नशा मुक्ति के लिए इस लड़की ने बनाई क्रांतिकारी डिवाइस

नशा और धूम्रपान पूरे विश्व के सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। दुनिया भर में हर साल लगभग 50 लाख लोगों की मौत सिर्फ तंबाकू के सेवन से होती हैं। केवल भारत में तंबाकू से हर साल लगभग दस लाख से ज़्यादा लोगों की जानें चली जाती हैं। इन आकड़ों को देख कर ही समझ आ
जाता है कि कितनी बड़ी आबादी इस तरह के बुरे लत से प्रभावित है। पूरी दुनिया में सिगरेट और निकोटीन का सेवन सबसे ज़्यादा प्रचलित है। और भारत में इसे कई रूपों में इस्तेमाल किया जाता है जैसे सिगरेट, बीड़ी, हुक्का, गुटखा इत्यादि। लोग यह जानते हुए भी की ये जानलेवा है उसका सेवन करते हैं। सिगरेट पीने वाले को तो नुकसान होता ही है ,साथ ही साथ व्यक्ति के आसपास मौजूद लोगों के स्वास्थ्य को भी इससे नुकसान पहुँचता है।

कुछ लोग तो चाह कर भी इस बुरे लत को छोड़ नहीं पाते क्योंकि इसकी लत उन्हें यह करने नहीं देती। इसी दर्द को समझा एक महिला इंजीनियर ने और टेक्नोलॉजी की मदद से बनाया एक ऐसा डिवाइस जो धूम्रपान छोड़ने में सहायक है।

इनका नाम है  अक्षया शानमुगम । 29 साल की अक्षया मूलरूप से चेन्नई की रहने वाली हैं। अक्षया नें चेन्नई के ही मीनाक्षी सुंदरराजन इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक किया है। बैचलर्स करने के बाद अक्षया आगे की पढ़ाई के लिए 2009 में यूएस चली गयी। वहां उन्होंने मासेचुसेट्स यूनिवर्सिटी में दाखिला लिया और वहीं से अपनी मास्टर्स और पीएचडी की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के दौरान ही अक्षया ने देखा कि लोग धूम्रपान की समस्या से बहुत ज्यादा ग्रसित हैं और इससे दूसरों को भी तकलीफ़ होती है। बहुत सारे ऐसे लोग भी थे जो सिगरेट आदि लत को छोड़ना चाहते थे पर छोड़ नहीं पा रहे थे। तभी अक्षया ने सोचा था कि इसके निदान के लिए टेक्नॉलॉजी की मदद से कुछ करना चाहिए।

पीएचडी करने के बाद 2015 में उन्होंने यूमास और याले के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर लूमे लैब्स की स्थापना की। अक्षया खुद इस लैब की सीईओ भी हैं। यहाँ  वे अपनी टीम के साथ अलग-अलग तरह की खोजों पर काम करती हैं। अक्षया और लुमे लैब्स के वैज्ञानिकों ने मिलकर एक ऐसी डिवाइस बनाने की पहल की जो धूम्रपान की लत को छोड़ने में मदद कर सके। जल्द ही उनकी कोशिश सफल हो गयी और उन्होंने एक ऐसा डिवाइस बना लिया जो लोगों को धूम्रपान छोड़ने में मदद कर सकता है। यह डिवाइस स्मार्ट वॉच की तरह कलाई पर बांधी जा सकने वाली है। यह डिवाइस इंसान के सेंस ,व्यवहार और सोशल इंटरेक्शन से डेटा डिटेक्ट करती रहती है और जब इंसान को धूम्रपान की तलब होने वाली होती है ये डिवाइस उससे 6 मिनट पहले ही उस व्यक्ति को नोटिफिकेशन देकर सिगरेट ना पीने के लिए सचेत कर देती है।

अक्षया के इस खोज को बहुत सराहा जा रहा है। इस खोज को प्रसिद्ध पत्रिका “फ़ोर्ब्स” ने विश्व स्तर पर सम्मानित किया है। इस अनोखे डिवाइस के लिए अक्षया को फ़ोर्ब्स की “30 अंडर 30” की सूची में स्वास्थ्य के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए स्थान दिया गया।

अक्षया की कंपनी लुमे लैब्स को नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ हेल्थ के द्वारा 1.7 मिलियन डॉलर का फंड भी प्राप्त हुआ है। हालांकि अबतक उनके इस डिवाइस को कोई मेडिकल प्रमाण पत्र नहीं मिला है। पर उम्मीद की जा रही है कि सारी प्रकिया और टेस्ट पूरे हो जाने के बाद जल्द ही इसे मार्केट में आम लोगों के लिए लाया जायेगा। यक़ीनन इस डिवाइस के आने के बाद लोगों को धूम्रपान छोड़ने में काफी मदद मिलेगी।

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