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पुलिसकर्मियों को बांटे प्लास्टिक के चावल !

छत्तीसगढ़ में सरकारी पीडीएस की दुकानों में चाइनीज प्लास्टिक चावल बांटने का मामला सामने आया है. मुख्यमंत्री रमन सिंह के गृह नगर राजनांदगांव में भी प्लास्टिक के चावल खिलाए जाने का मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि यह चावल उन पुलिसकर्मियों को दिया गया है, जो कि कृषि मेले में तैनात थे. आरोप है कि सुरक्षा में लगे पुलिसकर्मियों को दिए गए प्राकृतिक चावल में प्लास्टिक का चावल भी मिक्स था.

राज्य के खाद्य विभाग ने इन चावल के सैम्पल कलेक्ट किए हैं और फिलहाल इस रिपोर्ट का इंतजार है. वहीं मिलावटखोरों की ओर सरकार का ध्यान दिलाने के लिए प्लास्टिक चावल को लेकर महिला पुलिस कर्मियों ने अपनी पहचान छुपाते हुए एक वीडियो भी तैयार किया है. इस वीडियो में महिला पुलिसकर्मियों ने सरकारी चावल सप्लाई की कलई खोल कर रख दी है.

खाने के पैकेट में आए चावल को खाने के बजाय कुछ महिला पुलिसकर्मियों ने उसकी गेंद बना ली, जिससे कि पुलिस के अधिकारियों को सच्चाई पता सके. यह पहला मौका नहीं है, जब पुलिस कर्मियों को प्लास्टिक का चावल परोसा गया है. कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं, लेकिन अनुशासन के डंडे के डर से पुलिसकर्मियों ने अपना मुंह नहीं खोला और वो इस तरह के वीडियो बना कर हकीकत ब्यान कर रहे हैं.

दुर्ग रेंज के आईजी दीपांशु काबरा के मुताबिक इस मामले को लेकर शिकायत प्राप्त हुई है और खाद्य विभाग ने सैम्पल भी लिए हैं. लेकिन अभी रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है. उनका यह भी कहना है कि पुलिस ने अपने स्तर पर यह जांच पड़ताल शुरू की है. छत्तीसगढ़ का पीडीएस सिस्टम राज्य की पहचान बन चुका है, लेकिन अब सरकारी राशन दुकानों से मुहैया होने वाले दुकानों से चाइनीज मेड चावल से लोगों का जायका बिगड़ गया है.

जांजगीर चांपा, बस्तर, कांकेर, महासमुंद और धमतरी जिले में हजारों लोगों ने पीडीएस की दुकानों में मिलावटखोरी को लेकर सरकारी सिस्टम पर सवालियां निशान लगाया है. रमन सिंह सरकार की सार्वजनिक खाद्यान वितरण प्रणाली के तहत यह चावल राशन की दुकानों के जरिए आम लोगों की रसोई तक पंहुचा है. राज्य सरकार एक रुपये और दो रूपए प्रति किलो की दर से 25 किलो से लेकर 35 किलो तक चावल हर माह राज्य के गरीब और कमजोर आय वर्ग के लोगों तक चावल पीडीएस के जरिए आम जनता तक पहुंचती है.

 सरकारी अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि प्लास्टिक का यह चावल स्वास्थ के लिए हानिकारक है. ऐसे में ये सवाल उठ रहा है कि आखिर कैसे और क्यों पीडीएस सिस्टम जनता के लिए जानलेवा साबित हो रहा है. राज्य में गरीबी रेखा से नीचे 10 फीसदी की आबादी दर्ज है. छत्तीसगढ़ की ढाई करोड़ की कुल आबादी में 10 लाख ऐसे परिवार हैं, जो रियायती दरों पर पीडीएस की दुकानों से अनाज खरीद रहे है.

हालांकि शिकायत के बाद सरकारी अमले ने मिलावटखोरी के इस हैरतअंगेज मामले की जांच शुरू कर दी है. राज्य के खाद्य मंत्री पुन्नूलाल मोहले ने कहा है कि पुरे मामले की बारीकी से जांच करने के निर्देश दिए गए है. चावल की सप्लाई के श्रोत और मुहैया कराये जाने वाली दुकानों की पड़ताल भी की जा रही है. उनके मुताबिक जांच रिपोर्ट आने के बाद कड़ी कार्यवाही की जाएगी.

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