पद्मावती’ पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि आखिर बिना फिल्म देखे जिम्मेदार पद पर बैठे लोग इसको लेकर बयान क्यों दे रहे हैं? कोर्ट ने कहा कि जिम्मेदार पदों और पब्लिक ऑफिस में बैठे लोगों की बयानबाजी फिल्म को लेकर बंद हो, क्योंकि ये सेंसर बोर्ड के दिमाग में पक्षपात पैदा करेगा.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक महीने में तीसरी बार फिल्‍म पद्मावती पर रोक लगाए जाने वाली याचिका को खारिज कर दिया है. इतना ही नहीं कोर्ट ने मुख्‍यमंत्रियों और अन्‍य को भी फटकार लगाई है जो बिना फिल्‍म देखे उसके बारे में बयान दे रहे हैं. कोर्ट ने कहा है कि सार्वजनिक कार्यालयों में बैठे लोगों को ऐसे मुद्दों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि आखिर बिना फिल्म देखे जिम्मेदार पद पर बैठे लोग इसको लेकर बयान क्यों दे रहे हैं? कोर्ट ने कहा कि जिम्मेदार पदों और पब्लिक ऑफिस में बैठे लोगों की बयानबाजी फिल्म को लेकर बंद हो, क्योंकि ये सेंसर बोर्ड के दिमाग में पक्षपात पैदा करेगा.कोर्ट ने कहा कि अगर कोई ऐसा करता है तो वो कानून के राज्य के सिद्धांत का उल्लंघन करेगा. इन लोगों को ये बात दिमाग में रखनी चाहिए कि हम कानून के राज्य के तहत शासित होते हैं. जब सीबीएफसी के पास मामला लंबित हो तो जिम्मेदार लोगों को कोई टिप्पणी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि सेंसर बोर्ड विधान के तहत काम करता है और कोई उसे नहीं बता सकता कि कैसे काम करना है. हमें उम्मीद है कि सब संबंधित लोग कानून का पालन करेंगे.

वहीं निर्माता की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए वरिष्‍ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा कि वो देश से बाहर फिल्म को रिलीज नहीं कर रहे क्योंकि इससे फिल्म को नुकसान होगा. कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया है.

गौरतलब है कि इस मामले में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि यदि ऐतिहासिक तथ्यों के साथ खिलवाड़ कर चित्तौड़ की महारानी रानी पद्मावती के सम्मान के खिलाफ इस फिल्म में दृश्य रखे गये तो इसे मध्यप्रदेश में प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जायेगी.

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा था कि बिना जरूरी बदलावों के पद्मावती राजस्थान में रिलीज नहीं हो सकती. उन्‍होंने कहा था कि मैंने पहले ही इतिहासकारों और राजपूत समाज के लोगों को फिल्म दिखाए जाने का सुझाव दिया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. कानून व्यवस्था बनाए रखना राज्य की पहली जिम्मेदारी है.

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने बुधवार को कहा था कि ‘गुजरात सरकार राजपूतों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली फिल्म ‘पद्मावती’ को राज्य में रिलीज की अनुमति नहीं दे सकती. हम अपने इतिहास के साथ छेड़छाड़ की इजाजत नहीं दे सकते. हम वाक और अभिव्यक्ति की आजादी में विश्वास रखते हैं, मगर हमारी महान संस्कृति के साथ किसी भी तरह का गलत खिलवाड़  बर्दाश्त नहीं किया जाता है.’

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट से फिल्म की विदेश में रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई थी. इस याचिका में वकील एम एल शर्मा ने फिल्म की एक दिसंबर को देश के बाहर रिलीज होने पर रोक लगाने की मांग की थी. उनका कहना था कि फिल्म के निर्माता ने कोर्ट को गुमराह किया है. याचिका में आरोप लगाया गया था कि पद्मावती फिल्म में ऐतिहासिक चरित्र रानी पद्मावती के चरित्र को खराब और बदनाम करने की कोशिश की गई. अगर फिल्म पर रोक नहीं लगाई गई तो न भरपाई होने वाला नुकसान होगा.