उत्तराखंड कार्मिक विभाग के तुगलकी फ़ैसले से हुई किरकिरी

उत्तराखण्ड शासन का कार्मिक विभाग अपने फैसलों से लगातार विवादों में बना हुआ है. विभाग IAS और PCS अफसरों की तैनाती करता है लेकिन पिछले एक साल में विभाग द्वारा जारी तैनाती का शायद ही कोई ऐसा आदेश रहा है जिस पर विवाद न हुआ हो. इससे न सिर्फ त्रिवेन्द्र सरकार पर सवाल उठाए जा रहे हैं बल्कि कार्मिक विभाग के भी परामर्शी विभाग होने पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं.

आइये सिलसिलवार ढ़ंग से देखते हैं कि कार्मिक विभाग ने अफसरों की तैनाती में किस तरह नियमों को किनारे लगा दिया…..

कार्मिक विभाग के 7 विवादित आदेश…

    1. उप सचिव रैंक के मेहनबान बिष्ट और ललित मोहन को अपर सचिव पर तैनाती

सरकार बनने के कुछ ही दिनों बाद कार्मिक विभाग ने पीसीएस अधिकारी मेहरबान सिंह बिष्ट और ललित मोहन रयाल को शासन में अपर सचिव बना दिया. ये दोनों ही अधिकारी उपसचिव रैंक के हैं लेकिन इन्हें दो पायदान ऊपर के पद पर तैनाती दे दी गई. बवाल मचा और नतीजा यह हुआ कि तीन दिन बाद ही आदेश वापस ले लिया गया और दोनों अफसरों को वहीं भेज दिया गया जहां उनकी तैनाती थी. कुछ दिन बाद पहले इन्हें संयुक्त सचिव बनाया गया और फिर से अपर सचिव के पद पर तैनाती दे दी गई.

    1. एक ही बैच के अफसरों को अलग अलग पदों पर तैनाती

ये मसला भी मेहरबान सिंह बिष्ट से जुड़ा है. असल में बिष्ट और दूसरी पीसीएस अफसर दीप्ति सिंह एक ही बैच के अधिकारी हैं लेकिन, दीप्ति सिंह की तैनाती संयुक्त सचिव के पद पर है जबकि कार्मिक विभाग ने बिष्ट को अपर सचिव बना रखा है.

    1. स्वीकृत पदों से ज्यादा संख्या में वित्त सेवा के अफसरों की तैनाती

वित्त सेवा का एक ही अफसर शासन में अपर सचिव के पद पर तैनात हो सकता है और वह भी आय-व्यय नियंत्रक के पद पर. लेकिन, मौजूदा समय में तीन अफसर शासन में तैनात हैं. एलएन पंत, भूपेश तिवारी और अरुणेन्द्र चौहान. स्वीकृत पद एक है जिस पर एलएन पंत तैनात हैं लेकिन कार्मिक विभाग ने एक पद के सापेक्ष दो और अफसरों भूपेश तिवारी और अरुणेन्द्र चौहान को अपर सचिव बना रखा है.

    1. 22 पीसीएस अफसरों का विवादित तबादला आदेश

कुछ हफ्तों पहले कार्मिक विभाग ने 22 पीसीएस अफसरों का तैनाती आदेश जारी किया था. आदेश देखते ही अधिकारियों के होश फाख्ता हो गए क्योंकि इसमें विभाग ने बड़ी गड़बड़ियां कर दी थीं. सीनियर पदों पर रह चुके अफसरों को जूनियर पद पर तैनाती दे दी गई थी. गिरीश चन्द्र गुणवंत ऐसे ही अफसर हैं जो एडीएम के पद पर रह चुके हैं लेकिन, उन्हें एसडीएम पद पर तैनाती दे दी गई. बाद में इस आदेश को वापस लिया गया.

    1. 4 IAS अफसरों को समय से पहले 10 हजार का ग्रेड पे

इस आदेश को लेकर भी कार्मिक विभाग की काफी फजीहत हुई. IAS राधिका झा, नितेश झा, डी सैंथिल पांडियन और शैलेष बगोली को विभाग ने सितम्बर में ही सुपर टाइम स्केल दे दिया यानी दस हजार का ग्रेड पे. केन्द्रीय कार्मिक विभाग के नियमानुसार ऐसा किसी IAS की सोलह साल की सेवा के बाद ही होना चाहिए. लेकिन उत्तराखण्ड के कार्मिक विभाग ने चार महीने पहले ही चारों IAS अफसरों को दस हजार का ग्रेड पे दे दिया.

    1. IAS अफसरों की तैनाती वाली जगह पीसीएस की तैनाती

पिछले लम्बे समय से प्रदेश के कई ऐसे पदों पर पीसीएस अफसरों की तैनाती है जिन पर IAS  की तैनाती होनी चाहिए. खेल, संस्कृति निदेशक और श्रमायुक्त का पद IAS काडर का पद है लेकिन, कार्मिक विभाग ने इनपर पीसीएस अफसरों को तैनात कर रखा है. खेल निदेशक के पद पर तो IPS को तैनाती दी गई है.

  1. प्रमुख सचिव राधा रतूड़ी को अपर मुख्य सचिव बनाने के लिए प्रस्ताव

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