सरकार की लापरवाह छवि से परिवर्तन की आश ताकती देवभूमि

देहरादून : उत्तराखंड के अलग राज्य के रूप में वजूद में आने के अठारह साल बाद ही सही, अब राज्य ऐसे मुकाम पर खड़ा है, जहां से देवभूमि की परंपरागत धार्मिक पर्यटन प्रदेश की छवि में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। अब तक राज्य में कहने को तो हर साल करोड़ों पर्यटकों की आमद होती है, लेकिन इनमें पर्यटन के उद्देश्य से आने वालों की संख्या, तीर्थाटन करने वाले श्रद्धालुओं की अपेक्षा काफी कम रहती है। पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने से अब पर्यटन से जुड़ी 22 गतिविधियों को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) नीति के तहत ठीक उसी तरह की सुविधाएं मिलेंगी, जैसी उद्योगों के लिए प्रदान की जाती हैं।

पर्यटन से ही सर्वाधिक उम्मीदें

देश-विदेश में उत्तराखंड की पहचान चार धाम, यानी बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के कारण ही अधिक है। हरिद्वार और ऋषिकेश विश्वभर में तीर्थनगरी और योग कैपिटल के रूप में आध्यात्मिक व धार्मिक पर्यटन के लिहाज से जाने जाते हैं। हालांकि, पहाड़ों की रानी मसूरी और सरोवर नगरी नैनीताल जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बारहों महीने गुलजार रहते हैं, मगर तीर्थाटन से इतर इनके अलावा नैसर्गिक सौंदर्य से भरपूर उत्तराखंड में अब तक कोई अन्य टूरिस्ट डेस्टिनेशन विश्व स्तर पर ख्याति नहीं बटोर पाया। सरकार का फोकस अब राज्य में नए टूरिस्ट डेस्टिनेशन विकसित कर इस ओर पर्यटन और रोमांच के शौकीनों को आकर्षित करने पर है। ‘डेस्टिनेशन उत्तराखंड: इन्वेस्टर्स समिट’ को लेकर सरकार की सर्वाधिक उम्मीदें पर्यटन क्षेत्र पर ही टिकी हैं।

पर्यटन की मुहिम को गति देने के उद्देश्य से प्रारंभ की गई ’13 डिस्ट्रक्ट्स-13 न्यू डेस्टिनेशन’ योजना के तहत सभी जिलों में थीम के आधार पर एक-एक पर्यटक स्थल को विकसित किया जाएगा। इसके लिए थीम का निर्धारण कर दिया गया है, जिसमें आध्यात्म, हिमालय दर्शन, वाटर स्पोट्र्स, जलक्रीड़ा, ईको टूरिज्म मुख्य हैं। स्थलों का निर्धारण हो चुका है और इन स्थलों के सर्वे व फिजिबिलिटी अध्ययन कर विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने को बजट भी निर्गत किया जा चुका है।

उत्तराखंड में 14 साल के लंबे इंतजार के बाद पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है। हालांकि, वर्ष 2004 में यह कवायद हुई थी, मगर शासनादेश तक ही सीमित होकर रह गई। मौजूदा सरकार ने इस पर काम शुरू किया और उद्योग विभाग से विभिन्न पहलुओं पर रिपोर्ट मांगी। इसके बाद पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया। इससे स्पॉ, बंजी जंपिंग, पावर बोट्स, क्याकिंग, जॉय राइडिंग, स्किल गेम पार्क, वाटर स्कीइंग, सर्फिंग, टेंट फॉर कैंपिंग, राफ्टिंग, केबल कार, होटल, रिजॉर्ट, मोटल, आयुष, वेलनेस, कायाकल्प रिसॉर्ट, आयुर्वेद, पंचकर्म, नेचुरोपैथी, यूनानी सिद्धा जैसी पर्यटन से जुड़ी गतिविधियां उद्योग में शामिल हो गईं।

पर्यटन के नए आयाम, यानी साहसिक पर्यटन के लिए सरकार ने अब राह आसान कर दी है। पैराग्लाइडिंग समेत एयरो स्पोर्ट्स की असीम संभावनाओं को देखते हुए पहली बार उत्तराखंड फुट लांच एयरो स्पोर्ट्स, पैराग्लाइडिंग नियमावली तैयार की गई है। जाहिर है कि इससे रोमांच के शौकीनों के लिए उत्तराखंड मुफीद साबित होगा।

प्रदेश में गंगा समेत अन्य नदियों में रिवर राफ्टिंग का लुत्फ अब 65 साल की उम्र तक उठाया जा सकेगा। उत्तराखंड रिवर राफ्टिंग एवं कयाकिंग संशोधित नियमावली में राफ्टिंग के लिए अधिकतम आयु सीमा 65 वर्ष करने का प्रावधान किया गया है। पहले यह आयु सीमा 14 से 60 साल निर्धारित थी। यही नहीं, रिवर राफ्टिंग के लिए सालभर लाइसेंस, राफ्ट में लोगों की संख्या भी निर्धारण समेत अन्य गाइडलाइन भी जारी कर दी गई हैं।

देशी-विदेशी सैलानियों को उत्तराखंड की संस्कृति और परंपराओं से रूबरू कराने वाली होम स्टे योजना धीरे-धीरे मंजिल की तरफ बढ़ रही है। योजना में 2020 तक पांच हजार होम स्टे तैयार किए जाने हैं। योजना के लिए लाभार्थियों को तमाम तरह के करों में छूट का प्रावधान किया गया है। होम स्टे के मुकाम पाने से पर्यटन तो बढ़ेगा ही, यह स्वरोजगार का भी सशक्त माध्यम बनेगी। होम स्टे योजना में स्थानीय लोग अपने आवासीय भवन में ही पर्यटकों के लिए आवासीय व्यवस्था का निर्माण कर सकेंगे। होम स्टे में रहने वाले सैलानियों को परिवार के बीच घर जैसे माहौल में रहने का मौका मिलेगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि राज्य की आर्थिक स्थिति के लिहाज से पर्यटन सर्वाधिक महत्वपूर्ण और संभावनाओं वाला क्षेत्र है। इसलिए इस सेक्टर में ज्यादा से ज्यादा निवेश आकर्षित करना बेहद जरूरी है। यहां भक्ति, योग, धर्म, संस्कृति, आध्यात्म के साथ ही आधुनिक पर्यटन के दृष्टिकोण से एडवेंचर और वाइल्ड सफारी के रोमांच के पर्याप्त अवसर हैं। अब तक उत्तराखंड की पहचान धार्मिक पर्यटन केंद्र की रही है, इसलिए जरूरत इस बात की है कि पर्यटकों को देवभूमि के हर निराले रूप से परिचित कराया जाए।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने बताया कि नई नियमावलियों में रिस्पोंसिबल और सस्टेनेबल टूरज्मि को बढ़ावा देने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखा गया है। यही नहीं, इस क्षेत्र से जुड़े लोगों के आर्थिक हितों को संरक्षित रखने का प्रयास भी किया गया है। अब राज्य में एडवेंचर स्पोट्र्स की गतिविधियां सुचारू रूप से संचालित हो सकेंगी।

 

 

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