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nti-news-Soundararajan Bangarusamy who made 5500 crore suguna foods business empire

10वी पास गांव के लड़के ने कैसे बनाई 5500 करोड़ की कंपनी

जिनमे अकेले बढ़ने के हौसले होते हैं, उन्हीं लोगों के पीछे पूरे काफिले होते हैं। जीवन में यदि कुछ हासिल करना है तो उसके लिए जरूरी नहीं है कि आपके पास कोई बड़े संस्थान
की डिग्री हो। कुछ बड़ा करने के लिए जरूरी होता है केवल एक बड़ा विचार और उस विचार को हक़ीक़त में बदलने के लिए की गयी मेहनत। इस बात का जीता जागता उदाहरण हैं  बी. सौन्दर्राजराजन । ये वो शख्स हैं जो अपने जज़्बे सोच और मेहनत के बल पर आज 5500 करोड़ की एक नामी कंपनी के मालिक हैं। सौन्दर्राजराजन ने कॉलेज के दर्शन तक नहीं किये है न तो उनके पास कोई बड़ी डिग्री है बल्कि उन्हें तो विपरीत परिस्थितियों के कारण कक्षा ग्यारहवीं से ही अपनी शिक्षा को अलविदा कहना पड़ा था।

लेकिन उन्होंने अपने कुछ कर गुजरने के जज़्बे को कभी कम नहीं होने दिया। आज की तारीख में सौन्दर्राजराजन की कंपनी *सुगुना फूड्स* भारत के पॉल्ट्री उद्योग का एक ऐसा नाम है जो सफलता के नित नए आयामों को छू रहा है। आज सौन्दर्राजराजन इतने सक्षम हैं कि वे अपनी कंपनी में पढ़े लिखे डिग्रीधारी रोजगार की तलाश में भटकते नौजवानों को रोजगार देने में समर्थ हैं और साथ ही दूसरी ओर भारत के लगभग 18 राज्यों के 9,000 गाँवों के 23,000 किसान उनकी कंपनी से जुड़कर अपनी आजीविका चला रहे हैं।

सफलता का पूर्व निर्धारण नहीं किया जा सकता। सफलता क्रमिक और संघर्षों के परिणाम पर आधारित होती है। सुगुना फूड्स के निदेशक बी. सौन्दर्राजराजन की सफलता भी कुछ इसी प्रकार की है। उनका जन्म कोयंबटूर से 70 किलोमीटर दूर एक छोटे से गांव में हुआ। पिता सरकारी माध्यमिक स्कूल में एक अध्यापक के पद पर कार्यरत थे, साथ ही उनके पास कुछ खेती योग्य जमीन भी थी जहाँ खेती करना आवश्यक था। ऐसे में एक बार उनके पिता ने उन्हें बुलाया और कहा की वे11वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दे। सौन्दर्राजराजन ने पिता की बात को शिरोधार्य किया और 11वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी।

“मेरे पिता चाहते थे कि मैं स्वयं अपने लिए अपने आप कुछ करूँ, मुझे ज्ञात हो की संघर्ष क्या होता है। क्योंकि उनका मानना था कि अगर मैं कॉलेज की पढ़ाई पूरी करता हूँ तो
उसके बाद मुझे बहुत समय नौकरी तलाश करने में गुज़र जाएगा। और यदि नौकरी मिल गयी तो स्वयं कुछ दिखाने की सोच पर विराम लग जाएगा।“

शुरुआत में उन्होंने अपने खेतों में लगभग 2 लाख रू की राशि लगाकर तीन सालों तक सब्जियों की खेती का कार्य किया। खेती में सफलता प्राप्त नहीं होने पर कोयंबटूर में एक फर्नीचर बनाने वाली कंपनी में 1 साल तक फर्नीचर बनाने का काम किया। उस काम में भी मन नहीं लगा। उसके बाद उन्होंने हैदराबाद का रुख़ किया और एक एग्रीकल्चर पंप कंपनी में मार्केटिंग का काम करने लगे। सौन्दर्राजराजन अपने शुरूआती दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि “उस समय मुझे ना तो तेलुगु आती थी और ना ही अंग्रेजी लेकिन फिर भी मैंने पूरे हैदराबाद में पम्प बेचने का काम किया।”

इस तरह हैदराबाद में काम करते हुए उन्हें मार्केटिंग एवं एकाउंटिंग का अनुभव भी मिला। लेकिन दुर्भाग्यवश कुछ समय बाद उस कंपनी में हड़ताल हो गयी जिस कारण कंपनी ग्राहकों की मांग पूरी करने में समर्थ नहीं थी और यही कारण था जिसने सौन्दर्राजराजन की रूचि नौकरी के प्रति खत्म कर दी और उन्होंने नौकरी छोड़ दी। जब नौकरी में रूचि ही नहीं रही तो उन्होंने अपने गाँव जाना ही बेहतर समझा और गाँव आकर साल 1984 में अपने छोटे भाई जी. बी. सौन्दर्राजराजन के साथ मिलकर महज 5000 रु की छोटी सी रकम से पॉल्ट्री व्यवसाय में कदम रखा।

