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दिल्ली की ‘खोज बस्ती’ जहां संवारा जाता है गरीब बच्चों का भविष्य

क्या पढ़ाई ही वो अकेला जरिया है जो बच्चों को आगे बढ़ने, ज़िंदगी में कुछ नया करने का मौका देती है। शायद नहीं, क्योंकि पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों के लिये जरूरी है उन छोटी-छोटी बातों को जानना जो उनकी जिंदगी से जुड़ी होती हैं और वो पढ़ाई नहीं जाती। यही वजह है कि दिल्ली में कुछ युवा बच्चों को ना केवल पढ़ाई में अव्वल बना रहे हैं बल्कि उनके अंदर छुपी प्रतिभाओं को बाहर निकालने की भी कोशिश कर रहे हैं। इसके लिये इन युवाओं ने अपनी मुहिम को नाम दिया है ‘खोज बस्ती’ (Khoj Basti)। इसके जरिये ये युवा राजधानी दिल्ली के तुगलकाबाद (Tughlaqabad, Delhi) इलाके में गरीब बच्चों का भविष्य सवांरने की कोशिश कर रहे हैं।

24 साल के सुयश गुप्ता (Suyash Gupta) फरीदाबाद (Faridabad) के रहने वाले हैं, साल 2014 में उन्होने जयुपर के लक्ष्मी निवास मित्तल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी​ से इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। करीब दो साल टेक महिन्द्रा कंपनी में काम करने के बाद उन्होने सामाजिक क्षेत्र में काम करने का फैसला लिया। इसकी वजह थी कि बचपन से ही वो शिक्षा के क्षेत्र में काम करना चाहते थे। इसके बाद 2016 में उन्होने ‘टीच फॉर इंडिया’ फैलोशिप (Teach for India fellowship के लिये आवेदन किया। जिसके बाद वो दिल्ली के तुगलकबाद (Tughlaqabad, Delhi) में गवर्नमेंट गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल​ में 9वीं के बच्चों को साइंस और गणित पढ़ा रहे हैं। इस दौरान वो बच्चों को पढ़ाने के अलावा उनको नैतिक ज्ञान, खेलकूद और दूसरी गतिविधियां भी सिखाते हैं। जिससे उनका संपूर्ण विकास हो।

76 लड़कियों की क्लास में सुयश की कोशिश रहती है कि वो इन लड़कियों को इस तरह पढ़ायें ताकि उनके अंदर पढ़ने की जिज्ञासा हमेशा बनी रहे। इसके लिए वो किसी पाठ को समझाने के लिये ऑडियो वीडियो या पीपीटी की मदद लेते हैं। क्लास में लड़कियों की संख्या ज्यादा होने के कारण उन्होने 5-5 लड़कियों का एक ग्रुप बनाया  है और हर ग्रुप में एक लड़की को टीम का मेंटर बनाया गया है।  वो बच्चों को सरल तरीके से पढ़ाने में विश्वास करते हैं।। उन्होने न्यूज़ ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया को बताया

बच्चों को कम्पाउंड और सींपल इंटरेस्ट समझाने के लिए मैंने उनको बैटल ऑफ बैंक (Battle of Banks) खिलवाया। इस दौरान कुछ बच्चों को बैंकर बनाकर उनको समझाया कि वो कैसे दूसरे बच्चों को ब्याज पर पैसे देंगे। इसके लिए मैंने नकली नोटों का इस्तेमाल किया। इस तरह बच्चे आसानी से समझ गये कि उनको मासिक और बार्षिक ब्याज किस तरह से निकालना है।

सुयश और उनके कुछ साथी वैशाली राय, निकिता विंदल और अलका कक्कड़ जो फैलो टीम के सदस्य भी हैं इस स्कूल में पढ़ाने के अलावा तुगलकाबाद रेलवे कॉलोनी  के पास प्रहलादपुर में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों  के साथ काम कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट को उन्होने नाम दिया है ‘खोज बस्ती’ (Khoj Basti)। इस प्रोजेक्ट का आइडिया सुयश की पूर्व फैलो रागिन, रिदिमा और जयवीर को आया था, क्योंकि उनका मानना था कि स्कूल के समय में वो अपना ज्यादा वक्त बच्चों की पढ़ाई को देते हैं। इसलिए दूसरी गतिविधि सीखाने के उद्देश्य से उनको कोई दूसरा प्रोजेक्ट शुरू करना चाहिए। आज खोज बस्ती की टीम इस प्रोजेक्ट को पिछले एक साल से चला रहे हैं। पिछले एक साल के दौरान उन्होने क्राउड फंडिंग के जरिये पैसा जुटाकर एक बड़ी जगह ली है और इस पैसे का इस्तेमाल उन्होने डिजिटल शिक्षा के तहत कम्प्यूटर लैब और लाइब्रेरी बनाने में किया है।

