आखिर उत्तर बिहार क्यों है आतंकियों की फेवरेट जगह

पटना । बिहार में अक्टूबर 2013 में पीएम मोदी की पटना रैली से पहले सिलसिलेवार कई बम धमाके हुए थे। उस वक्त ही इन घटनाओं की जांच में ये खुलासा हुआ था कि राज्य में आतंकवाद की जड़ें गहरी हो चुकी हैं। खासकर राज्य के सीमांचल और मिथिलांचल इलाके आतंकवादियों की पनाहगाह बन गए हैं।

हाल-फिलहाल खुफिया विभाग ने 36 आतंकियों की सूची एंटी टेररिस्ट सेल को सौंपी है जिसमें कहा गया है कि बिहार के तीन दर्जन आतंकी देश को दहला सकते हैं। इसको लेकर खुफिया विभाग ने अलर्ट भी जारी कर दिया है। विभाग ने एटीएस को जिन आतंकियों की सूची सौंपी है, उनकी पहचान देश के अलग-अलग हिस्सों से गिरफ्तार आतंकियों ने की है।

सबसे बड़ा सवाल है कि आतंकियों ने बिहार को ही सबसे सुरक्षित क्यों माना है? इसका जवाब ये है कि आतंकवादी बिहार को इसलिए भी चुनते हैं कि यहां उत्तरी बिहार नेपाल से सटा हुआ है। इसी वजह से आतंकियों का भारत में घुसना और बाहर निकलना आसान हो जाता है।

उत्तर बिहार है आतंकियों के छुपने की फेवरेट जगह 

उत्तर बिहार की बात करें तो ये आतंकवादियों के छुपने की फेवरेट जगह है और आतंकवाद से इसका गहरा कनेक्शन भी कहा जा सकता है। इसके कई जिले आतंकवादियों के पनाहगाह हैं जिसमें दरभंगा, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर और मोतिहारी का नाम सामने आता है। यहां से सटे कई जगहों पर नेपाल की खुली सीमा भी है। इस मार्ग से आतंकी बेरोकटोक आवाजाही कर सकते हैं।

वर्ष 2000 में बिहार के सीतामढ़ी जिले में पहली बार दो आतंकियों की गिरफ्तारी हुई थी जिसमें आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के सदस्य मकबूल और जहीर की गिरफ्तारी की गई थी। इसके बाद जांच एजेंसियों के कान खड़े हो गए थे। उसके बाद फिर 2006 से आतंकी बिहार में दोबारा सक्रिय हुए और धीरे-धीरे सीमांचल और मिथिलांचल से लगातार आतंकियों के तार जुड़ते रहे और कई गिरफ्तारियां हुईं।

2006 में मुंबई की लोकल ट्रेन में बम ब्लास्ट की घटना के बाद पहली बार मधुबनी जिले का नाम आतंकी घटना में आया। तब बासोपट्टी के मोहम्मद कमाल को एटीएस टीम ने गिरफ्तार किया था। इसी दौर में सिमी (स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया) पर प्रतिबंध लगाया गया।

आतंकवाद की नई नर्सरी के रूप में उभरा दरभंगा

मिथिला की धरती पर पनप रहा आतंकवाद गौरवशाली अतीत और वर्तमान को दागदार बनाने पर तुला है। यहां आइएम की दस्तक से हर कोई चिंतित है। एनआइए कई बार कह चुका है कि मिथिलांचल में आइएम चुपके-चुपके अपने संगठन का विस्तार कर रहा है। बता दें कि 2006 में आतंकवादी नए ठिकाने के तौर पर दरभंगा में पनाह लेते रहे हैं। यहां से असादुल्लाह रहमान उर्फ दिलकश, कफील अहमद, नकी अहमद जैसे सरगना पकड़े जा चुके हैं।

हैदराबाद में हुए सीरियल ब्लास्ट के बाद तहसीन का नाम इंडियन मुजाहिदीन के सक्रिय सदस्य के तौर पर सामने आया था और वह समस्तीपुर का रहनेवाला है। उसे पढ़ने के लिए पिता ने दरभंगा भेजा था, जहां से वह गायब हो गया था। बाद में उसका नाम आतंकी घटनाओं में सामने आया और उसकी गिरफ्तारी हुई थी।

 

दरभंगा को ही क्यों चुना था?

जांच एजेंसियों की पड़ताल में यह सच सामने आया है कि आइएम का शातिर अहमद सिद्दी बप्पा उर्फ यासीन भटकल ने बेरोजगार युवाओं को गुमराह कर आतंकवाद का प्रशिक्षण देने केलिए दरभंगा जिले को ही चुना था। खुफिया सूत्रों की मानें तो आइएम के सदस्य अपना हित साधने के लिए मुस्लिमों की घनी आबादी वाले इलाकों को ही चुनते हैं।

13 आतंकियों में 12 दरभंगा के

देश में विभिन्न जगहों पर हुए बम विस्फोटों में कथित संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार हुए आइएम से जुड़े 13 लोगों में 12 दरभंगा के ही हैं। वे असादुल्लाह रहमान उर्फ दिलकश, कफील अहमद, तलहा अब्दाली उर्फ इसरार, मोहम्मद तारिक अंजुमन, हारुण राशिद नाइक, नकी अहमद, वसी अहमद शेख, नदीम अख्तर, अशफाक शेख, मोहम्मद आदिल, मोहम्मद इरशाद, गयूर अहमद जमाली और आफताब आलम उर्फ फारुक हैं। इनमें से एक मोहम्मद आदिल करांची (पाकिस्तान) का है।  बाकी 12 दरभंगा के हैं।

मोतिहारी से हुई थी भटकल और हड्डी की गिरफ्तारी

मोतिहारी की बात करें तो इसकी सीमा से इंडियन मुजाहिदीन के यासीन भटकल व अब्दुल असगर उर्फ हड्डी को गिरफ्तार किया गया था। अब तक अब्दुल करीम उर्फ टुंडा सहित कई कुख्यात हत्थे चढ़ चुके हैं। वहीं ब्लास्ट मामले में एनआइए द्वारा गवाह के तौर पर दरभंगा से हिरासत में लिए गए मेहरे आलम मुजफ्फरपुर के स्टेशन रोड स्थित होटल सिद्धार्थ के कमरा नंबर 110 से भाग निकला था।

27 अक्टूबर को पटना में सीरियल बम ब्लास्ट से मच गई थी सनसनी

27 अक्टूबर को पटना में सीरियल बम ब्लास्ट के बाद से पूरे बिहार में सनसनी फैल गई थी। यह साजिश छोटी-मोटी नहीं थी। इसमें कई लोगों की जान चली गई थी और दर्जनों घायल हुए थे। बोधगया की तर्ज पर पटना में आतंकी घटना को अंजाम दिया गया था। खुफिया विभाग को ठेंगा दिखाते हुए दहशतगर्द अपने मकसद में कामयाब हो गए। इसके पश्चात तो पूरे सुरक्षा चक्र पर सवाल खड़ा हो गया था।

 

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