आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में नौकरियों के नए अवसर

कुछ साल पहले तक कुछ ऐसे खेल थे, जिसमें इंसानों को हरा पाना कंप्यूटर के लिए नामुमकिन समझा जाता था। लेकिन ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ यानी एआई तकनीक ने मशीनों के लिए जटिल निर्णयों को समझना मुमकिन बना दिया है। इस तकनीक ने पांव पसारे हैं तो इसके विशेषज्ञों की भी जरूरत पड़ेगी ही। इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट युवाओं को यह विशेषज्ञताक्षेत्र नईसंभावनाएं दे रहा है। परंपरागत इंजीनियरिंग क्षेत्रों की अपेक्षा इस क्षेत्र में प्रतियोगिता अभी कम है।

5 बड़े क्षेत्रों में बढ़ेंगी नौकरियां
फिक्की और नैसकॉम की एक रिपोर्ट के अनुसार एआई की वजह से भारत के 5 प्रमुख औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों में तकनीकी विस्तार को बढ़ावा मिलेगा। एआई की वजह से आईटी, रिटेल, फाइनेंस, टेक्सटाइल और ऑटो सेक्टर में बड़ी संख्या में नौकरियां पैदा होंगी। एक आम धारणा है कि एआईसे कर्मचारियों की जरूरत कम हो जाएगी, लेकिन विशेषज्ञों की राय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रयोग से ऐसे लोगों की जरूरत भी बढ़ेगी, जो इन मशीनों को संभाल सकें और उनका निर्माणभी कर सकें। .

क्या है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वह तकनीक है, जिसमें एक कंप्यूटर प्रोग्राम दिए जा रहे निर्देशों को समझने के बाद उन्हें संरक्षित करता है और उनके आधार पर भविष्य की जरूरतों को समझते हुए निर्णय देता है। एआई ने मशीनों के बीच संवाद को भी मुमकिन बना दिया है। असल में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ ने रोबोटिक्स की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया है। रोबोट में अब इस तकनीक के चलते नया सीखने की क्षमता आ गई है। अब वह बहुत से काम करने का निर्णय खुद भी ले सकता है।

निवेश बढ़ा रहा रोजगार
गूगल, फेसबुक और लिंक्डइन जैसी तकनीकी क्षेत्र की अग्रणी कंपनियां एआई तकनीक में निवेश कर रही हैं और लोगों को रोजगार के अवसर दे रही हैं। स्मार्टफोन की तर्ज पर अब एआई तकनीक को हरेक उपकरण के साथ लाने की कोशिश की जा रही है।

‘फोरेस्टर रिसर्च’ की एक रिपोर्ट कहती है कि साल 2020 तक एआई तकनीक का मौजूदा बाजार तीन गुणा बढ़ कर सालाना 1.2 खरब डॉलर का हो जाएगा। हरेक क्षेत्र में एआई का उपयोग बढ़ रहा है,जो इस तकनीक के जानकार उम्मीदवारों के लिए अच्छा संकेत है। .

नौकरियों का बदलेगा स्वरूप 
उद्योग जगत में जिन नौकरियों के लिए उच्च कौशल की जरूरत होती है, उनकी मांग बनी रहेगी। लेकिन कुछ नौकरियों का ऑटोमेशन के चलते स्वरूप बदलेगा। इसलिए अपनी उपयोगिता बनाए रखने के लिए उम्मदीवारों को अपना तकनीकी कौशल बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। .

क्या हो शैक्षिक योग्यता
कंप्यूटर और गणित की आधारभूत शिक्षा प्राप्त छात्र एआई में करियर बना सकते हैं। कंप्यूटर साइंस से ग्रेजुएट उम्मीदवार भी इस क्षेत्र में कदम रख सकते हैं। इसके लिए बीएससी (कंप्यूटर साइंस) के साथ एआई में विशेषज्ञता कोर्स को चुनना ठीक रहेगा। इंजीनियरिंग के छात्र एआई में विशेषज्ञता अर्जित कर आगे बढ़ सकते हैं। मास्टर स्तर पर एआईके कोर्सआईआईटी मुंबई, मद्रास यूनिवर्सिटी व कुछ अन्य बड़े संस्थानों में उपलब्ध हैं। एआई से संबंधित पाठ्यक्रमों के लिए आईआईआईटी, इलाहाबाद; बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रांची; इग्नू का भी रुख कर सकते हैं। कुछ मुफ्त ऑनलाइन कोर्सेज हैं-इंट्रोडक्शन टु आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फॉर रोबोटिक्स (उडेसिटी), मशीन लर्निंग, न्यूरल नेटवर्क फॉर मशीन लर्निंग, कंप्यूटेशनल न्यूरोसाइंस (कोर्सेरा) .