तब शायद उन्हें इस बात का इल्म भी नहीं था कि वही 5000 रू की के छोटे से निवेश से शुरू हुआ पॉल्ट्री व्यवसाय लगभग 30 साल बाद 5500 करोड़ रु से अधिक के एक बहुत बड़े व्यवसाय का रूप ले लेगा। साल 1986 में उन्होंने अपने छोटे बिज़नेस को पॉल्ट्री फॉर्म में परिवर्तित किया और फिर कुछ समय बाद 1990 में दोनों भाइयों ने मिलकर कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की शुरुआत की। साल 1997 में पहली बार उनकी छोटी सी कंपनी का टर्नओवर लगभग 7 करोड़ रु पर पहुँच गया। इसी 7 करोड़ के टर्नओवर ने कंपनी के मालिक बी. सौन्दर्राजराजन का मार्गप्रशस्त किया और उन्हें अपने बिज़नेस को पूरे तमिलनाडु में फैलाने के लिए प्रोत्साहित किया| साथ ही अब उन्हें यह एहसास होने लगा था कि अपने व्यापार को गति देने के लिए तकनीक से जोड़ना आवश्यक है। इस उद्देश्य से व्यापार में तकनीकी और व्यवसायिकता का भी समायोजन किया जाने लगा। जिसका सुखद परिणाम भी साल 2000 आते प्राप्त होने लगा केवल 3 सालों में ही कंपनी का सालाना टर्नओवर 100 करोड़ तक पहुँच गया।

इससे उत्साहित होकर सौन्दर्राजराजन ने साल 2000 के बाद अपनी कंपनी के व्यवसाय को पड़ोसी राज्यों कर्नाटक, आंध्र प्रदेश में वहां की राज्य सरकारों की मदद से प्रसारित करने का कार्य किया। राज्य सरकारों की मदद मिलने का मुख्य कारण था कम्पनी का कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग प्रारूप जिससे किसानों को आर्थिक लाभ पहुँचाया जा सके। इससे उनकी आर्थिक समस्याओं का समाधान किया जा सकता था। कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग का अर्थ कृषि सम्बन्धी उत्पादों के लिए खरीदने वाले और उत्पादन करने वाले के बीच एग्रीमेंट होने की क्रिया से संबंधित है।

पहले उनकी कंपनी हर 45 दिनों के बाद किसानों से चिकन खरीद कर उन्हें बाज़ार में बेच दिया करती थी। उत्पादन के वक़्त उन किसानों को 50 पैसे प्रति किलो के हिसाब से दिए जाते थे। लेकिन अब समय बदल चुका है और अब पांच रूपये प्रति किलो के हिसाब से दिए जाते है। आज के समय में 5000 मुर्गियों के फार्म को स्थापित करने में लगभग 6 लाख रूपये का खर्च आ सकता है और कांटेक्ट फार्मिंग प्रारूप के हिसाब से इस राशि को तीन सालों में वसूल भी किया जा सकता है। उनकी कंपनी सुगुना फूड्स कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के अलावा पॉल्ट्री फीड, दवाइयाँ और फ्रोज़न फ़ूड का व्यवसाय भी करने लगी है। अब तक के अपने 31 सालों के सफर में यह कंपनी हर साल प्रगति के पथ पर बढ़ रही है और यही कारण है कि ब्रायलर मुर्गी के उत्पादन में यह कंपनी भारत में प्रथम स्थान रखती है। इसके साथ ही विश्वस्तरीय पॉल्ट्री इंडस्ट्री में सुगुना फूड्स कंपनी टॉप 10 में अपनी जगह बनाने में कामयाब रही है।

अब तक इस व्यवसाय में लगभग 10 करोड़ स्क्वायर फ़ीट जगह का उपयोग हुआ है और इनकी एक हफ्ते की उत्पादन क्षमता लगभग 80 लाख चिकन तक पहुँच चुकी है। आज सुगुना फूड्स की भारत में लगभग 250 शाखाएं हैं जो तकनीक से जुड़ी हुई है। साथ ही 5500 लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रही है। सौन्दर्राजराजन कहते हैं कि “किसानो की आर्थिक स्थिति में अप्रत्याशित सुधार हुआ है। अब उनके पास अपनी बेटी की शादी और बच्चों की पढाई के लिए पर्याप्त पैसे हैं जो हमें बहुत अधिक संतुष्टि प्रदान करता है।” उनकी कंपनी ने बांग्लादेश में अपनी सहायक कंपनी शुरू की है और वर्तमान में वे मिडिल ईस्ट देशों ईरान, अफगानिस्तान इत्यादि में मुख्य रूप से निर्यातक का कार्य कर रहे है। सौन्दर्राजराजन ने अपनी सफलता की ईमारत मेहनत और रूचि के बल पर खड़ी की है।

बी. सौन्दर्राजराजन आज एक प्रेरणास्त्रोत है उन लोगों के लिए जो अपने विचारों को हक़ीक़त की दुनिया में आजमाना चाहते हैं अपने दम पर अपनी पहचान बनाना चाहते हैं।

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