बजट का रोना रोने वाली सरकार आधा बजट भी खर्च नहीं कर पाई

उत्तराखंड में तमाम ऐसे विभाग हैं जिनको भूख तो कम लगती है लेकिन वो खाने की ज्यादा मांग करते हैं। त्रिवेंद्र सरकार के बजट आने के बाद ऐसे कई विभाग है जो बजट खर्च करने में फिसड्डी साबित हुए हैं। बजट खर्च करने में नाकाम साबित हो रहे इन विभागों में कई ऐसे विभाग शामिल हैं जिनके दरवाजे पर जनता अपनी मांगों को लेकर जाते-जाते थक जाती है लेकिन विभाग अपने खजाने में मानों ताला लगाकर बैठा है।

विकास कार्य के लिए मिलने वाले इस बजट को लेकर विभाग कितना सुस्त है इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस साल सरकार अपने बजट का 50 फीसदी भी पूरी तरह से खर्च करने में नाकामयाब साबित हुई है। किसी भी विभाग के पास अपने कार्य क्षेत्र में नये प्रयोग करने, नयी तकनीक का इस्तेमाल करने, लोगों का विकास करने से जुड़ा मानों कोई विजन ही नहीं है।

राज्य में बीजेपी की सरकार रही हो या कांग्रेस की, वह बजट को लेकर एक दूसरे पर छींटाकशी करती रही है जबकि हकीकत यह है कि हर सरकार के बजट खर्च करने का औसत 50 से 55 फीसदी ही रहा है। राज्य की सत्ता पर बैठने के बाद त्रिवेंद्र सरकार ने अपने बजट सत्र में 40 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया था लेकिन त्रिवेंद्र सरकार भी जनवरी महीने तक महज 26 करोड़ रुपए ही खर्च कर पाई है।

आंकड़े बताते हैं कि दिसंबर महीने से जनवरी महीने के बीच में सरकार ने महज 3 हजार करोड़ रुपए की राशि खर्च की है। हालांकि, पिछले वित्तीय वर्ष के मुताबिक ये 10 फीसदी अधिक है। आंकड़ों के मुताबिक 40,080,90 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया था जबकि 26,30,6,79 करोड़ रुपये ही जनवरी महीने तक सरकार खर्च कर पाई। सबसे ज्यादा 23,200,09 करोड़ रुपये सरकार ने दिसंबर महीने में खर्च किये हैं जो सबसे अधिक था।

कुछ ऐसे ही विभागों के बारे में जानते हैं जो बजट की मांग करने में तो नंबर वन हैं लेकिन इसे खर्च करने में फिसड्डी-

कृषि विभाग
त्रिवेंद्र सरकार के बजट 2017-2018 में कई ऐसे विभाग हैं जो अपने बजट का आधा हिस्सा तक खर्च नहीं कर पाये हैं। इसमें कृषि विभाग भी शामिल है। इस विभाग के लिए सरकार ने 309.71 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया था जिसमें से सरकार ने 239.03 करोड़ रुपये जारी किये थे। इतना बजट मिलने के बावजूद सुबोध उनियाल के कृषि विभाग ने पूरे साल में मात्र 151.40 रुपये ही खर्च करे। ऐसा ही हाल हर दूसरे विभाग का है।

कृषि अनुसंधान विभाग
कृषि अनुसंधान विभाग के लिए सरकार ने 195.08 करोड़ का प्रावधान किया था जिसमें से सरकार ने विभाग को 175.45 करोड़ रुपये जारी किये। ये विभाग भी पूरा बजट खर्च नहीं कर पाया। 131.54 रुपये ही विभाग ने खर्च किये।

जलागम विभाग
जलागम विभाग के लिए28.79 करोड़ का सरकार ने प्रावधान रखा था, जिसमें से 178.11 करोड़ रुपये आवंटित कर दिए गये थे। इसमें से खर्च किये गए 106.78 खर्च किये |

वन विभाग
वन विभाग के बजट का प्रवधान 682. 65 करोड़ था, जिसमें से इस विभाग को आवंटित हुए 460.62 करोड़ रुपये। लेकिन उत्तराखंड के सबसे बड़े विभागों में शुमार वन विभाग भी पूरा बजट खर्च करने के मामले में फिसड्डी ही साबित हुआ। इस विभाग ने 343.67 करोड़ रुपये खर्च किये हैं।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के लिए सरकार ने 252.93 करोड़ बजट का प्रावधान किया था, जिसमें से 238.61 करोड़ रुपये जारी किए गये। ये विभाग बजट खर्च करने के मामले में सबसे ज्यादा पीछे रहा।  इन्होंने मात्र 31.49 करोड़ रुपये ही खर्च किये।

सहकारिता विभाग
सहकारिता विभाग ने 48.46 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था जिसमें से लगभग 40.84 रुपए विभाग को जारी हुए। लेकिन विभाग केवल 22.17 करोड़ रुपये ही खर्च कर पाई।

ग्राम विकास विभाग
ग्राम विकास विभाग को सरकार ने बजट का प्रावधान 2265.08 करोड़ का रखा था जवकि विभाग को 1526.66 करोड़ दिया गया ये विभाग भी 1143 करोड़ रुपये खर्च कर पाया

राजकीय सिंचाई विभाग
सिंचाई विभाग ने  630.53 बजट का प्रावधान रखा था जबकि इसे मिले 536.70 करोड़ रुपये। इसमें से विभाग ने खर्च किये 420.60 करोड़ रुपये।

लोक निर्माण विभाग
लोक निर्माण विभाग हर राज्य में महत्वपूर्ण विभाग होता है। इस विभाग के लिए 2003.93 करोड़ का प्रावधान रखा गया जिसमें से 1753.75 करोड़ रुपये इस विभाग को मिले। विभाग ने केवल1356.63 करोड़ रुपये ही खर्च किये हैं।

परिवहन विभाग
राज्य में परिवहन विभाग की हालत बेहद खस्ता है बावजूद इसके सरकार ने 62.04 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा जबकि विभाग को राज्य कोष से मात्र 31.76 करोड़ रुपये दिए गए ।इसमें से भी विभाग 12.04 करोड़ रुपये ही खर्च कर पाया।

न्याय विभाग
न्याय विभाग के लिए सरकार ने बजट में लगभग 219 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा था, जिसमें से सरकार ने 200.72 करोड़ रुपये जारी भी कर दिए।इस विभाग ने भी 141.47करोड़ ही खर्च किये।

वित्त जिला योजना विभाग
वित्त जिला योजना विभाग के लिए सरकार ने 500.00 रुपये प्रावधान किया जिसमें से 491.43 करोड़ रुपये जारी भी कर दिये गए थे। लेकिन ये विभाग भी मात्र 230.57 रुपये ही खर्च कर पाया।

आपदा विभाग
राज्य में आपदा विभाग भी इस मामले में फिसड्डी निकला। सरकार ने आपदा के लिए 2026.51 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था, जिसमें से 843.93 रुपये जारी भी कर दिए गये थे, लेकिन विभाग ने मात्र 276.46 रुपये ही खर्च किये। जबकि उत्तराखंड में आये दिन कोई-न-कोई आपदा आ ही जाती है

बता दें कि तमाम विभागों के खर्च से जुड़े आकंड़े 31 दिसम्बर 2017 तक के हैं। ये आंकड़े बता रहे हैं कि कैसे विभागों के पास कोई विजन न होने के कारण पैसे की न केवल बर्बादी हो रही है बल्कि जनता के साथ भी धोखा हो रहा है।

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