किन पदों पर मिलता है रोजगार
एआई तकनीक के माहिर लोगों को शुरुआती स्तर पर सॉफ्टवेयर एनालेटिक्स, रोबोटिक्स प्रोग्रामर्स, एल्गोरिद्म स्पेशलिस्ट, गेमिंग क्षेत्र में प्रोग्रामर्स, सर्च इंजन में एनालेटिक्स जैसे पदों पर नौकरी मिल सकती है। जानकार उम्मीदवारों को शोध-संस्थानों, ऑटोमोबाइल्स, इंडस्ट्रियल टूल्स व निजी क्षेत्र में नौकरियां मिलने की उम्मीद रहती है। इसके अलावा जिन उम्मीदवारों ने रोबोटिक्स तकनीक की पढ़ाई की है, वे रोबोट टेक्नोलॉजी, कंप्यूटर कंट्रोल्ड मशीन प्रोग्रामिंग, रोबोटिक सेल्स में भी नौकरी पा सकते हैं।

इन पेशेवरों की रहेगी मांग
मैन-मशीन टीमिंग मैनेजर: भविष्य में कंपनियों की तरक्की इस पर निर्भर होगी कि वे मशीन और मानव के श्रम का कितना अच्छा उपयोग कर रही हैं। इस काम के लिए मैन-मशीन टीमिंग मैनेजर जैसी नौकरियां पैदा होंगी, जो मशीन व व्यक्ति के बीच के सामंजस्य बनाएंगे।.

‘ ये इंजीनियरिंग और ह्यूमन रिसोर्स दोनों के जानकार होंगे, जो अपनी कंपनी के लिए मशीन और मानव दोनों के बेहतर इस्तेमाल की रणनीति तैयार करेंगे। .

एथिकल सोर्सिंग ऑफिसर व डेटा डिटेक्टिव: ये एआई को लेकर बने नियमों को लागू करवाने का काम करेंगे। इस तरह एआई तकनीक के दुरुपयोग को रोका जा सकेगा। यह एथिकल हैकर से मिलता-जुलता काम होगा।.

‘ यह पेशेवर डेटा डिटेक्टिव सेंसर्स, बायोमेट्रिक मॉनिटर्स, कंप्यूटिंग से पैदा होने वाले डेटा के अध्ययन से बिजनेस से जुड़ी समस्याओं का हल निकालेंगे।.

– आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संबंधित शोध पढ़ें। इससे जुड़ी समझ से खुद को दुरुस्त रखें। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में मौजूद शोध पत्र पढ़ सकते हैं।

– आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए लीनियर एल्जेब्रा, प्रोबेबिलिटी, सांख्यिकी और अन्य गणितीय ज्ञान की जरूरत होती है। ज्यादा समय ‘एल्गोरिद्म’ (गणितीय सिद्धांत) को समझने में बिताएं और जानें कि वह कैसे काम करता है और उसे बेहतर कैसे बना सकते हैं।

– नौकरियों के लिए इंटरव्यू में जाने से पहले खुद से एक सवाल करें कि क्यों आप एआई और इससे संबंधित तकनीक जैसे मशीन लर्निंग में जाना चाहते हैं। इंटरव्यू के शुरुआती दौर में यह सवाल पूछा जाएगा और आपको इसका जवाब पता होना चाहिए। .

– स्किल को बेहतर बनाने के लिए ऑनलाइन कोर्सेस का सहारा लें।

शोध को दिया जा रहा बढ़ावा
देश के इतिहास में पहली बार इस साल आम बजट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का जिक्र किया गया था। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों में शोध को बढ़ावा देने के लिए सरकार पीएम रिसर्च फेलोशिप के तहत एक हजार बेहतरीन छात्रों को चुनेगी। इस फेलोशिप के लिए बीटेक फाइनल इयर के बेहतरीन छात्रों को चुना जाएगा। अब देश के सभी तकनीकी संस्थानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर शोध, पढ़ाई और आविष्कार को बढ़ावा देने की योजना है। अटल इनोवेशन मिशन के साथ इसकी शुरुआत हो गई है। साल 2018 के आखिर तक लगभग 2 हजार स्कूलों में छात्रों को व्यावहारिक शिक्षा के लिए लैब की सुविधा दे दी जाएगी। देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर विशाल स्तर पर शोध होंगे। इस पर 1000 करोड़ रुपयों से अधिक खर्च करने की योजना है।

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