को अपना यह शौर्य दिखाएं, जो रोज़ हमारे सैनिकों के सिर काट रहे हैं l कभी चीन से चैलेंज लें और अमेरिका के ट्रम्प को दिखाएं, पुतिन को दिखाएं ! हम गरीब दिल्ली-एनसीआर वासियों को दिखा कर क्या होगा, जो सुअर के दड़बों जैसे वसुंधरा, वैशाली, इंदिरापुरम और नोएडा के फ्लैटों में सपरिवार रह रहे हैं l जिनको हरियाली, पानी और खुली हवा कभी नसीब ही नहीं होती l

इसलिए हे चक्रवर्ती सम्राट श्री नरेंद्र मोदी जी ! आप अपनी फिटनेस दिखाकर अपनी ही जनता को मत कुढ़ाइये, वरन लोक कल्याण के कार्य करिए l जनता को सांस लेने के लिए हरियाली दीजिए l दिल्ली-एनसीआर को नाहक फैलाना बंद करिए वहां के किसानों की ज़मीनें वापस करिए l कल-कारखानों तथा रोज़गार का विकास पूरे देश में समान रूप से करिए l छोटे-छोटे शहरों में भी रोज़गार होगा, जीने के साधन सुलभ और सुगम होंगें तथा किसानी फले-फूलेगी तो कौन आएगा इस गू और मूत से गंधाती दिल्ली और इसके करीब बसे गाज़ियाबाद, नोएडा, फरीदाबाद और गुड़गाँव में l

आपकी इन फ़ोटोज़ को देख कर अगर मैं खुद के वाक् से तुलना करूं तो यही कहा जाएगा, “कहाँ राजा भोज और कहाँ गंगू तेली !”

साभार : शंभूनाथ शुक्ल

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