दुर्गा पूजा में सेक्स वर्कर पकाएंगी ज़ायकेदार खाना

कोलकाता के रेड लाइट एरिया सोनागाची इलाके में रह रही कई सेक्स वर्कर के लिए ये दुर्गा पूजा खास है. मुख्यधारा में लौटने की कोशिश में लगीं यह सेक्स वर्कर अपने हाथों से पकाए खाने के स्वाद से लोगों का दिल जीतने की तैयारी कर रही हैं. इस दुर्गा पूजा पर ये शेफ की जिम्मेदारी निभाती नजर आएंगी.

मुश्किल हालात में रह रहीं सेक्स वर्कर की जिंदगी में ये बदलाव लाने की कोशिश दरबार महिला समन्वय कमेटी नाम का एनजीओ कर रहा है. इसके लिए एनजीओ ने स्टेट फिशरीज डेवलपमेंट कॉरपोरेशन से बात की है. इसके तहत कॉरपोरेशन एनजीओ से रजिस्टर्ड सेक्स वर्कर को खाना बनाने की ट्रेनिंग दे रहा है.

आपको बता दें कि इससे पहले भी एक बार दुर्गा पूजा के दौरान ये सेक्स वर्कर खबरों में आ चुकी हैं. 2013 में जब इन्होंने दुर्गा पूजा मनाने की बात की थी तो काफी दिनों तक सुर्ख‍ियों में रही थीं. हालांकि प्रशासन को यह बात रास नहीं आई थी और इस वजह से उन्हें दुर्गा पूजा उत्सव बंद करना पड़ा था.

वहीं ये सेक्स-वर्कर अब कोलकाता और बैंगलोर के दुर्गा पूजा पंडाल में खाने के पैविलियन संभालेंगी. पश्चिम बंगाल मत्स्यपालन विभाग (डीएमएससी) ने इसके लिए राजी हो चुके वर्करों को ट्रेनिंग दी है. ट्रेनिंग के बाद लगभग 30 सेक्स वर्करों को शेफ कैप मिला है. इन सेक्स वर्कर को केवल खाना बनाना ही नहीं, बल्कि फिश प्रोसेसिंग की बारीकियां भी सिखाईं जाएंगी. इन सभी को गोविंद दास नामक व्यक्ति से ट्रेनिंग मिल रही है. गोविंद उन्हें बता रहे हैं कि सप्लाई के लिए कैसे विभिन्न मछलियों को काटा जाए.

आपको बता दें कि दुर्गा पूजा के दौरान फिशरीज बोर्ड कोलकाता के अलग-अलग हिस्सों में आठ फूड स्टॉल लगाता है. वहीं दो फूट स्टॉल बैंगलुरू में भी लगाए जाते हैं.ऐसे में लोगों को बंगाली खाने का स्वाद चखाने के लिए उन्हें कुक की जरूरत होती है. ऐसे में सेक्स वर्कर को ट्रेनिंग देने से उन्हें भी फायदा होगा.

फिश प्रोसेसिंग में यह बताया जाएगा कि इसमें जिंदा मछली को कैसे संभालना है, वहीं मछली से बने उत्पादों की पैकेजिंग के भी गुर सिखाए जाएंगे. एनजीओ और फिशरीज बोर्ड की इस पहल से सेक्स वर्कर भी खुश हैं और वो भी बंगाली खाना बनाने की ट्रेनिंग लेने को लेकर काफी उत्साहित हैं. इससे उन महिलाओं को इस दलदल से बाहर निकलने का मौका मिलेगा. खासतौर पर अपने बच्चों के लिए, जिन्हें समाज बुरी नजर से देखता है.

 इससे विभाग को भी फायदा होगा, क्योंकि फिशरीज बोर्ड के पास अलग-अलग फूड चेन,ग्रॉसरी शॉप्स और सुपर मार्केट की तरफ से मछलियों से बने अलग-अलग उत्पादों की काफी डिमांड आती है. ऐसे में ट्रेनिंग के जरिए सेक्स वर्कर को तो अच्छा रोजगार मिलेगा ही वहीं विभाग को भी अपना बिजनेस बढ़ाने में मदद मिलेगी.

यह मिल रहा है फायदा

सेक्स वर्कस को फिश प्रोसेसिंग का काम करने के लिए 10-20 रुपये प्रति किलो के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है. विभाग ने तो वैसे हजार रुपये प्रति दिन के हिसाब से उन्हें सैलरी देने की बात कही है. हालांकि अभी उन्हें सिर्फ रोज 150 रुपये का भुगतान किया जा रहा है. साथ में 50 रुपये यात्रा खर्च और खाना‍ मिल रहा है. एक अखबार के मुताबिक सेक्स वर्कर ने कहा कि मैं फिश प्रोसेसिंग का काम सुनकर काफी खुश हुई थी, मुझे ऐसी जगह जॉब मिल रही है, जहां मुझे छिप कर जाने की जरूरत नहीं पड़ती.

यह काफी नहीं

वहीं सेक्स वर्कर और डीएमएससी संस्था के बीच की मध्यस्थ कविता विश्वास ने कहा कि स्टाइपेंड से काम नहीं चलेगा. उनके अनुसार कुछ लड़कियों को मानना है कि यह काफी कम है. दुर्गा पूजा के दौरान कोई भी थोड़ा ज्यादा कमाना चाहता है. उन्हें काफी दूर से यहां आना पड़ता है, ऐसे में यह सैलरी काफी नहीं है. कई इस मुहिम में शामिल होना चाहती हैं, लेकिन कम सैलरी की वजह उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है. इन लड़कियों को बोनस देने की बात भी नहीं हुई है. ऐसे में कई और लड़कियों ने कहा कि वह आना चाहती हैं, लेकिन पूजा खत्म होने के बाद. वहीं डीएमएससी के चीफ एडवाइजर समरजीत जेना ने कहा कि उन्होंने विभाग से बात की है, ट्रेनिंग खत्म होने के बाद लड़कियों को ज्यादा सैलरी मिलेगी.

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