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बंदी की कगार पर पहुंची नाट्य अकादमी

सांस्कृतिक नगरी अल्मोड़ा की उदयशंकर नाट्य अकादमी परिसर में आवासीय विश्वविद्यालय खोलने के सरकारी आदेश का विरोध शुरू हो गया है। संस्कृतिकर्मियों के साथ आम लोग भी विरोध में आगे आ रहे हैं

सांस्कूतिक नगरी अल्मोड़ा में रंगकर्मी उदयशंकर के नाम पर बने नाट्य अकादमी परिसर में आवासीय विश्वविद्यालय खोलने की सरकारी मंशा ने संस्कूतिकर्मियों को भड़का दिया है। जनपद के सभी संस्कूतिकर्मियों ने इसके विरोध में व्यापक आंदोलन करने की चेतावनी दी है। इस मुद्दे पर नगर के सामाजिक, राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ ही जनता ने भी सुर में सुर मिलाए हैं। स्थानीय जनता भी नहीं चाहती है कि उदयशंकर नाट्य अकादमी के बदले यहां आवासीय विश्वविद्यालय खुले। वह इस नाट्य अकादमी को अपनी पहचान के रूप में देख रही है। जनता का कहना है कि रंगकर्मी उदयशंकर ने अल्मोड़ा का नाम रोशन किया है उनके नाम पर बने नाट्य अकादमी परिसर को दूसरे मकसद से हस्तांतरित नहीं किया जा सकता।

अगर सरकार को विश्वविद्यालय बनाना ही है तो वह दूसरी जगह जमीन तलाशे। फिलहाल प्रदेश शासन ने इस भवन को अल्मोड़ा में खुलने जा रहे आवासीय विश्वविद्यालय को सौंपने का आदेश दे तो दे दिया है। लेकिन अभी भवन का हस्तांतरण नहीं हुआ है और संस्कूतिकर्मी किसी भी हालत में हस्तांतरण को रोकना चाहते हैं। सरकार पर दबाव बनाने के लिए कई दौर की बैठकों के बाद अब आंदोलन की रणनीति भी बन चुकी है। इस सरकारी आदेश के बाद मशहूर रंगकर्मी उदयशंकर के नाम से बने इस राष्ट्रीय नाट्य अकादमी का अस्तित्व खतरे में आ गया है।

अल्मोड़ा नगर से ७ किमी दूर फलसीमा में स्थित राष्ट्रीय स्तर की इस नृत्य अकादमी परिसर में अगर आवासीय विश्वविद्यालय संचालित होता है तो फिर शायद ही कभी यहां संगीत के सुर सुनाई दें. पिछले १६ साल से संस्कूतिकर्मियों के साथ ही जनता ने जो सपना देखा था उसकी भी अकाल मृत्यु हो जाएगी। इस विषय पर संस्कूतिकर्मियों का कहना है कि अगर आवासीय विश्वविद्यालय ही खोलना था तो फिर एकेडमी के नाम पर इतना खर्च क्यों किया गया और सालों तक जनता को बेवकूफ क्यों बनाया जाता रहा. संस्कूतिकर्मियों ने दो टूक कहा है कि नाट्य अकादमी के बदले उन्हें दूसरी चीज मंजूर नहीं है। वह इसके खिलाफ किसी भी हद तक जा सकते हैं। रंगकर्मियों के विरोध को जिस तरह जनसमर्थन मिल रहा है वह स्थानीय विधायक एवं सरकार के समक्ष एक नई समस्या खड़ी कर सकता है। बीते दिनों  कुमाऊं लोक कलाकार महासंगठन ने बैठक कर आंदोलन की चेतावनी दी है। संगठन के लोगों का कहना था कि एक दशक पूर्व तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने इस नाट्य अकादमी का शिलान्यास किया था।

नृत्य सम्राट उदयशंकर के रंगकर्म के क्षेत्र में किए गए कार्यों पर शोध कार्य भी होता लेकिन सरकार इसके उलट अकादमी का अस्तित्व ही खत्म करने में लगी है। पूर्व में भी अकादमी के उद्देश्यों के विरुद्ध यहां नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन एंड टेक्नालॉजी की कक्षाएं शुरू करने की तैयारी हुई थी] इसका भी जमकर विरोध हुआ था।  इस केंद्र की खासियत यह रही है कि यह हमेशा दूसरी ही वजहों से चर्चा में रहा है। उल्लेखनीय है कि वर्ष १९३८ में उदय शंकर जब अल्मोड़ा आए तो उन्होंने यहां केंद्र बनाने का निश्चय किया और फिर विख्यात वैज्ञानिक बोसी सेन एवं स्वर्गीय श्याम लाल शाह के सहयोग से अल्मोड़ा के रानीधरा में उदयशंकर अंतराष्ट्रीय कला केंद्र की स्थापना हुई।

इस केंद्र से मशहूर फिल्म निर्देशक स्वर्गीय गुरूदत्त ने भी शिक्षा ग्रहण की थी। मशहूर कवि सुमित्रानंदन पंत इस केंद्र के सलाहकार रहे। बाद के वर्षों में उदय शंकर की पत्नी अलमा शेखर के प्रयासों से २००१ में तत्कालीन केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कूति मंत्री जगमोहन ने इस केंद्र को स्वीकूति प्रदान की। भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने २००२ में इस केंद्र की नींव रखी। उसके बाद पहले तो संस्कूत मंत्रालय की काम करने की कछुवा गति के चलते अकादमी का भवन बनने में वर्र्षों लग गए। इसमें देश-विदेश के संगीत प्रेमियों के लिए एक संग्रहालय भी स्थापित होना था इसको लेकर भी वर्षों तक टालमटोली होती रही। इस केंद्र के भवन निर्माण के कार्य को  २००८ में पूरा हो जाना था। लेकिन २०१४ तक तो इसका काम पूरा नहीं हो पाया। ५५० सीट का ऑडिटोरियम बनने में ही वर्षों लग गए।  खैर कछुवा गति से ही सही भवन निर्माण का कार्य पूरा हुआ तो कांगे्रस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गरूड़ाबाज में आयोजित राज्योत्सव में इस नाट्य अकादमी का लोकापर्ण भी कर दिया। तब लगा था कि अब यह केंद्र रंगकर्म को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा और देश-विदेश के मशहूर रंगकर्मी यहां आएंगे। स्थानीय लोक कला और संस्कूति का भी संबंर्धन होगा लेकिन यहां पर संगीत और नाट्य अकादमी की शुरुआत करने के बजाय विश्वविद्यालय को सौंपने से संगीत प्रेमी आहत हैं और इसे सरकार का बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण कदम मानते हैं।

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