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गरीबी के थपेड़ो ने शामली के नवीन को कैसे बनाया अमेरिका में अरबपति

(नीरज त्यागी, न्यूज़ ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया)

एक व्यक्ति, जिसका न खाने का ठिकाना था, न रहने का। उसके परिवार के पास कोई ऐसा घर नहीं था, जिसे अपना कहा जा सके। वह व्यक्ति आज चांद को जीतने चला है। सचमुच। नवीन जैन की कंपनी मून एक्सप्रेस ने चांद पर खुदाई करके गोल्ड, प्लेटिनम, कोबाल्ट जैसे मटेरियल धरती पर लाने की प्लानिंग की है। उन्हें अमेरिकन स्पेस एजेंसी नासा का कॉन्ट्रैक्ट भी मिला है। जानिए, अमेरिका के सबसे सफल भारतीय लोगों में गिने जाने वाले नवीन जैन की कहानी। उनकी कहानी में भूख, गरीबी, स्ट्रगल, कामयाबी, ठोकर, गिरना, संभलना, फिर उठ खड़ा होना, सबकुछ शामिल है…

नवीन जैन का जन्म 6 सितंबर, 1959 को यूपी के एक गांव में हुआ था। उनके जीवन का शुरुआती दौर बेहद अभावों में बीता। गरीबी के बावजूद नवीन और उनके भाई-बहनों ने ऊंची शिक्षा पाई। खुद नवीन ने आईआईटी और एमबीए किया है, उनकी बहन ने मैथेमैटिक्स में पोस्ट डॉक्टोरल स्टडीज की है और भाई स्टैटिस्टिक्स व कंप्यूटर साइंस में पीएचडी है।

-नवीन ने बचपन की गरीबी को पीछे छोड़कर हजारों करोड़ रुपए की दौलत कमाई और अपने बिजनेस को रातोंरात डूबते भी देखा है। इसके बावजूद वे बार-बार कामयाब हुए हैं। नवीन के पिता पीडब्ल्यूडी में काम करते थे। वे ईमानदार थे और रिश्वत नहीं लेते थे। इसके चलते दूसरे कर्मचारियों को करप्शन में दिक्कत होती थी। नवीन के पिता की ईमानदारी के कारण उनके बॉस भी नाराज रहते थे। इसके चलते नवीन के पिता का बार-बार ट्रांसफर होता रहता था। कई बार तो साल में दो बार तक उनका ट्रांसफर होता, वह भी दूर-दराज के इलाकों में। इसके चलते उनका कभी कोई घर ऐसा नहीं रहा, जिसे अपना कह सकें। परिवार को बेहद अभावों में जीना पड़ता। कभी खाने को होता, कभी नहीं भी होता। नवीन की शुरुआती शिक्षा ऐसे स्कूलों में हुई, जहां कुर्सी-टेबल तक नहीं होते थे।

तंगहाली के बावजूद नवीन के पिता ने अपने तीनों बच्चों की एजुकेशन पर कोई असर नहीं पड़ने दिया। नवीन आईआईटी रुड़की के ग्रेजुएट हैं। 1983 में उन्हें बिजनेस एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत अमेरिका जाने का मौका मिला। उनका सारा इंतजाम तो कंपनी ने किया था, पर नवीन के पास खुद के खर्च के लिए पैसे नहीं थे। वे कहते हैं कि वे जेब में 5 डॉलर लेकर अमेरिका गए थे। अमेरिका में उन्होंने सिलिकॉन वैली के कई स्टार्टअप्स में काम किया। फिर 1989 में माइक्रोसॉफ्ट से जुड़ गए। माइक्रोसॉफ्ट में वे 1996 तक रहे।
-1996 में जब डॉट कॉम का दौर शुरू हुआ, तो नवीन ने माइक्रोसॉफ्ट छोड़ दी। उन्होंने इन्फोस्पेस नामक कंपनी बनाई। तब इसमें 6 कर्मचारी थे। उनमें से ज्यादातर माइक्रोसॉफ्ट के ही पूर्व कर्मचारी थे। यह कंपनी ईमेल और टेलीफोन डायरेक्टरीज डेवलप करती थी। इन्फोस्पेस मोबाइल पर सारी इन्फॉर्मेशन उपलब्ध कराती थी। उस जमाने में यह नई बात थी। नवीन ने शुरुआत में ही पहचान लिया था कि डॉट कॉम में खूब पैसा आने वाला है। उनकी कंपनी बहुत तेजी से बढ़ी। सन् 2000 में जब यह पीक पर थी, तो इसकी वैल्यू 2,350 अरब रुपए के बराबर आंकी गई थी।

नवीन की नेटवर्थ 8 अरब डॉलर, यानी आज के करीब 54 हजार करोड़ रुपयों के बराबर आंकी गई थी। उन्होंने महंगे घर और याट खरीदना शुरू कर दिया था। लेकिन सन् 2000 में डॉट कॉम का बुलबुला फूट गया। इंटरनेट आधरित कंपनियां धड़ाधड़ डूबने लगीं। मार्च 2000 में नवीन जैन की कंपनी के शेयर 138 डॉलर से गिरकर डेढ़ डॉलर पर आ गए। शेयर होल्डर्स ने उन पर मुकदमा भी कर दिया। आरोप लगाया गया कि उन्होंने शेयर होल्डर्स से सूचनाएं छिपाई थीं। हालांकि ऐसा कोई आरोप साबित नहीं हुआ।

