ओम माथुर ने बीजेपी की अहम बैठको से बनाई दूरी

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह यूपी में मिशन 2019 का आगाज कर चुके हैं. पार्टी संगठन को चुनाव से पहले मजबूत करने और जमीनी हकीकत को समझने के लिए शाह बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंचे थे, लेकिन राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और यूपी के प्रभारी ओम प्रकाश माथुर नजर नहीं आए. पिछले कई महीनों से मथुर पार्टी के अहम बैठकों और कार्यक्रमों से अनुपस्थित रह रहे हैं. माथुर प्रदेश संगठन मंत्री सुनील बंसल की कामकाज के रवैए से नाराज माने जा रहे हैं.

लोकसभा चुनाव से पहले तैयारियों के लिए पार्टी संगठन को नई धार देने के उद्देश्य से अमित शाह राज्य के दो दिवसीय दौरे पर हैं. शाह ने दौरे के पहले दिन मिर्जापुर और वाराणसी पहुंचकर काशी, गोरखपुर और अवध क्षेत्र की पार्टी नेताओं के साथ बैठक करके विचार-विमर्श किया. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक यूपी के प्रभारी ओम माथुर पार्टी के प्रदेश संगठन मंत्री सुनील बंसल और बीजेपी की प्रदेश इकाई के कामकाज से नाराज हैं. इसी के चलते माथुर पिछले 9 महीने से पार्टी की अहम बैठकों में शामिल नहीं हो रहे हैं. हाल के कई महीनों में शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और एनडीए के कई कार्यक्रम हुए, लेकिन वे किसी में नजर नहीं आए.

बीजेपी अध्यक्ष बुधवार को वाराणसी और मिर्जापुर की यात्रा पर थे. शाह ने बीजेपी की सोशल मीडिया व स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण बैठक को संबोधित किया. गोरखपुर, काशी और अवध क्षेत्र के नेताओं के साथ मुलाकात की थी. इस दौरान शाह के साथ पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव और अरुण सिंह मौजूद थे, लेकिन माथुर नजर नहीं आए. सूत्रों के मुताबिक वे राजस्थान में पार्टी के अहम कार्य के व्यस्त हैं.

शाह के नेतृत्व में होने वाली बीजेपी की सभी बैठकों में ओम माथुर को छोड़कर सुनील बंसल, आदित्यनाथ और बीजेपी के प्रदेश इकाई के अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय उपस्थित थे. बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने ओम माथुर की नाराजगी वाली बात को खारिज करते हुए कहा, ‘ये सच है कि पिछले कुछ महीनों में माथुर जी की सक्रियता यूपी में कम हुई है, क्योंकि वे विभिन्न राज्यों की जिम्मेदारियों में व्यस्त हैं. उन्हें एक चुनावी रणनीतिकार के रूप में जाना जाता है, उनके मार्गदर्शन में बीजेपी ने यूपी विधानसभा चुनाव के जीतने में सफल रही है. वह अन्य कार्यों के साथ व्यस्त है, लेकिन यूपी बीजेपी नियमित रूप से महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपना मार्गदर्शन दे रहे हैं.’

सूत्रों की माने तो माथुर यूपी में आखिरी बार कानपुर में अक्टुबर 2017 में हुई राज्य कार्यकारी बैठक में भाग लिया था. इस साल फरवरी में आरएसएस और उसके सहयोगी संगठनों के बीच हुई समन्वय बैठक में शामिल हुए.   सूत्रों के मुताबिक माथुर बीजेपी के प्रदेश इकाई संगठन में गुटबाजी से परेशान है. बीजेपी नेता ने कहा,’यूपी में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से गुटबाजी बढ़ी है. पार्टी के कुछ नेता माथुर के विचार-विमर्श किए बिना एकतरफा निर्णय लिए जा रहे हैं.’

यूपी के गोरखपुर, फूलपुर और कैराना लोकसभा उपचुनावों, राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों के उम्मीदवारों के चयन पर माथुर से चर्चा नहीं की गई. बीजेपी ने राज्य में तीनों लोकसभा उपचुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है. सूत्रों की माने तो माथुर यूपी का प्रभारी पद जारी नहीं रखना चाहते हैं. पिछले 9 महीने से वे पार्टी की हुई कई महत्वपूर्व बैठक में नजर नहीं हैं. इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व ने अब तक किसी दूसरे नेता को नियुक्त नहीं किया है. जबकि प्रदेश में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बैठकें और कार्यक्रम शुरू हो गए हैं.

ओम माथुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी माना जाता है. संघ के प्रचारक रह चुके हैं. मोदी के सीएम कार्यकाल के दौरान माथुर गुजरात के प्रभारी थे. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव प्रभारी के रूप में उन्हें जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जहां बीजेपी को जिताने में अहम भूमिका अदा की थी. इसके बाद ही 2014 में माथुर को यूपी के प्रभारी बनाया गया था.

इसी साल 21 अप्रैल को कांग्रेस के गढ़ माने जाने वाले रायबरेली में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने पब्लिक रैली को संबोधित किया था. सीएम योगी आदित्यनाथ और पार्टी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय मौजूद थे, लेकिन माथुर नजर नहीं आए. लखनऊ में 21 अप्रैल को 201 9 चुनावों की तैयारी पर राज्य कोर कमेटी के सदस्यों और अन्य पदाधिकारियों के साथ बीजेपी मुख्यालय में अमित शाह ने बैठक की थी. इसमें भी नजर नहीं आए.

यूपी विधान परिषद चुनावों में 16 अप्रैल को बीजेपी उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल करने के दौरान सरकार और संगठन के लोग मौजूद थे, पर ओम माथुर उपस्थित नहीं थे. लखनऊ में 11 अप्रैल को मुख्यमंत्री के आवास पर मंत्रियों, बीजेपी पदाधिकारियों और सहयोगियों दलों के नेताओं के साथ अमित शाह ने बैठक की थी. 14 मार्च को नगर निकायों के चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन की समीक्षा के लिए लखनऊ में बीजेपी की बैठक हुई. इसी दिन फुलपुर-गोरखपुर लोकसभा के उपचुनाव के नतीजे आए और बीजेपी दोनों सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा.

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