हौसले और हुनर ने बदली उत्तराखंड की नीलम की किस्‍मत

रुद्रपुर  : कम पढ़ी-लिखी होने के बाद भी नीलम आज सफल महिला के तौर पर पहचान बना चुकी हैं। वह स्वरोजगार हासिल करने के साथ ही क्षेत्र की लगभग 50 अन्य महिलाओं को भी कमाई का साधन दे रही हैं। ऐसे में उनके काम को तेजी से पहचान मिल रही है। आज आनलाइन बाजार से भी उनको आर्डर मिल रहे हैं।

जिले के खटीमा क्षेत्र में बनकटिया गांव में 38 साल की नीलम की ससुराल है। लेकिन गांव से बाहर निकल उन्होंने ग्रामीण विकास विभाग की पहल पर काम सीखना शुरू कर दिया। सिर्फ इंटरमीडिएट तक पढ़ी महिला ने बांस व एलइडी से नया फ्यूजन तैयार किया। इसमें घड़ी से लेकर विभिन्न प्रकार के सजावटी सामान शामिल हैं। इन उत्पादों की कीमत बाजार में 500 से लेकर कई हजार रुपये तक है। काम में शुरुआती सफलता मिलने के बाद पति दिगंबर सिंह ने भी सहयोग किया।

नीलम ने बताया कि साल 2013 में काम शुरू करने के लिए उन्होंने ऊर्जा मित्र स्वयं सहायता समूह बनाया। शुरुआत में इससे 10 महिलाएं जुड़ीं। बाद में कारवां जुड़ता गया और आज 50 से ज्यादा महिलाएं उनके साथ जुड़कर रोजगार प्राप्त कर रही हैं। ग्रामीण विकास के ब्लाॅक मिशन मैनेजर शुभंकर शुक्ला ने बताया कि वर्तमान में वह लगभग 80 हजार रुपये प्रतिमाह की कमाई कर रही हैं।

अमेजन डॉट कॉम ने बढ़ाया हौसला

नीलम बांस के विभिन्न सामान के साथ ही एलइडी बल्ब का निर्माण भी स्वयं करती हैं। बैंबो बेस्ड उत्पाद के साथ ही वह फैंसी पंखे व विभिन्न प्रकार की ड्रेस भी बनाती हैं। नीलम ने बताया कि अमेजन डॉट कॉम से आर्डर मिलने के बाद उनके हौसलों को पंख लगे।

नीलम की सफलता से सीख रहीं महिलाएं

हिमांशु जोशी, परियोजना निदेशक, डीआरडीए, रुद्रपुर ने बताया कि नीलम ने स्वरोजगार हासिल करने के साथ ही अन्य महिलाओं के लिए भी उदाहरण प्रस्तुत किया है। विभिन्न कार्यक्रमों में उन्हें ट्रेनर के तौर पर बुलाया जाता है। महिलाएं उनके काम व सफलता से सीख रही हैं।

 

 

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