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देश में खुदरा महंगाई दर बढ़ी, लेकिन उत्तर प्रदेश में घटी

पूरे देश में खुदरा महंगाई दर में बढ़ोतरी दर्ज की गयी. हालांकि उत्तर प्रदेश में खुदरा महंगाई दर में कमी आयी है.

सांख्यिकी मंत्रालय के ताजा आंकड़े बताते हैं कि मार्च के महीने के दौरान उत्तर प्रदेश में खुदरा महंगाई दर 2.63 फीसदी दर्ज की गयी, वहीं फरवरी में ये दर 2.72 फीसदी थी. पूरे देश में खुदरा महंगाई दर के आंकलन में उत्तर प्रदेश 12.37 फीसदी के भार के साथ महाराष्ट्र के बाद दूसरे स्थान पर है. चूंकि महराष्ट्र (13.18 फीसदी भार) में महंगाई दर बढकर 4 फीसदी के पार चली गयी, साथ ही कुछ और राज्यों में महंगाई दर बढ़ी. इसी का नतीजा ये रहा है कि पूरे देश की खुदरा महंगाई दर मार्च के महीने में 3.65 फीसदी से बढ़कर 3.81 फीसदी हो गयी.

दिलचस्प बात ये है कि राष्ट्रीय स्तर पर खाने-पीने की चीजों के धाम घटे हैं. इसी वजह से खाने पीने की चीजों की खुदरा महंगाई दर मार्च के महीने में 2.01 फीसदी से घटकर 1.93 फीसदी पर आ गयी. बहरहाल, चिंता का विषय ये है कि चीनी और कनफेक्शनरी के दाम पर लगाम के कोई संकेत नहीं दिख रहे. मार्च के महीने में इनकी खुदरा महंगाई दर 17 फीसदी रही. दूसरी ओर लंबे समय तक सिरदर्द रहे दाल के कीमतों में गिरावट का सिलसिला जारी है और इनकी खुदरा महंगाई दर मार्च के महीने मे (-) 12.42 फीसदी रही.

इस बीच, राहत की बात ये रही है कि राष्ट्रीय स्तर पर खुदरा महंगाई दर रिजर्व बैंक के अनुमानों के मुताबिक 4 फीसदी के करीब है. हालांकि इसके बावजूद हाल-फिलहाल नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट (वो दर जिसपर रिजर्व बैंक, व्यावसायिक बैंकों को बहुत ही थोड़े समय के लिए कर्ज मुहैया कराता है) में किसी तरह के कमी के आसार नहीं. रिजर्व बैंक का अनुमान है कि पहली अप्रैल से शुरु हुए नए कारोबारी साल यानी 2017-18 के दौरान पहली छमाही (अप्रैल-सितम्बर) में खुदरा महंगाई दर साढ़े चार फीसदी और दूसरी छमाही (अक्टूबर-मार्च) के दौरान पांच फीसदी रह सकती है.

उद्योग का हाल
उधर, उद्योग के मोर्चे पर अच्छी खबर नहीं है. फरवरी के महीने में औद्योगिक विकास दर बढ़ने के बजाए घट गयी और ये (-)1.2 फीसदी दर्ज की गयी. जनवरी में औद्योगिक विकास दर 3.2 फीसदी थी.

औद्योगिक विकास दर में गिरावट के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर था जिसकी विकास दर (-) 2 फीसदी थी. अलग-अलग क्षेत्रों की बात करें तो चीनी, सीमेंट और पान मसाला के उत्पादन में कमी आय़ी. यही नहीं टीवी, फ्रिज, कार जैसे कंज्यूमर ड्युरेबल्स का उत्पादन (-)0.9 फीसदी दर्ज की गयी. आम तौर पर फरवरी के महीने में टैक्स अदायगी की वजह से उपभोक्ता सामान की बिक्री सुस्त रहती थी. शायद इसी वजह से कंज्यूमर ड्युरेबल्स में गिरावट दर्ज की गयी.

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