देहरादून में खुलेआम चल रही मौत की सवारी

राजधानी देहरादून का भी यही हाल है। जहां देहरादून वासियों को ओवरलोडिंग जैसी समस्या से रोजाना जूझना पड़ता है। हालत ये है कि कई बार सिटी बसों में ओवरलोडिंग इतनी हो जाती है कि बस में पैर रखने तक की जगह नहीं होती। जिस कारण कई सवारियां अपनी जान को जोखिम में डालकर बस के दरवाजे पर खड़े होकर सफर तय करती हैं।
एआरटीओ अरविन्द पांडेय ने बताया कि बसों या गाड़ियों में ओवरलोडिंग को रोकने के लिए मोटर व्हीकल एक्ट बनाया गया है। जिसके तहत परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस को ओवरलोडिंग रोकने की जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही पहाड़ी या दूरस्थ इलाकों में एसडीएम स्तर के अधिकारियों को यह पावर है कि कि वे ओवरलोडेड वाहनों का चालान कर उन पर कार्रवाई कर सकते हैं।
लेकिन मैदानी क्षेत्र हो या मैदानी क्षेत्र ओवरलोडिंग को रोकने में हमारा प्रशासन हमेशा से ही फेल साबित हुआ है। नतीजन, अक्सर दुर्घटनाएं होती रहती हैं और सवारियों को अपनी जान गंवानी पड़ती है।
इस ओवरलोडिंग की समस्या को लेकर डीआईजी ट्रैफिक केवल खुराना ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए नजर आये। उन्होंने कहा कि अभीतक ट्रैफिक पुलिस के पास यह अधिकार नहीं है कि वह ओवरलोडेड वाहनों का चालन कर उनपर कार्रवाई करे।
उन्होंने कहा कि पुलिस  द्वारा  शासन को  प्रस्ताव दिया जा चुका  है।  जिसके तहत ट्रैफिक पुलिस को सभी ओवरलोडेड वाहनों का चालान करने का अधिकार देने की बात कही गई है। इसके साथ ही प्रस्ताव में संबंधित ओवरलोडेड वाहनों के चालक और मालिक पर ठोस कार्रवाई करने का अधिकार पुलिस को देने की बात भी कही गयी है।

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