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राघव ने कैसे जुटाए दो मिलियन यूएस डॉलर

फंड जुटाने के अपने अनोखे तरीके से किया कईयों को प्रभावित …व्यवहारिक दृष्टिकोण से मिली नायाब कामयाबी …कामयाबी के मन्त्र को सार्वजानिक करने का इरादा भी रखते हैं राघव …

क्या आप यकीन करेंगे कि कोई व्यक्ति जिसके पास नया बिजनेस खड़ा करने का कोई प्लान न हो, फिर भी वह निवेशकों से मिलकर दो मिलियन यूएस डॉलर जुटा सकता है? और क्या यह बात आपको हैरान नहीं करती? जी हां, लेकिन यह सच है। राघव केके ने ऐसा कर दिखाया जिस वजह से वे पिछले दिनों खूब चर्चा में भी रहे। राघव इसे कैसे मुमकिन कर पाए आइए जानते हैं।

पूंजी जुटाने के लिए राघव के सामने दो विकल्प थे। पहला पुराना फॉमुला था जिसे लगभग हर कोई अपनाता है। और दूसरा रास्ता नया था जिस पर चलने की हिम्मत कम ही लोग जुटा पाते हैं। पुराने तरीके में जहां आपको पहले एक पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन बनाना होता है और उसके बाद आपको इंजेल निवेशकों से मिलने की प्लानिंग करनी होती है। और उसके बाद आपको १५ से २० मिनट का समय अपनी बात समझाने के लिए दिया जाता है। अगर उस दौरान आपकी प्रस्तुति निवेशक को पसंद आती है तो भी आपको कई और सवालों के जवाब देने होंगे। फिर कई तरह की टर्मस एण्ड कंडीशन्स भी आपके सामने होंगी। इस पूरी प्रक्रिया में लंबा समय लगता है। कई बार समय महीनों से साल तक भी पहुंच जाता है।

राघव बताते हैं कि वे इस लंबी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे इसलिए उन्होंने दूसरा रास्ता अपनाया। इसके लिए राघव ने वीसी इंवेस्टर्स से मिलने का समय मांगा और गुजारिश की कि वे तीस मिनट राघव का इंटरव्यू लें। इंटरव्यू के दौरान राघव ने ही उनसे प्रश्न किए कि कैसे वे उनकी इस बिजनेस के लिए मदद कर सकते हैं। राघव ने महसूस किया कि इन इंटरव्यू के माध्यम से वह केवल पैसा ही नहीं जुटा रहे बल्कि सफल उद्योगपतियों से सफलता के टिप्स भी ले रहे हैं। राघव बताते हैं कि उसके बाद उन्होंने एक टर्मशीट बनाई और सभी संभावित इंवेस्टर से मिले। लगभग तीस इंवेस्टर्स से मिलने का लक्ष्य बनाया गया और इसके लिए राघव ने खुद को दस दिन का समय दिया। इन निवेशकों में से कई निवेशक ऐसे थे जो राघव और उनके काम करने के तरीके से वाकिफ थे। जो वाकिफ नहीं थे उनका भरोसा राघव ने अपने दोस्तों की मदद से जीत लिया।

कैसे संभव हुआ

पूंजी जुटाने के लिए राघव ने किसी ऐंजिल लिस्ट का उपयोग नहीं किया। इसके बजाय राघव ने सिलिकॉन वैली में अपने एक दोस्त को फोन किया और उनके घर में कुछ दिनों रहने की इजाजत मांगी। साथ ही उनकी कार भी इस्तेमाल की। इस दौरान राघव की पत्नी नेत्रा जोकि कंपनी की सहसंस्थापक और सीओओ हैं उन्होंने अपने घर न्यूयॉक से ही लोगों से बैठकों के लिए बुकिंग करनी शुरु की। और इस तरह राघव की लगभग पांच मीटिंग हुईं। कई लोग जो राघव के आइडिया से प्रभावित नहीं हुए उनसे राघव ने आग्रह किया कि कृपया उन लोगों के बारे में बताएं जो इस तरह के प्रोजेक्ट में निवेश कर सकते हैं। निरंतर प्रयत्न करके राघव ने दो मिलियन यूएस डॉलर कम समय में ही जुटा लिए। राघव से मिलने के बाद और उनकी पूरी कहानी सुनने के बाद साफ है कि उनका व्यवहारिक दृष्टिकोण ही उनकी सफलता की मुख्य वजह है। बेशक कुछ निवेशक राघव को जानते थे लेकिन राघव अपना भरोसा इसलिए भी जमा पाए क्योंकि उनका ट्रैक रिकॉर्ड काफी अच्छा था। साथ ही वे बहुत ज्यादा मेहनती और काम को लेकर जुनून की हद तक समर्पित व्यक्ति हैं। यही उनकी सफलता का राज है। अपनी सफलता के मंत्र व अनुभव राघव केके जल्द ही हमारे साथ शेयर करने वाले हैं।

 

 

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