सन् 2002 की बात है, नवीन रिटायर होने के बारे में सोचने लगे। वे सारा काम छोड़ देना चाहते थे। ऐसे विचार एक सप्ताह तक उनके दिमाग में घूमते रहे। फिर कुछ दोस्तों को इकट्ठा करके उन्होंने जनवरी, 2003 में इंटेलियस नामक कंपनी बनाई। इंटेलियस इन्फॉर्मेशन सर्विस थी। लोग सोचते थे कि इंटरनेट पर सूचनाएं मुफ्त होती हैं, लेकिन नवीन की कंपनी ने इसके लिए बाकायदा शुल्क लिया। वह कंपनी सॉल्युशन मुहैया कराती थी। बाद में, 2015 में उन्होंने कंपनी बेच दी। वे अब इसके सीईओ हैं। फिलहाल कंपनी के 2 करोड़ कस्टमर हैं।

2010 में नवीन जैन ने कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर मून एक्सप्रेस नामक कंपनी शुरू की थी। इसके जरिए उन्होंने चंद्रमा पर साइंटिफिक इंस्ट्रुमेंट्स, लोगों की तस्वीरें और अन्य निजी चीजें भेजने की योजना बनाई है। नवीन चांद पर खुदाई का प्लान भी रखते हैं। वे वहां से खुदाई कर गोल्ड, प्लेटिनम, कोबाल्ट हीलियम-3 जैसे तत्व धरती पर लाना चाहते हैं। उनकी कंपनी को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का कॉन्ट्रैक्ट भी मिला है।

नवीन जैन की गिनती सर्वाधिक कामयाब भारतवंशी अमेरिकियों में होती है। वे दान और सामाजिक गतिविधियों में भी आगे हैं। उनकी शादी 1988 में हुई थी। उनका परिवार अमेरिका के सिएटल में रहता है, जिसमें उनकी पत्नी अनु और तीन बच्चे- अंकुर, प्रियंका और नील शामिल हैं। अंकुर और प्रियंका भी सोशल आंत्रप्रेन्योर हैं। नवीन कई सम्मानों से नवाजे जा चुके हैं। 2011 में उन्हें लाइट ऑफ इंडिया बिजनेस लीडरशिप अवॉर्ड मिला था।

नवीन की नेटवर्थ 8 अरब डॉलर, यानी आज के करीब 54 हजार करोड़ रुपयों के बराबर आंकी गई थी। उन्होंने महंगे घर और याट खरीदना शुरू कर दिया था। लेकिन सन् 2000 में डॉट कॉम का बुलबुला फूट गया। इंटरनेट आधरित कंपनियां धड़ाधड़ डूबने लगीं। मार्च 2000 में नवीन जैन की कंपनी के शेयर 138 डॉलर से गिरकर डेढ़ डॉलर पर आ गए। शेयर होल्डर्स ने उन पर मुकदमा भी कर दिया। आरोप लगाया गया कि उन्होंने शेयर होल्डर्स से सूचनाएं छिपाई थीं। हालांकि ऐसा कोई आरोप साबित नहीं हुआ।

सन् 2002 की बात है, नवीन रिटायर होने के बारे में सोचने लगे। वे सारा काम छोड़ देना चाहते थे। ऐसे विचार एक सप्ताह तक उनके दिमाग में घूमते रहे। फिर कुछ दोस्तों को इकट्ठा करके उन्होंने जनवरी, 2003 में इंटेलियस नामक कंपनी बनाई। इंटेलियस इन्फॉर्मेशन सर्विस थी। लोग सोचते थे कि इंटरनेट पर सूचनाएं मुफ्त होती हैं, लेकिन नवीन की कंपनी ने इसके लिए बाकायदा शुल्क लिया। वह कंपनी सॉल्युशन मुहैया कराती थी। बाद में, 2015 में उन्होंने कंपनी बेच दी। वे अब इसके सीईओ हैं। फिलहाल कंपनी के 2 करोड़ कस्टमर हैं।

2010 में नवीन जैन ने कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर मून एक्सप्रेस नामक कंपनी शुरू की थी। इसके जरिए उन्होंने चंद्रमा पर साइंटिफिक इंस्ट्रुमेंट्स, लोगों की तस्वीरें और अन्य निजी चीजें भेजने की योजना बनाई है। नवीन चांद पर खुदाई का प्लान भी रखते हैं। वे वहां से खुदाई कर गोल्ड, प्लेटिनम, कोबाल्ट हीलियम-3 जैसे तत्व धरती पर लाना चाहते हैं। उनकी कंपनी को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का कॉन्ट्रैक्ट भी मिला है।

नवीन जैन की गिनती सर्वाधिक कामयाब भारतवंशी अमेरिकियों में होती है। वे दान और सामाजिक गतिविधियों में भी आगे हैं। उनकी शादी 1988 में हुई थी। उनका परिवार अमेरिका के सिएटल में रहता है, जिसमें उनकी पत्नी अनु और तीन बच्चे- अंकुर, प्रियंका और नील शामिल हैं। अंकुर और प्रियंका भी सोशल आंत्रप्रेन्योर हैं। नवीन कई सम्मानों से नवाजे जा चुके हैं। 2011 में उन्हें लाइट ऑफ इंडिया बिजनेस लीडरशिप अवॉर्ड मिला था।

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