मध्य प्रदेश में बीजेपी को सता रहा वोटर्स खोने का डर?

भोपाल : पिछले दिनों एक तस्वीर ने मध्य प्रदेश के राजनीतिक गलियारे में नई चर्चाओं को जन्म दिया। यह तस्वीर थी सीएम शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा की मुलाकात की। 22 सितंबर को यह मुलाकात इस लिहाज से चर्चा का केंद्र बनी क्योंकि लक्ष्मीकांत शर्मा व्यापम के मुख्य आरोपियों में से एक हैं। इसके बाद बीजेपी नेता अनूप मिश्रा और राकेश चतुर्वेदी भी शिवराज से मिले। एमपी के पॉलिटिकल सर्किल में इन मुलाकातों से एक यह भी संकेत गया है कि बीजेपी एमपी की राजनीति में हाशिए पर गए ब्राह्मण वोटर्स तक फिर पहुंच बनाने की कोशिश में है।

एमपी में इस बार के विधानसभा चुनावों में 15 साल के दौरान का सबसे कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। ऐसे में बीजेपी की इन कोशिशों की व्याख्या सपाक्स (SPAKS) इफेक्ट के रूप में भी की जा रही है। 2018 के इस विधानसभा चुनावों में एक बार फिर बीजेपी के ब्राह्मण नेताओं का महत्व बढ़ता दिख रहा है। लक्ष्मीकांत शर्मा को पिछले 2 सालों से पार्टी के प्रमुख कार्यों से दूर रहते हुए देखा गया है और सीएम शिवराज ने खुद को भी उनसे अलग रखा था।

आपको बता दें कि व्यापम आरोपी के रूप में पूर्व मंत्री शर्मा को कुछ दिन जेल में भी बिताने पड़े थे। ऊपर जिन दो अन्य नेताओं का जिक्र है उनमें से राकेश चतुर्वेदी कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए हैं, जबकि अनूप मिश्रा मुरैना से सांसद हैं। बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक दोनों को ही पार्टी ने अबतक भुला रखा था लेकिन सपाक्स समाज दल के उभरने ने अचानक से एमपी के राजनीतिक कैनवास को बदल कर रख दिया है।

क्या है सपाक्स समाज दल?
सपाक्स यानी सामान्य, पिछड़ावर्ग अल्पसंख्यक कल्याण समाज नामक सरकारी कर्मचारियों के संगठन ने एमपी में नई पार्टी बनाई है। इसी पार्टी का नाम है सपाक्स समाज दल। एससी-एसटी ऐक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के बाद एमपी में हुए सवर्ण आंदोलनों के पीछे यही संगठन था। सपाक्स लंबे समय से सवर्ण और गैर आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों के लिए संघर्ष कर रहा है।

अब जबकि सपाक्स समाज पार्टी ने एमपी की सभी 230 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है तो अचानक बीजेपी सवर्ण वोटर्स को लुभाने में जुट गई है। इसकी एक मिसाल तब भी देखने को मिली जब मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू होने से महज दो दिन पहले शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के 52000 पुजारियों को मिलने वाले मानदेय में 300 फीसदी इजाफे की घोषणा की।

क्या बीजेपी की यह कवायद पर्याप्त है?
सपाक्स समाज पार्टी के अध्यक्ष हीरालाल त्रिवेदी की मानें तो बीजेपी की यह कवायद पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि इससे कोई बदलाव नहीं होने जा रहा है। त्रिवेदी ने कहा कि हमारा मुख्य मुद्दा एससी-एसटी प्रोटेक्शन ऐक्ट में संशोधन नहीं करने और रिजर्वेशन में प्रमोशन है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें 64 फीसदी लोगों का समर्थन है। उनके मुताबिक सामान्य (ब्राह्मण, ठाकुर सहित सामान्य जातियां), पिछड़ा और अल्पसंख्यक सपाक्स के साथ हैं। त्रिवेदी तो सरकार बनाने का भी दावा कर रहे हैं।

सपाक्स ने पिछले महीने उज्जैन में ब्राह्मणों की एक रैली का आयोजन किया। इस रैली के बाद ही बीजेपी चिंतित नजर आ रही है। हालांकि सपाक्स ने बीजेपी के अलावा कांग्रेस को भी चौंका दिया है और दोनों राजनीतिक दलों के समीकरण को गड़बड़ भी किया है। इसके बावजूद बीजेपी इस नए राजनीतिक दल से निपटने में ज्यादा सक्रिय नजर आ रही है। इसके पीछे शायद एक वजह यह भी है कि बीजेपी को नुकसान की आशंका ज्यादा है क्योंकि एमपी में ब्राह्मण पारंपरिक रूप से उसका वोट बैंक माना जाता रहा है।

 

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