Templates by BIGtheme NET

उत्तराखंड के ये 73 गांव मौत के मुहाने पर

हरीश सरकार को भी मानसून से ठीक पहले आई थी याद
हरीश रावत के मुख्यमंत्री रहते हुए भी इन गांवों की याद सरकार को ठीक बारिश से पहले ही आई थी। तब की रावत सरकार ने उत्तराखंड के संवेदनशील गांवों को दूसरी जगह शिफ्ट करने का लंबा-चौड़ा प्लान बनाया था। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में इस वक्त 73 ऐसे गांव हैं जहां पर एक पत्थर खिसकने से ही कई जिंदगियां मौत के मुंह में जा सकती हैं। यह 73 गांव वह हैं जो आपदा के लिहाज से सरकारी आंकड़ों में बहुत ही ज्यादा संवेदनशील हैं।

 कई गांव होते जा रहे हैं ख़तरनाक

जबकि कई ऐसे भी गांव हैं जो हर बारिश में खतरनाक होते जा रहे हैं। साल-दर-साल इन गांवों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। एक बार फिर से नई सरकार आने के बाद सरकारी अधिकारियों ने इन गांवों को पुनर्वास का लंबा चौड़ा प्लान बनाया है।

जिले के 2 गांवों के पुर्नवास का आदेश
त्रिवेंद्र सरकार ने हर जिलाधिकारी को आदेश दिए हैं कि इस मानसून के साथ-साथ 2017 के खत्म होने तक ऐसे कम से कम जिले के 2 गांवों को चयनित कर उनका पुनर्वास करें। अपर आपदा सचिव विनोद कुमार सुमन की मानें तो सरकार तेजी से काम कर रही है और जल्द ही कुछ गांव का पुनर्वास हो जाएगा।

दावें में कितनी सच्चाई?
हालांकि सरकार और सरकार के अधिकारियों के दावे कितने सही हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अबतक पिछले 5 सालों में मात्र 11 गांवों के लिए ही सरकार जमीन तलाश पाई है। एक बार फिर से सरकार के आपदा विभाग ने यह काम शुरू किया है।

जिन गांव के लिए प्रशासन ने अबतक जमीन तलाशी है वह कुछ इस प्रकार हैं।

 

 जनपद  गांव  परिवार
 बागेश्वर  03  31
 पिथौरागढ़  21  582
 नैनीताल  03  158
 अल्मोड़ा  03  84
 उत्तरकाशी  11  1149
 टिहरी  08  507
 चमोली  17  888
 रुद्रप्रयाग  07  92
 कुल  73  3491

उत्तरकाशी जिले का रिकॉर्ड बेहतर
अतिसंवेदनशील गांवों के पुनर्वास के प्रस्ताव भेजने में उत्तरकाशी जिले का रिकॉर्ड बेहतर है। जिले में छह गांवों का सर्वेक्षण हो चुका है। 11 में से 10 गांवों के भूमि का चयन कर लिया गया है। हालांकि, चमोली के सरतोली, नैथोली, नारंगी, गणांई, दाड़मी, भ्यूंडार पुलना, पांडुकेश्वर, अरूड़ पटूकी, पयां चौरमी, बंगथल गांव के लिए अब तक जमीन नहीं खोजी जा सकी।

बंद कमरों में बैठकर योजना बनाने से नहीं होगा भला
आपको याद होगा कि 2014 की बारिश में उत्तराखंड के कुमाऊं में पूरा का पूरा गांव भूस्खलन की चपेट में आकर तबाह हो गया था जिसमें 30 से ज्यादा लोग मारे गए थे। कुदरत हमेशा से सरकार और अधिकारियों को यह बताती रहती है कि हालात पहाड़ों में क्या है लेकिन हमारी सरकारें मात्र बंद कमरों में बैठकर ही योजनाएं तो खूब बनाती है लेकिन उनको धरातल पर उतारने में शायद इतना वक्त लग जाता है कि लोग अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं।

About News Trust of India

News Trust of India is an eminent news agency

Leave a Reply

Your email address will not be published.

ăn dặm kiểu NhậtResponsive WordPress Themenhà cấp 4 nông thônthời trang trẻ emgiày cao gótshop giày nữdownload wordpress pluginsmẫu biệt thự đẹpepichouseáo sơ mi nữhouse beautiful