इस समय उनकी लैब में 5 कम्प्यटूर हैं और जल्द ही उनको गुड़गांव के एक शख्स 15 लैपटॉप दान में देने वाले हैं। इसके अलावा इस समय उनकी लाइब्रेरी में 200 से ज्यादा किताबें हैं। ‘खोज बस्ती’ (Khoj Basti) में इस समय 200 बच्चों को अलग अलग तरह की कई गतिविधियां सिखाई जाती है। जैसे कम्प्यूटर, पोएट्री, आर्ट एंड क्राफ्ट, पेंटिंग, डांस, ड्रामा, थियेटर आदि। इन सभी गतिविधियों को टीच फॉर इंडिया के फैलो और कुछ दूसरे कॉलेजो के वालंटियर सिखाते हैं। इस प्रोजेक्ट के साथ उनके कई दूसरे प्रोजेक्ट जैसे प्रयोगशाला, रियाज, खेल खेल में भी चल रहे हैं। ‘खोज बस्ती’ (Khoj Basti) में शुक्रवार को कविता की क्लास, शनिवार को डांस, मंगलवार को म्यूजिक की क्लास चलती हैं और बाकि दिन बच्चों को पढ़ाने का काम किया जाता है। ‘खोज बस्ती’ में बच्चों की लीडरशिप के गुण पर काफी ध्यान दिया जाता है। यही वजह है कि यहां के बच्चे दूसरी गतिविधियों के साथ कविताएं भी काफी बेहतर तरीके से सुनाते हैं। यही वजह है कि ‘खोज बस्ती’ (Khoj Basti) से जुड़ी दो लड़कियां ज्योति सिंह चौहान और नंदा ने हाल ही में सीरी फोर्ट में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के ‘टेड टॉक’ (TED talk) में कविता पाठ किया था। जिसे वहां मौजूद पत्रकारों और दूसरे लोगों ने काफी पसंद किया था। जल्द ही खोज बस्ती टीम की योजना ‘टीच फॉर ग्रीन’ प्रोजेक्ट शुरू करने की है। जिसके जरिये बच्चों को निरंतर विकास (Sustainable Development) के बारे में बताया जाएगा।

suyash gupta and his team with khoj basti children

ये टीम ‘रियाज प्रोजेक्ट’ के जरिये बच्चों को गीत संगीत और डांस सिखाने का काम करती है। इसके जरिये बच्चों को बताया जाता है कि कैसे वो अपने भावों और विचारों को व्यक्त कर सकते हैं। पिछले 6 महीने से दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन कर रहीं श्रेया बंसल इन बच्चों को डांस सीखा रही है। श्रेया के सीखाये बच्चों ने हाल ही में दिल्ली के सीरी फोर्ट में अपनी डांस प्रस्तुति भी दी है। वहीं प्रोजेक्ट ‘प्रयोगशाला’ में बच्चों को साइंस की मदद से कैसे नई-नई चीजें बनाई जा सकती हैं ये बताया जाता है। स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियों के दौरान खोज बस्ती की टीम ने 10-10 दिन के दो समर कैंप आयोजित किये। पहले समर कैंप में 40 बच्चों ने हिस्सा लिया था इसमें शामिल बच्चे कई सरकारी स्कूल के थे। इस दौरान बच्चों ने पब्लिक स्पिकिंग, आर्ट एन्ड क्राफ्ट, डांस और थियेटर सीखा। जबकि दूसरे कैंप में केवल ‘खोज बस्ती’ (Khoj Basti) के बच्चे को रोबोटिक कार और सर्किट बनाना सीखाया गया। अगले एक साल तक सुयश और खोज बस्ती की टीम बच्चों के साथ हैं ऐसे में उनकी कोशिश है कि ये बच्चे अच्छे तरीके से कम्पयूटर सीख जायें। साथ ही अगले साल इन स्कूली बच्चों की बोर्ड परीक्षाएं होंगी। इसलिए वो उनकी पढ़ाई पर पहले से और ज्यादा ध्यान देने की कोशिश कर रहे हैं जिससे उन बच्चों का बेहतर रिजल्ट आये।​

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