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ऑफिस हेल्पर ने बना ली 3 करोड़ की कंपनी

मुत्तुकुमार ने चेन्नई में प्रिंटिंग प्रेस में प्रिंटिंग की सारी बारीकियां सीख ली थीं। जिसके बाद उन्होंने अपनी बहन के घर पर स्क्रीन प्रिंटिंग का काम भी शुरू कर दिया। वे बताते हैं कि उनकके पास उस वक्त सिर्फ 1,000 रुपये थे।

मुत्तु सिर्फ सफलता के बारे में नहीं सोचते बल्कि वे पर्यावरण प्रेमी भी हैं। इसी वजह से वे अपनी डायरियों में तारीखें नहीं छापते। उन्होंने 2014 में ऑनलाइन सर्विस भी शुरू कर दी। उन्होंने अपनी वेबसाइट भी बनाई है।

 मुत्तु ने प्रिंटिंग सर्विसेज की वैराइटी बढ़ा दीं और प्रिटिंग मशीनें भी बदल दीं। उन्होंने डिजिटल प्रिंटिंग भी ऑफर करना शुरू कर दिया। इसी की बदौलत आज उनक कंपनी का टर्नओवर 3 करोड़ हो गया।

तमिलनाडु के मुत्तुकुमार ने 1992 में फिजिक्स विषय में ग्रैजुएशन किया था। लेकिन उस वक्त हालात कुछ ऐसे थे कि काफी खोजने के बाद भी उन्हें अपने फील्ड में नौकरी नहीं मिली। लेकिन जिंदगी गुजारने के लिए उन्होंने मजबूरी में एक प्रिंटिंग प्रेस में ऑफिस बॉय की नौकरी कर ली। लेकिन कुछ कर गुजरने का जज्बा लिए मुतु कुमार ने कुछ ही दिनों में प्रिंटिंग प्रेस के बारे में सारी जानकारी ली और खुद का प्रिंटिंग प्रेस खोल लिया। ऑफिस बॉय की नौकरी करते हुए उन्हें सिर्फ एक महीने हुए थे और उन्होंने ‘प्रिंटफास्ट’ नाम का एक प्रिंटिंग प्रेस खोल लिया। जिसमें उन्होंने सिर्फ 1,000 रुपये का इन्वेस्टमेंट किया था।

मुत्तुकुमार ने चेन्नई में प्रिंटिंग प्रेस में प्रिंटिंग की सारी बारीकियां सीख ली थीं। जिसके बाद उन्होंने अपनी बहन के घर पर स्क्रीन प्रिंटिंग का काम भी शुरू कर दिया। वे बताते हैं कि उनकके पास उस वक्त सिर्फ 1,000 रुपये थे। हालांकि शुरुआत के दिन काफी चुनौतियों भरे थे। लेकिन मुश्किलों से वे घबराए नहीं। उन्होंने हर मुश्किल को चुनौती की तरह लिया और उससे कुछ न कुछ सीखने की कोशिश की। इसी का नतीजा है कि वे आज इतने सफल हैं। बीते 20 सालों में उन्होंने उत्तरोत्तर वृद्धि की।

उन्होंने वक्त के साथ अपने बिजनेस को तो बदला ही साथ में खुद को भी बदला। उस जमाने में स्क्रीन प्रिंटिंग होती थी, लेकिन जैसे-जैसे समय बदलता गया प्रिंटिंग की तकनीक भी बदलती गई। यही उनकी सफलता का राज भी है। उन्होंने प्रिंटिंग सर्विसेज की वैराइटी बढ़ा दीं और प्रिटिंग मशीनें भी बदल दीं। उन्होंने डिजिटल प्रिंटिंग भी ऑफर करना शुरू कर दिया। इसी की बदौलत आज उनक कंपनी का टर्नओवर 3 करोड़ हो गया। आज पूरे चेन्नई में उनका प्रिंटिंग प्रेस काफी मशहूर है।

वह कहते हैं, ‘मैं खुद को बदलते वक्त के साथ अपडेट रखता हूं। फिर चाहे वो सॉफ्टवेयर की बात हो या फिर तकनीक की या फिर प्रिंटिंग टूल्स की, मैं हर नई तकनीक को जरूरत के मुताबिक बदल देता हूं।’ मुत्तू की कंपनी ‘प्रिंटफास्ट’ नॉर्मल प्रिंटिंग के साथ-साथ कैलेंडर, डायरी, डिजिटल डिजाइन और लोगो डिजाइन की सर्वि प्रदान करती है। उन्होंने 2014 में ऑनलाइन सर्विस भी शुरू कर दी। उन्होंने अपनी वेबसाइट भी बनाई है। मुत्तु सिर्फ सफलता के बारे में नहीं सोचते बल्कि वे पर्यावरण प्रेमी भी हैं। इसी वजह से वे अपनी डायरियों में तारीखें नहीं छापते।

वे कहते हैं कि कोई भी डायरी हो उसमें 40 से 60 फीसदी पन्ने खाली रह जाते हैं। एक डायरी को बनने में कई पेड़ों को काटने की जरूरत पड़ती है इसलिए डायरी में तारीखें नहीं लिखी होतीं औऱ फिर लोग उन्हें कभी भी इस्तेमाल कर लेते हैं। मत्तुकुमार इन दिनों अपनी कंपनी का बिजनेस बढ़ाने के बारे में सोच रहे हैं। उनकी योजना कंपनी में 300 कर्मचारी रखने की है। आने वाले समय में वे अपनी कंपनी का टर्नओवर 300 करोड़ तक पहुंचा देना चाहते हैं। मुत्तू ने अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। उन्होंने 2014 में मद्रास यूनिवर्सिटी से योग में एम ए किया और फिर एलएलबी भी की।

 

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