प्राइवेट हॉस्पिटल के डॉक्टर्स बने कसाई

हमारे देश में पूरी चिकित्सा व्यवस्था ही ध्वस्त हुई पड़ी है। चारो तरफ जंगल राज है। चिकित्सा का पेशा अब कदापि सेवा का माध्यम नहीं रहा। अनेक चिकित्सक सफेद लबादे में गरीबों का खून चूसने में जुटे रहते हैं। पैसे ऐंठने के लिए मरीजों के साथ सबसे ज्यादा जोर-जबर्दस्ती उन कारपोरेट अस्पतालों में हो रही है, जो चमक-दमक का तनोवा तान कर लूटपाट में लगे हुए हैं।

गुड़गांव के फोर्टिस अस्पताल में सात साल की बच्‍ची की डेंगू से मौत के बाद 16 लाख रुपए देने पर ही शव ले जाने देने जैसा वाकया कोई नया नहीं हैं। वह जमाना कोई और रहा होगा, जब डॉक्टरों को धरती के भगवान का दर्जा प्राप्त था। अब तो अस्पताल सरकारी हो या प्राइवेट, हर जगह मनमानी का बोलबाला है। दिल्ली के द्वारका में रहने वाले जयंत सिंह सात साल की आद्या के पिता एवं आइटिशियन हैं। वह बताते हैं कि आद्या को डेंगू होने पर हमने 30 अगस्त को उसे गुड़गांव के फोर्टिस हॉस्पिटल में भर्ती कराया। वहां 15 दिन इलाज के बदले 16 लाख का बिल चुकाने के लिए कहा गया। जब वह डॉक्टरों से बातचीत के बाद 14 सितंबर को आद्या को घर ले जाना चाहते थे, उसी दिन उसकी मौत हो गई। अब अस्पताल वाले कह रहे हैं कि पहले 16 लाख जमा करो, फिर बच्ची की लाश ले जाओ। उनका कहना है कि बेटी के इलाज में वह नाते-रिश्तेदारों के पहले से लाखों के कर्जदार हो चुके हैं। अब 16 लाख और कहां ले आएं।

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