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दुनिया का सबसे ऊंचा शिवालय तुंगनाथ खतरे में

दुनिया के सबसे ऊंचे शिवधाम, तुंगनाथ मंदिर पर दिनों दिन खतरा बढ़ने लगा है. भगवान के द्वार को इंसानी लापरवाही ने इस कदर कमजोर कर दिया है कि समय रहते इसे सुधारा न गया तो मंदिर के अस्तित्व पर ही संकट आ सकता है. पंच-केदारों में एक तुंगनाथ मंदिर अपने विशेष महत्व के लिए जाना जाता है. माना जाता है कि करीब एक हज़ार साल पहले पाण्डवों ने इस मंदिर को बनाया था, समुद्र तल से 3,680 मीटर की ऊंचाई पर बना ये मंदिर कई पौराणिक कथाओं से जुड़ा है.

मान्यताओं के मुताबिक भगवान शिव की भुजाएं इस स्थल पर विद्यमान है. तुंगनाथ मंदिर के इसी महत्व के चलते हर साल हजारों श्रदालु भोले के द्वार पहुंचते हैं. हैरत की बात यह है कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र तुंगनाथ मंदिर अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहा है. हालत ये है कि मंदिर के कई हिस्सों में दरारें आने लगी हैं. न केवल बाहरी हिस्से बल्कि गर्भगृह में भी पानी आने से समस्या आने लगी है. मंदिर का फर्श और कुण्ड भी बदहाल होने लगा है.

मंदिर के ये हालात एएसआई ने स्थलीय निरीक्षण में देखे हैं. एएसआई (आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इण्डिया) इस पर रिपोर्ट तैयार की है जिसमें इसकी स्थिति को बयां किया गया है. एएसआई के अधिकारियों का कहना है कि पर्यटन विभाग ने भी एएसआई की टीम के साथ निरीक्षण कर मौके पर खराब स्थिति को देखा है. लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि पर्यटन विभाग मंदिर के इन हालातों से अनजान बना हुआ है जबकि मंदिर की पूरी जिम्मेदारी पर्यटन विभाग के पास ही है.

पर्यटन सचिव ने तुंगनाथ को लेकर कोई जानकारी होने से ही इनकार कर दिया. सचिव पर्यटन मीनाक्षी सुन्दरम की मानें तो जिलाधिकारी को भी इसकी जानकारी नहीं है. वह पर्यटन विभाग के तुंगनाथ मंदिर के निरीक्षण कोई निरीक्षण किया है. अब सवाल यह है कि कौन सच कह रहा है एएसआई या पर्यटन सचिव? इससे भी बड़ा सवाल यह है कि अरबों हिंदुओं की आस्था के केंद्र तुंगनाथ की ओर कोई ध्यान देगा भी या नहीं?

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