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सिर्फ कागजों पर बनेगा डिजिटल भारत !

बांदा. कागजों और भाषणों में सरकारी डिजिटल भारत आपने देखा होगा लेकिन डिजिटल भारत, डिजिटल शौचालय और पिछले तीन साल से स्वच्छता अभियान के तहत हाथ में झाड़ू पकडे कर्णधारों के इस सपने की हकीकत क्या है? ये जमीन पर देखने को मिल ही जाती है। सियासी वादों, दावों और दिखाए जा रहे सपनो की असलियत देखने को मिलती है चित्रकूटधाम मंडल मुख्यालय बांदा के बिसण्डा ब्लॉक के ग्राम पंचायत शाहपुर सानी में। जहां सरकारी शौचालय तो दूर, नालियां और सड़क तक नहीं हैं। शौच के लिए खेत ही यहां पर बाशिंदो के लिए डिजिटल शौचालय हैं।
नहीं मिला योजनाओं का लाभ
बांदा के बिसण्डा ब्लॉक के ग्राम पंचायत शाहपुर सानी का हाल कुछ ऐसा ही है। जहां आज भी मूलभूत सुविधाएं नदारद हैं। यहां सड़के नहीं हैं। पानी निकलने के लिए नालियां नहीं हैं। न ही रहने के लिए कॉलोनी मिली है और न ही शौचालय। स्वच्छता मिशन अभी तक यहा पहुंचा ही नहीं है। यहां के गरीब मजदूर तबके के सैकड़ो लोग आज भी शौच के लिए खेत और जंगल में जाने को मजबूर हैं। बरसात में जलभराव से इनका जीवन मुश्किल हो जाता है और बच्चे स्कूल तक नहीं जा पाते। इस गांव में सैकड़ों परिवार रहते हैं, जिनका कहना है की हमे सरकार की किसी भी योजना का लाभ आज तक नहीं मिला है।
शौच के लिए जातें हैं खेत
ग्रामीणों का कहना है की उनके गांव में शौचालय नहीं है। जिससे उनको और उनके परिवार की महिलाओ को शौच के लिए खुले में खेत में जाना पड़ता है। कभी-कभी तो खेत मालिकों द्वारा उन्हें भगा दिया जाता है। हमारे पास पैसा भी तो नहीं है कि हम घर में शौचालय बनवा सकें। अब बताइये साहब हम कहां जाएं। इनका कहना है की हमें कॉलोनिया भी नहीं दी गई हैं। जब हम ग्राम प्रधान और सचिव से कॉलोनी के लिए कहते हैं, तो उनके द्वारा पैसा मांगा जाता है। अब बताओ हम पैसा कहा से लाएं। अपनी समस्याओं के लिए ग्राम प्रधान से लेकर जिलाधिकारी तक कई बार गुहार लगा चुके हैं। लेकिन आज तक कोई इस गांव में झांकने तक नहीं आया। यहां नेता सिर्फ चुनाव के समय ही वोट मांगने आते हैं और फिर पांच साल तक उनके दर्शन गांव में नहीं होते।
कैसे बनेगा डिजिटल भारत
यहां आज भी ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। वहीं सरकार प्रत्येक गांव में शौचालय बनवाने का दावा कर रही है। इससे तो यही अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों के विकास का पैसा उन तक नहीं पहुंच रहा है। पैसो का बंदरबाट बीच में ही कर ली जाती है। जिससे गांव आज भी बदहाली की कगार पर हैं। बांदा के बिसंडा क्षेत्र के इस गांव की बदहाली को लेकर फिलहाल कोई भी जिम्मेदार मुंह खोलने को तैयार नहीं है। लेकिन पीएम मोदी के स्वच्छता मिशन और डिजिटल व यूपी सरकार के गढ्ढा मुक्त सड़को के दावों की असलियत जरूर इस गांव में देखी जा सकती है। अब देखना ये होगा कि इस व्यवस्था के दम पर कैसे डिजिटल भारत बन सकेगा।

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